सन् 1588 में एक मुसलमान पीर ने रखी थी सिख धर्म की आस्था के केंद्र स्वर्ण मंदिर की नींव

लाइव सिटीज डेस्क : भारत में एक ऐसा मंदिर है जहां सभी धर्म के लोग आते हैं और पूरी आस्था के साथ अपना सिर झुकाते हैं. पंजाब के अमृतसर में स्थित स्वर्ण मंदिर में सिख धर्म के लोगों के साथ ही अन्य धर्म के लोग भी पूरी आस्था के साथ आते हैं. इस मंदिर में 35 प्रतिशत पर्यटक सिख धर्म के अलावा अन्य धर्मों के होते हैं.



मंदिर में 24 घंटे हलवा की व्यवस्था रहती है

इस मंदिर में 24 घंटे हलवा की व्यवस्था रहती है. अनुमान के मुताबिक, रोज यहां दो लाख रोटियां बनती हैं. इस मंदिर में साधारण से लेकर अरबपति तक अपनी सेवा देते हैं. ये जूते पॉलिश से लेकर थाली तक साफ करते हैं. इस मंदिर का किचन वर्ल्ड का सबसे बड़ी किचन है. यहां पर रोज 70-75 हजार लोग फ्री में खाना खाते हैं.

सिखों के चौथे गुरु रामदासजी ने तालाब का निर्माण शुरू किया था

ऐसा कहा जाता है कि मुगल बादशाह अकबर ने भी गुरु के लंगर में आम लोगों के साथ बैठकर प्रसाद खाया था. लेकिन इस मंदिर को लेकर एक और बात है जो इसे खास बनाती है और वो है सिख धर्म की आस्था के केंद्र स्वर्ण मंदिर की नींव मुसलमान पीर सूफी संत साईं मिया मीर ने रखी थी. इसका पूरा उल्लेख स्वर्ण मंदिर में लगे शिलालेखों में है. सिखों के चौथे गुरु रामदासजी ने तालाब का निर्माण शुरू किया था.

सूफी संत साईं मिया मीर का सिख धर्म के प्रति शुरू से ही झुकाव था

सूफी संत साईं मिया मीर का सिख धर्म के प्रति शुरू से ही झुकाव था. वे लाहौर के रहने वाले थे और सिखों के पांचवें गुरु अर्जन देव जी के दोस्त थे. जब हरमंदिर साहिब के निर्माण पर विचार किया गया, तो फैसला हुआ था कि इस मंदिर में सभी धर्मों के लोग आ सकेंगे.

लाहौर के सूफी संत साईं मियां मीर से दिसंबर 1588 में गुरुद्वारे की नींव रखी

इसके बाद सिखों के पांचवें गुरु अर्जन देव जी ने लाहौर के सूफी संत साईं मियां मीर से दिसंबर 1588 में गुरुद्वारे की नींव रखवाई थी. स्वर्ण मंदिर को कई बार नुकसान पहुंचाया गया था, लेकिन भक्ति और आस्था के इस केंद्र का फिर से निर्माण कराया गया.

ऐसा माना जाता है कि 19वीं शताब्दी में अफगान हमलावरों ने इस मंदिर को पूरी तरह नष्ट कर दिया था. तब महाराजा रणजीत सिंह ने इसके रिनोवेशन के साथ इसकी गुंबद पर सोने की परत चढ़वाई थी.

मंदिर को कब-कब नष्ट किया गया और कब-कब बनाया गया

मंदिर को कब-कब नष्ट किया गया और कब-कब बनाया गया, यह वहां लगे शिलालेखों से पता चलता है. स्वर्ण मंदिर पहले पत्थर और ईंटों से बना था. बाद में इसमें सफेद मार्बल यूज किया गया. महाराज रणजीत सिंह ने 19वीं शताब्दी में मंदिर की गुंबद पर सोने की परत चढ़वाई थी.

स्वर्ण मंदिर की सीढ़ियां ऊपर नहीं बल्कि नीचे की तरफ जाती हैं

स्वर्ण मंदिर की सीढ़ियां ऊपर नहीं बल्कि नीचे की तरफ जाती हैं. जो इंसान को ऊपर से नीचे आना सिखाती हैं. हरमंदिर साहिब में बने चार मुख्य दरवाजों का मतलब चारों धर्मों से है. हां किसी भी धर्म का इंसान आ सकता है. माना जाता है कि सरोवर के बीच से निकलने वाला रास्ता ये दर्शाता है कि मौत के बाद भी एक यात्रा होती है.