खेती के लिए छोड़ दी अच्छी-खासी नौकरी, पहले हुई जगहंसाई, बिहार के लाल अब कमा रहे हैं लाखों रुपये…

लाइव सिटीज डेस्क :  एक आईडिया जो आपकी जिंदगी बदल सकता है. ये कथन तो आपने सुना ही होगा. आज 21वीं सदी में आईडिया की कीमत सबसे ज्यादा है. चाहे वो रोजगार की बात हो या फिर निजी जीवन में. अगर आपके पास एक यूनिक आईडिया हो, तो आप उससे अपने साथ कई लोगों के जीवन बदल सकते हैं. ऐसा हम इसलिए कह रहे हैं क्योंकि आज के समय में बहुत सारे लोग नए प्रयोग करने से डरते हैं. जिस वजह से वो करियर से लेकर पर्सनल लाइफ में भी संर्घष करते नजर आते हैं. लेकिन वहीं कुछ लोग ऐसे भी होते हैं, जो लीक से हटकर काम करने में विश्वास रखते हैं और अपने आईडिया को अंजाम तक पहुंचा कर समाज के सामने मिसाल बन जाते हैं.

ऐसे ही शख्स हैं बिहार के सिवान जिले के रहने वाले धीरेंद्र और आदित्य. इन्होंने अपने एक आईडिया से आज उन तमाम युवाओं को प्रेरित किया है, जो नौकरी की तलाश में है या अपनी 10 से 6 की नौकरी से संतुष्ट नहीं हैं. धीरेंद्र और आदित्य ने अच्छी खासी नौकरी छोड़कर खेती को रोजगार के रूप में अपनाया है. इस स्वरोजगार से ही लाखों रुपए की कमाई कर रहे हैं.

धीरेंद्र और आदित्य मूल रूप से बिहार के सिवान जिले के रहने वाले हैं. धीरेंद्र ने मैनेजमेंट और लॉ की पढ़ाई कर मल्टीनेशनल कंपनी में काम कर रहे थे. वहीं आदित्य माइक्रोबायलॉजी की डिग्री के साथ विदेश में काम करते थे. धीरेंद्र और आदित्य की दोस्ती काफी पुरानी है, लेकिन करीब दो साल पहले इन दोनों ने साथ में बिजनेस पार्टनर बने. लेकिन बिजनेस आईडिया क्या है इसका कोई अता-पता नहीं था. काफी विचार-विर्मश करने के बाद दोनों ने खेती को रोगजार के रूप में अपनाने के लिए सोचा. इसके लिए दोनों ने खुद को बिहार सरकार के एग्रीकल्चर टेक्नोलॉजी मैनेजमेंट एजेंसी से खुद को रजिस्टर्ड कराया.

धीरेंद्र कहते हैं कि जब उन्होंने इस आईडिया के बारे में लोगों को बताया, तो सभी को लगा कि ये बवकूफी वाला निर्णय है. अच्छा खासा एमएनसी का जॉब छोड़कर खेती करना लोगों को ठीक नहीं लगा. इस पर लोगों ने हमारी हंसी भी उड़ाई. लेकिन हम दोनों अपने आईडिया को लेकर दृढ़ निश्चय थे. हमने ‘लोग क्या कहेंगे’ की परवाह न करते हुए अपने आईडिया पर फोकस किया. जिस वजह से आज खेती से ही हमें लाखों रुपए की इनकम हो जाती है.

वहीं आदित्य बताते हैं कि शुरुआत में हम अपने इस आईडिया को लेकर सीवान के कृषि विशेषज्ञ और मशरूम उत्पातदन और प्रशिक्षण समिति के प्रेसिडेंट बीएस वर्मा से मिले. उनके ही पॉलीहाउस में हमने खेती शुरू की. करीब 1 एकड़ में फैले पॉलीहाउस में उन्होंने पहले साल टमाटर और शिमला मिर्च की खेती शुरू की. इसमें धीरेंद्र और आदित्य कामयाब भी हुए.

पहले वर्ष धीरेंद्र और आदित्य् को लाखों में मुनाफा हुआ. इसके अलावा जो सबसे खास बात यह है कि कई लोगों को इससे रोजगार भी मिला. इस प्रोजेक्ट में धीरेंद्र और आदित्य को ATMA से जुड़े केके चौधरी, आरके मंडल के अलावा हॉर्टीकल्चटर डिपार्टमेंट के पीके मिश्रा और आरपी प्रसाद का सहयोग मिला. धीरेंद्र और आदित्य अब मशरूम की खेती कर रहे हैं, पॉलीहाउस में तीन रैक बनाकर मशरूम उगा रहे हैं. इस सीजन में धीरेंद्र और आदित्य को मशरूम की खेती से 10 लाख रुपए तक की कमाई की उम्मीद है. अब धीरेंद्र और आदित्य की योजना फूड प्रोसेसिंग यूनिट लगाने की है. इसके जरिए मशरूम से बनने वाले फूड प्रोडक्ट को तैयार किया जाएगा. इसके अलावा किसानों से जुड़कर उन्हें अधिक से अधिक रोजगार मुहैया कराया जाएगा.

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हम हैं आदित्य. फैन हैं. किसी आम इंसान के नहीं. भगवान के. वो भी ऐसे-वैसे भगवान नहीं. देवों के देव महादेव के. उनके जो इस सृष्टि के संचालक हैं. हां हम धार्मिक आदमी हैं. भगवान को मानते हैं. बम भोले-बम भोले का जाप करते हैं. कर्मठ व्यक्ति हैं. श्रम का महत्व समझते हैं. इसलिए उसे बचाकर खर्च करते हैं. देखने में ठीक-ठाक है. पर फिर भी खराब दिखते है. ये सखी कहती है. बाकी हमारी जिंदगी का एक्कै मकसद है. उस चीज को पाना, जिसे पाना मुश्किल हो. कहने को लाइफस्टाइल जर्नलिस्ट है. फेसबुक पर प्रेम और फूड पर बहुत लिखते हैं. मगर जब कोई इनबॉक्स में आकर कहता है, आप अच्छा लिखते हैं. तो शर्माकर नीले हो जाते हैं. क्योंकि शिव का रंग भी, तो नीला ही है. बाकी की जानकारी मुझसे मिलकर ही पता की जा सकती है. हां मुझे समझने में आपको परेशानी हो सकती है. लेकिन ये मेरी नहीं आपकी दिक्कत है.

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