इनसे सीखें : ये तो रीयल लाइफ के भी हीरो हैं, आम अवाम को कर दिये करोड़ों दान

लाइव सिटीज डेस्क : महाभारत काल में दानवीर कर्ण थे, जो हर सुबह सूर्य नमस्कार के वक्त अपनी संपत्ति गरीबों को दान करते थे. लेकिन अगर हम आपको बताएं कि आज कलयुग में भी एक ऐसे शख्स हैं, जो अपने जीवन भर की पूंजी समाज कल्याण के लिए दान कर देते हैं तो…?? सहसा आपको विश्वास नहीं होगा, लेकिन यही हकीकत है. आज हम जिनकी बात कर रहे हैं, उनसे आप भी परिचित होंगे, क्योंकि यह बॉलीवुड के प्रसिद्ध अभिनेता हैं. और आप उन्हें कई फिल्मों में देखे होंगे.

 

 

 
यह एक्टर अपने कॅरियर के शुरुआती दौर से ही सोशल वर्क से जुड़े हुए हैं. लेकिन कभी इसका प्रचार नहीं किया. ये कोई और नहीं बल्कि अपनी फिल्मों में बेहतरीन डायलॉग से छा जाने वाले तथा तिंरगा, यंशवत, अब तक 56 और 26/11 जैसी कई हिट मूवी देने वाले नाना पाटेकर हैं. आज महाराष्ट्र के लोगों के लिए वे किसी फरिश्ते से कम नहीं हैं. पर शाय़द ही आप इनके सोशल वर्कर की छवि से परिचित होंगे.

 

 

नाना पाटेकर चर्चा में तब आए, जब पिछले साल लातूर में अकाल पड़ा था और वहां के कुछ किसानों ने आत्महत्या कर ली थी, तब नाना पाटेकर को बहुत दुःख हुआ था. उन्होंने एक फाउंडेशन बनाया, जिसकी वजह से वह जरूरत मंद लोगों की मदद कर रहे हैं. महाराष्ट्र में सूखा पड़ने की वजह से आत्महत्या कर रहे हैं. किसानों को खुद जाकर 15000 रुपए दिए, जिसमें करीब 162 किसानों के परिवार शामिल थे.

इनकी संस्था करीब 700 ऐसी जगहों पर जाकर लोगों की मदद करती है, जहा सूखा पड़ जाता है. वैसी जगहों पर संस्था लोगों के लिए पानी की व्यवस्था करवाती है. इसके अलावा नाना पाटेकर फाउंडेशन ने 80 लाख रुपए दान दिए थे. साथ ही उन्होंने अपनी 90% संपत्ति को दान में दे दिया. खास बात तो आपको चौंका ही देगी. नाना पाटेकर खुद अपनी बूढ़ी मां के साथ 1 BHK के मकान में रहते हैं. यूं कहें तो नाना पाटेकर न केवल रील लाइफ के हीरो हैं, बल्कि रीयल लाइफ के भी हीरो हैं.

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हम हैं आदित्य. फैन हैं. किसी आम इंसान के नहीं. भगवान के. वो भी ऐसे-वैसे भगवान नहीं. देवों के देव महादेव के. उनके जो इस सृष्टि के संचालक हैं. हां हम धार्मिक आदमी हैं. भगवान को मानते हैं. बम भोले-बम भोले का जाप करते हैं. कर्मठ व्यक्ति हैं. श्रम का महत्व समझते हैं. इसलिए उसे बचाकर खर्च करते हैं. देखने में ठीक-ठाक है. पर फिर भी खराब दिखते है. ये सखी कहती है. बाकी हमारी जिंदगी का एक्कै मकसद है. उस चीज को पाना, जिसे पाना मुश्किल हो. कहने को लाइफस्टाइल जर्नलिस्ट है. फेसबुक पर प्रेम और फूड पर बहुत लिखते हैं. मगर जब कोई इनबॉक्स में आकर कहता है, आप अच्छा लिखते हैं. तो शर्माकर नीले हो जाते हैं. क्योंकि शिव का रंग भी, तो नीला ही है. बाकी की जानकारी मुझसे मिलकर ही पता की जा सकती है. हां मुझे समझने में आपको परेशानी हो सकती है. लेकिन ये मेरी नहीं आपकी दिक्कत है.

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