अजब-गजब : मर्दानगी साबित करने के लिए सहना पड़ता है इस तरह का दर्द…

लाइव सिटीज डेस्क : दुनिया में कई ऐसी मान्यता और रीति रिवाज हैं, जो एकदम ही हटकर हैं. लोग न सिर्फ उन्हें मानते हैं, बल्कि गहरी आस्था भी रखते हैं. हालांकि कुछ रिवाज ऐसे भी होते हैं, जिनके बारे में सुनकर आपको थोड़ा अटपटा जरूर लगेगा. लेकिन, धर्म के नाम पर इसे लोग भावनाओं से जोड़कर रखते हैं. आज हम आपको ऐसे ही कुछ रिवाज़ों के बारे बताएंगे, जिनके बारे में अब तक आपने नहीं सुना होगा.

थाईपुसम




दक्षिण भारत में एक ऐसा त्योहार मनाया जाता है, जिसमें लोग अपने बॉडी पार्ट्स में छेद करवाते हैं. भगवान कार्तिकेय के जन्मदिन पर मनाये जाने वाले इस त्योहार को ‘थाईपुसम’ कहते हैं. रिवाज़ के अनुसार लोग इस दिन शरीर के विभिन्न भागों में छेद करवाते हैं. यह त्यौहार भारत के अलावा श्रीलंका, मलेशिया, मॉरीशस, थाईलैंड तथा मयंमार में भी मनाया जाता है.

दांतों को घिसना


बाली समुदाय में नुकीले दांत को वासना, गुस्से और बुरी भावनाओं का प्रतीक मानते हैं. वहां जब लड़का या लड़की अपनी परिपक्व उम्र तक पहुंचते हैं, तो उनके दांतों को घिसा जाता है. इससे उनके अंदर मौजूद बुराई का सर्वनाश हो जाए.

तीन दिन तक नहीं जाते शौचालय


इंडोनेशिया अपने कड़े ड्रग्स कानून के लेकर पूरी दुनिया में फेमस है. वहीं यह रीति-रिवाज के मामले भी सख्त है. इंडोनेशिया में वर एवं वधू दोनों को शादी के तीन दिन और तीन रातों तक शौचालय जाने की अनुमति नहीं दी जाती. लेकिन अगर कोई इस नियम का उल्लंघन करे, तो उसे अनलकी कहा जाता है. इसके परिणाम में उनकी शादी पर बुरा असर होता है.

शव की हड्डियों और राख को खाना

ब्राजील एवं वेनेजुएला बहुत ही सुंदर देश है. यहां के लोग फुटबॉल को लेकर बहुत ही भावनातमक होते हैं. लेकिन दुनिया के सबसे विकसित और लोकप्रिय खेल को पंसद करने वाले लोग भी रीति रिवाज के मामले में सेंटिमेंटल है. ब्राजील और वेनेजुएला के योनामामो कबीले में रिवाज़ है कि व्यक्ति को जलाने के बाद उसके शव की बची हुई राख को खाया जाता है. साथ ही शव की हड्डियों को मरने वाले के करीबी पीसकर राख के साथ मिलाकर खाते हैं.

दर्द सहने का रिवाज

सातेरे मावे नामक कबीला अपने दर्दनाक रिवाज़ के लिए दुनिया भर में प्रसिद्ध है. कबीले का कोई लड़का जब बड़ा हो जाता है तो उसे अपनी मर्दानगी साबित करना होती है. रिवाज़ के अनुसार वह लड़का जंगल में जाकर बुलेट चींटियां खोजता है. यह चीटियां दुनिया की सबसे तेज़ काटने वाली प्रजाति हैं. चीटियों को इकट्ठा करने के बाद उन्हें दास्ताने में बंद कर दिया जाता है. दस्ताने में बंद होने के कारण गुस्से से छटपटाने लगती है. और फिर उसी दास्ताने में लड़के के हाथ को डाल दिया जाता है. चीटियां लड़के के हाथों पर जोर-जोर से काटती हैं. कबीले के रिवाज़ की वजह से दस्ताने के अंदर हाथ को कम से कम 10 मिनट तक बांधकर नाचना होता है. यदि कोई लड़का इससे अधिक समय तक दर्द सहन कर लेता है, तो उसे बेहद ताकतवर माना जाता है.