यात्रीगण कृपया ध्यान दें…अब आसानी से मिल जाएगी कन्फर्म सीट ! जानिये कैसे

लाइव सिटीज, सेंट्रल डेस्क: ट्रेन से यात्रा करने में एक सबसे बड़ी समस्या होती है वो हैं टिकट के लिए मारामारी की. कहीं भी यात्रा करने से महीनो पहले टिकट बुक कराओ और मालूम चले कि यात्रा के दिन तक भी टिकट कन्फर्म नहीं हुई है. ऐसे में यात्रा करना थोड़ा मुश्किल हो जाता है. परन्तु अब इन समस्याओं से बहुत जल्द निजात मिल सकता है. जी हां, अक्टूबर से विभिन्न ट्रेनों में रोजाना अतिरिक्त चार लाख सीटें मिलेंगी. एक नई तकनीक को अपनाने से बहुत जल्द  वेटिंग टिकट जैसी परेशानियों से बहुत जल्द निजात मिल सकता है.

आपको बता दें कि इस तकनीक के जरिए ट्रेन में ओवरहेड तार से बिजली सप्लाई की जाएगी और जनरेटर कोच की जगह स्लीपर कोच लगेंगे. इसको लेकर बुधवार को अधिकारियों ने बताया कि भारतीय रेल अब नई तकनीक अपना रही है, जिसे ‘हेड ऑन जनरेशन’ के नाम से जाता है. अधिकारियों ने बताया कि अभी ज्यादातर ट्रेनों में दो जनरेटर कोच लगे होते हैं, जिसमें से एक से डिब्बों में बिजली सप्लाई की जाती है और दूसरे को रिजर्व में रखा जाता है.

अधिकारियों ने कहा कि जल्द ही रेल विभाग दुनिया भर में प्रचलित ‘हेड ऑन जेनरेशन’ (एचओजी) प्रौद्योगिकी का इस्तेमाल शुरू करने जा रहा है. इस प्रौद्योगिकी में रेलगाड़ी के ऊपर से जाने वाली बिजली तारों से ही डिब्बों के लिए भी बिजली ली जाती है. अधिकारियों ने बताया कि अक्टूबर 2019 से भारतीय रेल के करीब 5,000 डिब्बे एचओजी प्रौद्योगिकी से परिचालित होने लगेंगे. इससे ट्रेनों से जनरेटर बोगियों को हटाने में मदद मिलेगी और उनमें अतिरिक्त डिब्बे लगाने की सहूलियत भी मिलेगी. इतना ही नहीं इससे रेलवे की ईंधन पर सालाना 6,000 करोड़ रुपये से अधिक की बचत होगी.

अधिकारियों के अनुसार हेड ऑन जनरेशन’ में इलेक्ट्रिक इंजन को जिस ओवरहेड तार से बिजली की सप्लाई की जाती है, उसी तार से डिब्बों में भी बिजली दी जाएगी. अधिकारिओं ने बताया कि पैंटोग्राफ नामक उपकरण लगाकर इंजन के जरिए ही ओवरहेड तार से डिब्बों में बिजली सप्लाई की जाएगी. इससे ट्रेन में जनरेटर कोच की जरूरत नहीं रह जाएगी. हालांकि, आपात स्थिति के लिए एक जनरेटर कोच ट्रेन में लगा रहेगा. एक जनरेटर कोच की जगह स्लीपर कोच लगाया जाएगा. इस तरह ट्रेन की लंबाई बढ़ाए बिना ही एक कोच बढ़ जाएगा.

Be the first to comment

Leave a Reply

Your email address will not be published.


*