देश का वो सनसनीखेज हत्याकांड,इंसान ही इंसान को खाता था, नरपिशाचों की दिल दहला देने वाली दास्तान

लाइव सिटीज डेस्क : देश का दहला देने वाला सबसे सनसनीखेज निठारी हत्याकांड अब भी आपके दिलो दिमाग में याद होगा. दिसंबर 2006 में हुए इस कांड के खुलासे ने लोगों को ‌हिला कर रख दिया था. भारत में क्राइम रेट जिस हिसाब से बढ़ा है, वाकई चिंता का विषय है. आए दिन होती इन घटनाओं ने लोगों के दिल में खौफ और आतंक भर दिया है.



निठारी कांड जिसने पूरे देश को दहला कर रख दिया था. दिसंबर 2006 में हुए इस कांड के खुलासे ने लोगों को ‌हिला कर रख दिया था. 2005-06 के बीच नोएडा के निठारी गांव से करीब 17 बच्चे गायब हो गए थे. जांच के बाद पुलिस ने सुरिंदर कोली को गिरफ्तार किया था. जिस घर में इस घटना को अंजाम दिया गया, उसके नाले से बच्चों के बॉडी पार्ट्स बरामद किए गए थे.

एक बार फिर से यह मामला चर्चा में आ गया है. नोएडा के बहुचर्चित निठारी कांड में आरोपी मनिंदर सिंह पंढेर और सुरेंद्र कोली को कुछ ही महीनों पहले फांसी की सजा सुनाई गई थी. गाजियाबाद की विशेष सीबीआई अदालत ने शुक्रवार को अंजलि हत्‍याकांड मामले में मोनिंदर सिंह पंढेर और सुरेंद्र कोली को फांसी की सजा सुनाई है. अदालत ने दोनों को आईपीसी की धारा 364, 302, 376, 120 बी और 201 के तहत दोषी करार दिया था.

सीबीआई कोर्ट ने अभियोजन और बचाव पक्ष की दलीलें सुनने के बाद अंजलि हत्‍याकांड को रेयरेस्ट ऑफ द रेयर माना और दोनों दोषियों को फांसी की सजा सुनाई. कोर्ट ने फैसले में कहा कि दोनों दोषियों को तब तक फांसी के तख्ते पर लटकाया जाए, जब तक उनके प्राण ना निकल जाएं.

साल 2006 में हुए निठारी कांड का यह 9वां केस है, इससे पहले 8वें केस में भी दोनों को सजा सुनाई गई है. यह मामला पिंकी सरकार की हत्या से जुड़ा था. नोएडा के निठारी की रहने वाली पिंकी सरकार के अपहरण, रेप और हत्या करने के मामले में सीबीआई ने पंढेर और कोली को आरोपी बनाया था. निठारी कांड के अन्य मामलों में कोली को फांसी की सजा मिल चुकी है, लेकिन पंढेर अब तक जमानत पर बाहर था. पंढेर को हत्या और रेप सहित साजिश रचने का दोषी पाया गया है.

साल 2006, नोएडा का निठारी गांव, कोठी नंबर डी-5 के बाहर उस वक्त सैकड़ों लोग जमा हो गए, जब कोठी के पीछे स्थित नाले से एका एक कई कंकाल और खोपड़ियां मिलने लगीं। इसमें कई चौंकाने वाले खुलासे हुए थे, जिन्हें सुनकर लोग कांप गए. पूरे देश में सनसनी फैल गई. सीबीआई को जांच के दौरान मानव हड्डियों के हिस्से और 40 ऐसे पैकेट मिले थे, जिनमें मानव अंगों को भरकर नाले में फेंक दिया गया था.

पुलिस ने 29 दिसंबर, 2006 को नोएडा के निठारी स्थित पंढेर के घर के पीछे नाले से 19 कंकाल बरामद किए थे. इनमें ज्यादातर बच्चों के थे. जांच में पता चला कि पंढेर और कोली बच्चों को और युवतियों को अगवा करके उनसे रेप करते, फिर उन्हें मार देते थे.

कोठी के मालिक मोनिंदर सिंह पंढेर और उसके नौकर सुरेंद्र कोली को पुलिस ने धर दबोचा. कोली की निशानदेही पर पुलिस ने कोठी से बच्चों की चप्पल, कपड़े और बाकी सामान बरामद किया था. इस घटना का खुलासा होने के बाद लापता लोगों के परिजन भी कोठी नंबर D-5 पहुंचे थे. उन्होंने वहां से मिले कपड़ों की पहचान की थी. लोगों का गुस्सा बढ़ते देखकर यूपी सरकार ने इस केस को सीबीआई को ट्रांसफर कर दिया था.

इस मामले का खुलासा तब हुआ, 7 मई 2006 को पायल नाम की एक लड़की रिक्शे से पंढेर के घर आई. उसने रिक्शेवाले को लौटकर पैसे देने को कहा. काफी देर तक जब वो नहीं लौटी तो रिक्शेवाले ने कोठी का दरवाजा खटखटाया. वहां कोली ने उसे बताया कि पायल वहां से जा चुकी है. रिक्शेवाले ने कहा कि वह यहीं खड़ा था, पायल बाहर नहीं आई.

