आप चौंके नहीं, पाकिस्तान में भी मनायी जाती है बसंत पंचमी…

लाइव सिटीज डेसक : आज से बसंत ऋतु की शुरुआत हो गई है. इस दिन हम मां सरस्वती की पूजा करते हैं. बसंत पंचमी वैसे तो भारत में ही मानाया जाना वाला त्योहार है. लेकिन, हिंदू धर्म को मानने वाले लोग दुनिया में जहां भी रहते हैं, अपनी संस्कृति को साथ लिये जाते हैं. वहीं भारत के हर उत्सव को खूब धूम-धाम से सेलिब्रेट भी करते हैं. अगर हम आपको कहें कि कट्टर इस्लाम धर्म को मानने वाले देश पाकिस्तान में भी बसंत पंचमी की धूम रहती है, तो शायद आप सहसा विश्वास न करें. लेकिन, यह सत्य है.

 

जी हां, पाकिस्तान में बसंत पंचमी का उत्सव बहुत ही हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है. यह बात आपको थोड़ा अटपटा जरूर लग रहा होगा, मगर इसकी वजह वहां रहने वाले पंजाबी कम्युनिटी के लोग हैं. भारत में भी बसंत पंचमी का त्योहार पंजाब में बहुत ही महत्वपूर्ण माना जाता है. वहीं भारत के अलावा पाकिस्तान में भी एक पंजाब है. वहां पंजाबी लोग इस दिन पंतग उड़ाकर और पीले वस्त्र व पीली मिठाई खाकर बसंत पंचमी मनाते हैं. इसमें उनका साथ वहां रहने वाले मुस्लिम भाई भी देते हैं. बसंत पंचमी का त्योहार पाकिस्तान में हिंदू-मुस्लिम भाईचारे का प्रतीक है.

आतंकी गतिविधियों के कारण किया गया बैन


पतंग के मांझे के चलते इस त्योहार को लोगों के लिए जानलेवा बताया गया है. यही कारण है कि वर्ष 2004 से इस त्योहार पर बैन लगा हुआ है. ये त्योहार ज्यादातर अमृतसर, कसूर और लाहौर जैसी जगहों पर मनाया जाता है. इसके इलावा लाहौर में इस अवसर पर एक मेला भी लगता है.

नेशनल काइट डे के नाम से है फेमस


पाकिस्तान में रहनेवाले पंजाबी इस त्योहार को पंतग उड़ाकर, पीले फूलों के साथ मनाते हैं. लेकिन पाकिस्तान की कई जगहों पर मांझे से पतंग उड़ाना मना है. इसकी वजह आतंकी गतिविधियां बताई जाती हैं. इस फेस्टिवल को नेशनल काइट फ्लाइंग डे के नाम से जाना जाता है. इस दिन हर घर की छत में दोनों समुदाय मिलकर पतंग उड़ाते हैं.

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हम हैं आदित्य. फैन हैं. किसी आम इंसान के नहीं. भगवान के. वो भी ऐसे-वैसे भगवान नहीं. देवों के देव महादेव के. उनके जो इस सृष्टि के संचालक हैं. हां हम धार्मिक आदमी हैं. भगवान को मानते हैं. बम भोले-बम भोले का जाप करते हैं. कर्मठ व्यक्ति हैं. श्रम का महत्व समझते हैं. इसलिए उसे बचाकर खर्च करते हैं. देखने में ठीक-ठाक है. पर फिर भी खराब दिखते है. ये सखी कहती है. बाकी हमारी जिंदगी का एक्कै मकसद है. उस चीज को पाना, जिसे पाना मुश्किल हो. कहने को लाइफस्टाइल जर्नलिस्ट है. फेसबुक पर प्रेम और फूड पर बहुत लिखते हैं. मगर जब कोई इनबॉक्स में आकर कहता है, आप अच्छा लिखते हैं. तो शर्माकर नीले हो जाते हैं. क्योंकि शिव का रंग भी, तो नीला ही है. बाकी की जानकारी मुझसे मिलकर ही पता की जा सकती है. हां मुझे समझने में आपको परेशानी हो सकती है. लेकिन ये मेरी नहीं आपकी दिक्कत है.

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