इस आधुनिक कुम्हार ने बनाया बिना बिजली से चलने वाला फ्रिज, पीएम मोदी भी कर चुके हैं इनकी तारीफ

लाइव सिटीज डेस्क : आपके घर में फ्रिज तो होगा ही पर क्या वो बिना बिजली के चलता है? नही न आज के समय में कोई चीज ऐसी नही जो बिना बिजली के न चलती हो सभी बिजली से चलती हैं. लेकिन इस सख्श ने बिना बिजली का फ्रिज बनाया है. जी हां आपने सही सुना बिना बिजली का फ्रिज आपने ये तो देखा ही होगा कि मिट्टी से क्या कुछ नही बन जाता घर तक बन जाता है. कभी बचपन से ही मिट्टी से खलने वाले और मिट्टी की ही कारीगरी करने वाले मनसुखभाई प्रजापति ने वो कर दिखाया है जो आज के दौर में कईयों के लिए मिसाल है.



मिट्टी के बर्तन बनाने का पांरपरिक व्यवयाय

मनसुखभाई का मिट्टी के बर्तन बनाने का पांरपरिक व्यवयाय था. लेकिन उन्हें इस व्यवयाय के अस्तित्व को लेकर डर था. क्योंकि इसका कारोबार दिन-बी-दिन गिर रहा था. वह अपने इस पुश्तैनी कारोबार को जिन्दा रखना चाहते थे. ऐसे में उन्होंने आज के वक्त की जरूरत को परखते हुए कुछ नया करने की सोची.

बिजनेस के आधुनिक माइंडसेट को बारीकी से समझा

उन्होंने बिजनेस के आधुनिक माइंडसेट को बारीकी से समझा और मिट्टी कि खुशबू बरकरार रखने के लिए ‘मिट्टीकल’ नाम की कंपनी बनाई. कंपनी मिट्टी के फ्रिज, कुकर और वाटर फिल्टर बनाती है. उन्होंने बिना बिजली से चलने वाला फ्रिज बनाया है, जो खासतौर पर दूर दराज रहने वाले लोगों के लिए बेहद उपयोगी है. इस फ्रिज की कीमत लगभग 3000 के आस-पास है.

पुश्तैनी कारोबार को जिन्दा रखने के लक्ष्य को एक नई दिशा 

इस कंपनी ने उनके पुश्तैनी कारोबार को जिन्दा रखने के लक्ष्य को एक नई दिशा प्रदान की. मनसुखभाई प्रजापति कहते हैं कि वह बचपन से ही मिट्टी के बर्तन देखते आए हैं. समय के बदलाव के साथ मिट्टी के बर्तनों की कम हो गई.

बाजारवाद की वजह से अपनी साख पर बट्टा लगता नजर आ रहा था

मनसुखभाई प्रजापति बताते हैं कि मैं हमेशा सोचता कि इस पुश्तैनी कारोबार को कैसे बरकरार रखा जाए. फिर हमने तय किया कि कारोबार को समय के अनुसार परिवर्तित करना होगा. मिट्टी के बर्तन बनाने वाले परिवार की पहले बहुत पूछ होती थी. घर के कोई भी आयोजन हो, लोग हमारे घर की ओर दौड़े चले आते थे. लेकिन बाजारवाद की वजह से अपनी साख पर बट्टा लगता नजर आ रहा था, इसलिए मैंने तय किया कि अपना पुश्तैनी कारोबार भी जिंदा रखूंगा और मिट्टी की खुशबू भी, बस उसमें थोड़ा
परिवर्तन करने की सोची. यानी इस कारोबार को आधुनिक रंग में रंगने की कोशिश शुरू की. साइंटिफिक तरीके से मिट्टी की नई-नई चीजें विकसित की. इसके बाद तो यह कारोबार फर्राटे मारने लगा.

अपने पांरपरिक पेशे को नई बुलंदियों पर पहुंचाने वाले मनसुखभाई को अंतरराष्ट्रीय मैगजीन फोर्ब्स ने ग्रामीण भारत के शक्तिशाली लोगों की सूची में शामिल किया हुआ है. वहीं, पूर्व राष्ट्रपति डॉ. अब्दुल कलाम ने भी उन्हें ‘ग्रामीण भारत का सच्चा वैज्ञानिक’ की उपाधि से सम्मानित किया था.

मनसुखभाई ने एक वक्त ऐसा भी देखा हुआ है, जब उन्हें अपने परिवार का पालन-पोषण करने के लिए पढ़ाई बीच में ही छोड़ चाय बेची. मनसुखभाई ने अपने पुश्तैनी कारोबार को जिन्दा रखने के लिए आज की आधुनिक सोच के साथ हाथ मिलाया, वो उनके बेहतरीन बिजनेस स्किल को तो दर्शाता ही है, साथ ही कई लोगों के सामने एक मिसाल भी कायम करता है.