100 साल पुराना रत्नेश्वर महादेव मंदिर एक श्राप से हो गया था टेढ़ा,साल के 4 महीने रहता है जलमग्न

लाइव सिटीज डेस्क : काशी विश्वनाथ मंदिर के पास गंगा किनारे स्थित रत्नेश्वर महादेव मंदिर को देख आम लोग यही सोचते होंगे कि शायद ये मंदिर किसी भूकंप के झटके या फिर निर्माण की खामी की वजह से टेढ़ा है, लेकिन इसके पीछे एक अलग ही कहानी है. बताया जाता है कि एक मां के श्राप से मंदिर न सिर्फ टेढ़ा है, बल्कि साल के 4 महीनों तक पानी में डूबा भी रहता है.

राजा मान सिंह के सेवक ने अपनी मां रत्ना के लिए मंदिर बनवाया था

15वीं शताब्दी में राजा मान सिंह के सेवक ने अपनी मां रत्ना के लिए मंदिर बनवाया था. निर्माण के बाद जब सेवक अपनी मां को मंदिर दिखाने ले गया तो उसने कहा- मां मैंने तेरे लिए मंदिर बनवाया है. इसके साथ ही तेरे दूध का कर्ज चुकता हुआ.

ऐसा कहा जाता है कि रत्ना की नजर पहले जहां पड़ी, वहीं से मंदिर टेढ़ा हो गया. प्रचलित कथाओं के मुताबिक मां रत्ना ने बेटे को जवाब दिया था- बेटा, तूने बुरी नीयत से इस मंदिर का निर्माण करवाया. मां के दूध का कर्ज कोई किसी जन्म में चुकता नहीं कर सकता. मेरा श्राप है कि इस मंदिर में कोई कभी पूजन नहीं कर पाएगा. यहां साल के अधिकतर समय गंगा वास करेंगी, इस वजह से कोई अंदर नहीं जा पाएगा.

गंगा किनारे जलस्तर बढ़ने पर सबसे पहले रत्नेश्वर महादेव का मंदिर जलमग्न होता है. यही नहीं, यह अपने टेढ़े ढांचे की वजह से भी चर्चाओं में रहता है.

यहां कुछ ब्रिटिश रिसर्चर भी शोध करने आए थे. वे भी मंदिर के टेढ़े होने की वजह नहीं बता सके. यह आज भी रिसर्च का टॉपिक बना हुआ है.

प्रेजेंट में यहां शिव भक्त गर्भ गृह में पूजन के लिए जाते तो हैं, लेकिन अन्य मंदिरों की तरह कभी इसकी साफ-सफाई नहीं हो पाती. यहां हमेशा गंदगी फैली रहती है.

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