मशरुम गर्ल ने ऐसे खड़ी की करोड़ों की कंपनी, हजारों महिलाओं को दे रही रोजगार, प्रदेश करता है नाज

लाइव सिटीज डेस्क : कहते हैं कि जिंदगी में कुछ कर गुजरने की ठान ली जाए तो सारी मुश्किलें आसान हो जाती हैं. तमाम मुश्किलों का सामना करते हुए रूद्रप्रयाग जिले के भीरी गांव की दिव्या रावत ने कुछ ऐसा ही कर दिखाया है. महिला किसान की बात करने पर लोगों के जेहन में अभी तक सिर्फ महिला मजदूरों की तस्वीर आती थी, लेकिन कुछ महिलाएं सफल किसान बनकर इस भ्रम को तोड़ रही है.



उत्तराखंड में मशरूम लड़की के रूप में मशहूर हो चुकी दिव्या रावत आज लोगों के लिए किसी मिसाल से कम नहीं आज पूरा प्रदेश रंजना पर नाज करता है. पहाड़ों पर बढ़ते पलायन को रोकने के लिए रंजना ने अपनी फार्मासिस्ट की नौकरी तक छोड़ दी. दिव्या रावत ने अपने गांव में ही रहकर मशरूम की खेती करने की ठान ली.

घरवालों ने विरोध किया

दिव्या रावत के इस फैसले का घरवालों ने विरोध किया लेकिन इस सबके बावजूद रंजना ने मशरूम उत्पादन के जरिए स्वरोजगार का मजबूत जरिया तैयार करने की ठानी. तीन महीने की ट्रेनिंग के बाद आज दिव्या 30 से 40 हजार रुपए की बीच कमाती है. खास बात ये है कि दिव्या अपनी तरह की करीब 1300 लोगों को भी इस रोज़गार से जोड़ चुकी हैं.

सालाना एक करोड़ से ज्यादा की कमाई 

उत्तराखंड की दिव्या रावत मशरूम की खेती से सालाना एक करोड़ से ज्यादा की कमाई करती है, उनकी बदौलत पहाड़ों की हजारों महिलाओं को रोजागार भी मिला है, जिसके लिए उन्हें राष्ट्रपति द्वारा नारी शक्ति पुरस्कार से सम्मानित भी किया जा चुका है.

दिव्या बताती हैं, पढ़ाई के दौरान जब कभी वो घर लौटती थीं अधिकांश घरों में ताले लटके मिलते थे. 4000 से 5000 की नौकरी के लिए स्थानीय लोग दिल्ली जैसे शहर भाग रहे थे. दिव्या की बातों में दम भी है. रोजगार के लिए पहाड़ों से पलायन करने वालों की संख्या तेजी से बढ़ी है.

हजारों घरों में हो रही 10-15 हजार रुपए की कमाई

स्थानीय मीडिया रिपोर्ट की माने तो पिछले 17 वर्षों में करीब 20 लाख लोग उत्तराखंड को छोड़कर बड़े शहरों में रोजी-रोटी तलाश रहे हैं. दिव्या की बदौलत अब इनमें से हजारों घरों में लोग 10-15 हजार रुपए की कमाई करते हैं.

मशरूम ऐसी फसल है जिसमें लागत काफी कम आती है. 20 दिन में उत्पादन शुरु हो जाता है और करीब 45 दिन में ही लागत निकल आती है. दिव्या ने मशरूम की खेती को इतना सरल कर दिया है कि हर व्यक्ति इसे कर सकता है.

ब्रांड अम्बेसडर होने के बावजूद वो सड़क पर खड़े होकर खुद मशरूम बेचती हैं, जिससे वहां की महिलाओं की झिझक दूर हो और वो खुद मशरूम बेच सकें. दिव्या का कहना है अभी उत्तराखंड में इतना मशरूम पैदा नहीं हो रहा है कि उसका बाहर निर्यात किया जा सके, यहां मशरूम की बहुत खपत है. वो बताती हैं, पहाड़ की महिलाएं बहुत धैर्यवान होती हैं, मशरूम उन्हें धनवान भी बनाएगा.

उत्तराखंड की एक लड़की दिव्या रावत जिसने पहाड़ में एक ऐसा व्यवसाय खड़ा कर दिया है जिसके कारण वह आज उत्तराखंड की मशरूम लेडी कहलाती है.