मिलिए इस 17 साल के CEO से… एक स्टार्टअप ने संवार दी हजारों बुजुर्गों की जिंदगी

लाइव सिटीज डेस्क : भारत में लोगों को रिश्तों का सम्मान करना सिखाया जाता है. बचपन से ही हमें यह ट्रेनिंग दी जाती है कि बड़े-बुजुर्गों की हर बात माननी चाहिए. इस क्लचर को लोग फॉलो भी करते थे. जी हां, ठीक ही पढ़ा आपने, फॉलो करते थे. लेकिन आज बदलते युग के साथ लोगों की सोच में भी बदलाव आया है.

लोग खुद के लाइफ स्टाइल को मेंटेन करने में अपने ही लोगों को समय नहीं दे पा रहे हैं. दरअसल शहरीकरण, शिक्षा के क्षेत्र में सुधार होने के बाद ज्यादातर लोग न्यूक्लियर फैमिली में रहना पंसद करते हैं. जिस वजह से अपने ही परिवार के लोगों से दूरी बनाना शुरू कर देते हैं. खासकर के परिवार के बुजुर्ग सदस्यों को प्रति उनका रवैया बदल जाता है.

ceo vedant agrawal

आज भारत में कई वृद्धा आश्रम और मुक्ति धाम जैसी जगहों में रहने वाले वृद्ध लोगों की आंखें इसकी गवाही देती हैं. भारत में तो लगातार बढ़ती बुजुर्गों की संख्या एक चिंता का विषय बना हुआ है. आंकड़े बताते हैं कि भारत बुजुर्गों की देखरेख करने में अभी बहुत पीछे खड़ा है. साल 2011 की ‘इंडियन जर्नल ऑफ जेरॉनटोलॉजी’ स्टडी बताती है कि लोग बुजुर्ग दंपती से मतलब कम रखना और शारीरिक मदद देना कम कर दिया है.

लेकिन आज के समय में भी कुछ लोग ऐसे हैं जो आपने संस्कारों को नहीं भूले हैं. जहां ज्यादातर युवा अपना जीवन मौज-मस्ती में करने में विश्वास रखते हैं. वहीं 17 साल के वेदांत अग्रवाल बुजुर्गों की जिंदगी बेहतर बनाने की हर संभव कोशिश करते हैं. वेदांत दिल्ली में रहते हैं. अभी वंसत विहार के मॉडर्न स्कूल से 12वीं की शिक्षा ले रहे हैं. आप इन्हें बच्चा समझने की भूल न करें. कम उम्र में भी यह कंपनी के सीइओ हैं. साथ ही समाजसेवा करना कोई बच्चों का खेल तो होता नहीं.


वेदांत अग्रवाल, वेदांत हेल्थ मैटर (ओएचएम) हेल्थकेयर सर्विसेज नामक एक स्टार्ट अप का नेतृत्व कर रहा है, जो कि शहरी भारत के स्वास्थ्य देखभाल अवसंरचना में एक प्रमुख अंतर को छूने के लिए समर्पित है. पिछले साल खुला ओएचएमन हेल्थ सर्विस अपनी बेहतर हाई-टेक सुविधा के लिए माना जाता है. अगर इनकी प्रोफाइल पर नजर डालें, तो उनकी ये सुविधा परिवारिक लोग, खासकर बुजुर्गों और उनके लिए जो परिवार से अलग रहकर कहीं दूर रहते हैं.

वेदांत ने OHM सर्विस की शुरुआत करने से पहले साल 2015 में earth saviours foundation एनजीओ में इंटर्नशिप की. इसी दौरान वेदांत तमाम चीजों पर ऑनलाइन सर्च करके घर पर ही हेल्थ केयर सुविधा पहुंचाने की जानकारी जुटाने लगे. हुआ यूं कि उन्होंने घर पर ही बुजुर्गों को हेल्थ केयर सुविधा देने का फैसला कर लिया. अब कई दिनों की मेहनत ने OHM हेल्थ केयर सॉल्यूशन को कई परिवारों से जोड़ दिया.

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