इंडिया में इन 5 जॉब्स में होता है सबसे ज्यादा टेंशन

लाइव सिटी़ज डेस्क : आज के दौर में नौकरी पाने के लिए हमें हज़ारों लोगों से Competition करना पड़ता है. जब इतनी ज़द्दोज़हद के बाद नौकरी मिलती है तो उस में बने रहने के लिए हर दिन कुछ नया करना पड़ता है. इसके लिए हमें ओवरटाइम भी करना पड़ता है.ज़्यादा काम कराये जाने के कारण हम इस प्रेशर को हैंडल नहीं कर पाते हैं, और यूथ इसी प्रेशर के कारण डिप्रेशन के शिकार हो रहे हैं.

अपना करियर तय करने से पहले हम कुछ फैक्टर्स पर बहुत सोचते हैं जैसे कि, सुविधाएं और सैलरी. बहुत कम लोग जॉब से जुड़े हुए स्ट्रेस लेवल पर ध्यान देते हैं. स्ट्रेस या तनाव एक ऐसी चीज है जिसे हम ऑफिस वर्क से पूरी तरह तो नहीं हटा सकते, लेकिन हम ऐसी नौकरी के बारे में तो सोच ही सकते हैं जिससे हमारे जीवन में तनाव कम रहे.

आइये जानते हैं ऐसे ही कुछ तनावपूर्ण जॉब्स के बारे में, जिसमें स्ट्रेस बढ़ने की आशंका ज्यादा हो जाती हैकरियर में आगे बढ़ने का प्रेशर हो या फिर अच्छी नौकरी पाने का प्रेशर, हर कोई इससे जूझ रहा है.

हेल्थकेयर प्रोफेशनल्स

जो लोग अपनी जिंदगी में थेरेपिस्ट, नर्स या बतौर डॉक्टर काम कर रहे हैं, उन्हें रोजाना ही बीमारी से परेशान लोगों को देखना पड़ता है. किसी भयानक रोग के शिकार मरीज को या एक्सीडेंट में घायल इंसान को देखना इतना आसान नहीं है. कभी-कभी किसी डेड बॉडी को देखना भी दर्दनाक होता है. हर रोज ऐसी चीजें देखने से आपका तनाव बढ़ सकता है.

हॉस्पिटेलिटी  इंडस्ट्री

वेटर से लेकर डिलीवरी बॉय तक या शेफ से मैनेजर तक हर किसी प्रोफेशनल को क्लाइंट के सामने हर स्थिति में एक स्माइल रखनी होती है. कई बार क्लाइंटस काफी बदतमीज और परेशान करने वाले होते हैं, लेकिन फिर भी बिना किसी शिकायत के इस प्रोफेशन के लोगों को उनका वेलकम करना होता है.

सोशल वर्कर्स

एक सोशल वर्कर की लाइफ भयानक तनाव से भरी होती है. किसी भी तरह की आपदा से पीड़ित लोगों या कोई खराब हालात से गुजर रहे इंसानों की मदद करना, वो भी बिना किसी प्रशंसा के आसान नहीं होता. दूसरों के लिए बिना वजह लड़ना कई बार आपके दिमाग को तनाव से भर देता है.

मेंटेनेंस वर्कर्स

अगर ईमानदारी से बात की जाए तो हमने कितने बार एक प्लम्बर, इलेक्ट्रीशियन, स्वीपर और कन्स्ट्रक्शन मजदूरों को उनके काम के बाद धन्यवाद कहा होगा? भले ही वो अपना काम कितनी भी ईमानदारी से करते हो. उन्हें बदले में न कोई सिक्योरिटी मिलती है और ना ही कोई बड़ी सैलरी.

मिलिट्री

अपने देश के लिए लड़ना और जान देना कोई मामूली बात नहीं है. सेना में रहने वालों को अपनी फेमिली से भी ज्यादातर वक्त दूर रहना पड़ता है. कई दिनों तक बिना भोजन और पानी के रहना और सामने वाले सैनिकों को मारना आसान काम नहीं है. इन्हीं सब वजहों से इनमें स्ट्रेस का लेवल तेजी से बढ़ता है.

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