यह बात पायल के माता-पिता को पता चली तो उन्होंने बेटी के लापता होने की एफआईआर दर्ज करवाई. पुलिस को पता चला कि पायल के पास एक मोबाइल था, जो स्विच ऑफ बता रहा था. पुलिस ने उसकी कॉल डिटेल निकाली और इससे मिले सुराग के आधार पर पंढेर की कोठी पर छापा मारा.

पायल के साथ रेप किया गया फिर कोली ने उसकी हत्या कर दी. सिर काटकर पंढेर के घर के पीछे फेंक दिया. सीबीआई ने विक्टिम की खोपड़ी बरामद कर ली थी। खोपड़ी का डीएनए पीड़िता के माता-पिता के डीएनएस से मैच कर गया. कोली के पास बरामद पीड़िता के कपड़ों की पहचान भी उसके माता-पिता ने की थी. अदालत ने अपने फैसले में कहा कि पंढेर इस पूरी आपराधिक साजिश में शामिल था.

पुलिस को यहां से बच्चों की हड्डियां और अंग मिले तो इस कांड का खुलासा हुआ। यह भी पता चला कि निठारी के आसपास की झुग्गियों से कई बच्चे लापता हुए थे, लेकिन परिजनों की शिकायत पर पुलिस ने एफआईआर दर्ज नहीं की थी.

सीबीआई ने सुरेंद्र कोली के खिलाफ युवती का अपहरण, रेप और हत्या का मुकदमा दर्ज किया. सीबीआई ने 46 गवाहों को पेश करके उनके बयान दर्ज कराए. वहीं, बचाव पक्ष की तरफ से महज 3 गवाह पेश किए गए. बताते चलें कि इस जघन्य अपराध के दोषी सुरेंद्र कोली को अब तक 7 मामलों में फांसी की सजा सुनाई जा चुकी है.

गौरतलब है कि पुलिस ने 29 दिसंबर, 2006 को नोएडा के निठारी स्थित पंढेर के घर से 19 कंकाल बरामद किए गए थे. पंढेर और कोली के खिलाफ 16 मामलों में आरोपपत्र दाखिल किए गए थे, जबकि साक्ष्य के अभाव में तीन मामलों को बंद कर दिया गया था.

इससे पहले गाजियाबाद की विशेष सीबीआई अदालत ने चर्चित निठारी कांड से जुड़े नंदा देवी हत्या मामले में भी सुरेंद्र कोली को फांसी की सजा सुनाई थी. विशेष अदालत ने कोली पर 30 हजार रुपए का जुर्माना भी लगाया था. निठारी नरसंहार मामले से जुड़े 7 मामले में दोषी करार दिए जा चुके सुरेंद्र कोली को इस 8वें मामले में अपहरण, हत्या, बलात्कार और सबूत नष्ट करने का दोषी ठहराया गया था.

करोड़पति मोनिंदर सिंह पंधेर के उस खूनी कोठी नंबर डी-5 कोठी में इंसान के रूप में मौजूद इन भेड़ियों ने एक दो नहीं बल्कि 17 बच्चों को अपना शिकार बनाकर इसी कोठी में उन्हें दफन कर दिया था. इस कोठी में रहने वाले नरपिशाचों ने बड़ें ही शातिर ढ़ग से गांव के भोले-भाले मासूम बच्चों को किसी न किसी बहाने अपने पास बुलाते थे. इसके बाद उनके साथ हैवानियत की हदें पार कर उनकी हत्या करने के बाद लाश के टुकड़े-टुकड़े कर नाले में बहा देते थे.

मासूम बच्चों को अपनी कोठी में ले जाकर उसके साथ कुकर्म उसके बाद उनका गला घोंटकर हत्या. इतने से भी मन नहीं भरा तो उसके शव के छोटे-छोटे टुकड़े कर कुछ पकाकर खाए तो कुछ हिस्से को कोठी के पीछे नाले में बहा दिया. यह खौफनाक सिलसिला करीब डेढ़ साल से ज्यादा समय तक चला. लेकिन किसी की नजर इस कोठी पर नहीं पड़ी.

कोली को रिम्पा हलदर नामक एक लड़की की 2005 में हत्या के जुर्म में निचली अदालत ने मृत्यु दंड सुनाया था जिसकी पुष्टि इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने कर दी थी. बाद में उच्चतम न्यायालय ने 15 फरवरी 2011 को इस फैसले पर अपनी मुहर लगाई.

कोली को सिलसिलेवार हत्यारा करार देते हुए अदालत ने कहा था कि उसके प्रति कोई दया नहीं दिखाई जानी चाहिए. कोली के खिलाफ कुल 16 मामले दर्ज किए गए. उसके नियोक्ता मोनिन्दर सिंह पंढेर को भी रिम्पा हलदर मामले में मृत्युदंड सुनाया गया था, लेकिन इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने उसे बरी कर दिया.