स्वपनदोष एक सामान्य शारीरिक क्रिया है, जिसमें वीर्य से भरे हुए शुक्राणुओं को शरीर खाली कर देता है. ताकि नया और ताजा वीर्य उसकी जगह भरता रहे. वीर्य को निकालने की यह क्रिया स्वपन के माध्यम से होती है. सामान्यतः पुरूष स्वप्न में देखता है कि वह किसी नारी के साथ संभोग कर रहा है और उसी समय उसका वीर्य स्खलित हो जाता है, परंतु स्वप्न देखना जरूरी नहीं है. कई बार ऐसा भी होता है कि जब पुरूष सोकर उठता है तो पता चलता है कि उसका वीर्य स्खलित हो चुका है.

स्वप्नदोष होने की अवधि विभिन्न व्यक्तियों में विभिन्न समय पर कमती-बढ़ती होती रहती है. किसी सप्ताह में दो-तीन बार हो जाता है और उसके बाद महीने – सवा महीने तक नही होता है. एक माह में 2 से 4 बार नाईट फॉल सामान्य है. यह कोई रोग नही होता है, प्राकृतिक है. लेकिन महीने में 5 बार से ज्यादा नाईट फॉल होना बीमारी में शामिल हो जाता है. किसी-किसी को महीने में 18 से 20 बार भी नाईट फॉल होता है. ऐसे लोगों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए. तत्काल चिकित्सा सेवा लेना चाहिये.

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प्रतीकात्मक फोटो

रोग के कारण : अत्यधिक हस्तमैथून की प्रवृत्ति, वासनामय कामुक पुस्तकों को पढ़ना या फिल्में देखना, गंदे लोगों का साथ, छोटी उम्र में ही स्त्री प्रसंग की अधिकता, टीवी मोबाइल पर अत्यधिक उत्तेजक कार्यक्रम देखना, शारीरिक परिश्रम की कमी और फालतू बैठे रहना, रचनात्मक कार्यों में ध्यान न लगाकर सिर्फ सेक्स के बारे में सोचते रहना, मल या मूत्र के वेग को ज्यादा देर तक रोके रखने से ये बीमारी अधिकतर देखा गया है.

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रोग के प्रमुख लक्षण : ज्यादा स्वप्नदोष होने पर निम्नलिखित लक्षण दिखाई देते हैं. ऐसे रोगी शिकायत करते हैं कि जिस रात्रि को उन्हें स्वप्नदोष होता है, उसके अगले दिन उनका शरीर ढीला-ढाला रहता है और कमजोरी महसूस होती है. कुछ रोगियों को सिर और कमर में दर्द होता है अथवा मानसिक अवसाद रहता है. कुछ युवकों की दृष्टि की एकाग्रता में कमी और आंखों के पीछे की तरफ पीड़ा की शिकायत होती है. सिर में भारीपन एवं चक्कर, चेहरे की रौनक कम होना, आँखों के नीचे कालापन, स्मरण शक्ति का ह्रास होना, कभी-कभी मूत्र के साथ वीर्य आना, मानसिक चिंता और गम में डूबे रहना, मुख व कंठ को सुखना. इस प्रकार के अनेकों लक्षण लगभग निश्चित रूप से रोगियों को देखने को मिलते हैं.

चिकित्सा : सामान्य चिकित्सा में रात में सोने से पहले रोगी को मूत्रत्याग अवश्य कर लेना चाहिए एवं रात्रि में जिस समय आंख खुले, पेशाब कर लेना चाहिए. क्योंकि मूत्राशय भरा रहने पर इसका बोझ शुक्रशयों पर पड़ता है, जिससे वीर्य स्खलित हो जाता है.

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कुछ रोगियों में प्रातःकाल लगभग एक निश्चित समय, लगभग पांच और साढ़े पांच के बीच स्वप्नदोष होता है. ऐसे रोगियों को ऐसा अभ्यास करना चाहिए कि वे इस समय के पहले उठ जाएं और शौच आदि क्रियाओं से निबट कर खुली हवा में टहलने चले जायें. रोगी को भोजन में पौष्टिक आहार लेना चाहिये. वीर्य को गाढ़ा करने के लिए सूखे मेवे, जैसे – बादाम, पिस्ता अच्छे रहते हैं. साथ ही भोजन में देशी घी, दाल, बेसन और गेँहू की रोटी और हरे पत्ते की सब्जियां जरूर सेवन करनी चाहिए. दूध-दही का प्रयोग अच्छा रहता है. अंकुरित चने, गेहूं और मोंठ भी शक्तिबर्धक होते है.

औषधि चिकित्सा – औषधीय चिकित्सा किसी विशेषज्ञ आयुर्वेदिक डॉक्टर से संपर्क कर ही लेना चाहिए. बिना डॉक्टर के सलाह से कभी भी मार्केट में उपलब्ध दवा का सेवन करना हानिकारक साबित होगा.

इससे जुड़ी किसी भी तरह की समस्या के समाधान के लिए पटना के जाने-माने सेक्स रोग विशेषज्ञ डॉ. मधुरेन्दु पाण्डेय (बी.ए. एम.एस) से संपर्क किया जा सकता है. उनका कांटेक्ट नंबर है : 9431072749/9835081818. उनके क्लिनिक का पता है : मनोरमा मार्केट, बंगाली अखाड़ा, डी एन दास लेन, लंगर टोली, पटना-4, बिहार. आप इनकी ऑफिसियल वेबसाइट www.sexologistinpatna.com पर भी जाकर अपनी अप्वाइंटमेंट फिक्स करा सकते हैं.

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