लाइव सिटीज डेस्क : यदि आप अपना मोबाइल नंबर बदले बिना अपनी टेलीकॉम कंपनी बदलना चाहते हैं, तो मार्च 2019 के पहले ये काम करवा लीजिए, क्योंकि इस अवधि के बाद ये काम करने वाले दोनों कंपनी की लाइसेंस अवधि खत्म हो रही है, और इन कंपनियों ने सरकार को पत्र लिखा है कि ये पोर्टेबिलिटी शुल्क में 80 फीसदी तक कमी होने के कारण इनको घाटा हो रहा है और ये अपना कारोबार लाइसेंस अवधि समाप्त होते ही बंद करना चाहती है.

3 जुलाई 2015 को शुरू हुई थी सुविधा

तीन जुलाई 2015 को केंद्र सरकार ने मोबाइल सर्विस प्रदाता कंपनी बदलने की सुविधा उपभोक्ताओं को दी थी. इसके बाद अपनी मौजूदा मोबाइल कंपनी के सर्विस से परेशान करोड़ों लोगों ने इस सुविधा का लाभ उठाया और आज भी इस सुविधा का फायदा ले रहे हैं. इस सुविधा को मोबाइल नंबर पोर्टेबिलिटी नाम दिया गया था.

दूरसंचार कंपनी को पत्र लिखा

आपको बदा दें कि मोबाइल नंबर पोर्टेबिलिटी सुविधा देने वाली देश की दो कंपनियां हैं, जिनके जिम्मे दक्षिण पूर्व और उत्तर-पश्चिम की जिम्मेदारी है. किन्तु ये कंपनियां लगातार घाटे में होने से बंद होने की कगार पर पहुंच गई है. इन कंपनियों का कहना है कि इनका हर दिन घाटा बढ़ता जा रहा है क्योंकि ट्राई के आदेश से नंबर पोर्टेबिलिटी का शुल्क कम हो गया है और इन कंपनियों को रोज घाटा हो रहा है, जो अब ये और घाटा सहन नहीं कर सकती है.

मार्च 2019 में लाइसेंस की अवधि समाप्त हो रही है

एमएनपी इंटर कनेक्शन टेलीकॉंम सॉल्युशंस और सीनिवर्स टेक्नालॉजीस ने दूरसंचार मंत्रालय को पत्र लिखकर कहा है कि ट्राई के निर्देशानुसार नंबर पोर्टेबिलिटी शुल्क में जनवरी तक 80 फीसदी शुल्क कटौती कर दी गई है, जिससे हमको रोज नुकसान हो रहा है. हम ये नुकसान नहीं उठा सकते हैं, इसलिए मार्च 2019 में हमारे लाइसेंस की अवधि समाप्त हो रही है, इसके बाद हम लाइसेंस रिन्यू नहीं करवाएंगे और अपना कारोबार बंद कर देंगे.

इसके बाद फिलहाल नहीं होगा ऑप्शन

अगर इन कंपनियों की धमकी पर ध्यान नहीं दिया गया तो उपभोक्ताओं को कॉल क्वालिटी, टैरिफ और अन्य शिकायतों पर बगैर मोबाइल नंबर बदले अपनी टेलीकॉम सर्विस प्रदाता कंपनी को बदलने की सुविधा या नंबर पोर्टेबिलिटी सुविधा बंद हो सकती है. आपको बता दें कि देश में दो ही कंपनी है, जिनके जिम्मे ये काम सौंपा गया है, एमएनपी इंटर कनेक्शन टेलीकॉंम सॉल्युशंस दक्षिण और पूर्वी भारत और सीनिवर्स टेक्नालॉजीस उत्तर व पश्चिमी भारत में काम करती है. इस साल मार्च तक ये दोनों कंपनियां 37 करोड़ नंबर पोर्टेबिलिटी कर चुकी है.