मिड डे मील: लोगों ने लगाया आरोप, माता समिति के होते हुए भी भोजन में घोर लापरवाही

छपरा: मध्याहन भोजन का मूल उद्देश्य प्रारंभिक स्कूलों के बच्चों को कुपोषण से बचाना है. जिले के स्कूलों में बनने वाला खाना क्या पोषित है? उस खाने में प्रोटीन व आयरन, फॉलिक एसिड, विटामिन ए आदि की मात्रा निर्धारित मानक के अनुरूप है? सवाल बड़ा है और यह सवाल गांव से शहर तक उठाए जा रहे हैं. लोगों का आरोप है कि स्कूलों के मध्याह्न भोजन में व्यापक अनियमितता है. वहीं स्कूल प्रधानों का रोना है कि आवंटित राशि में मेन्यू के अनुसार बच्चों का भोजन बनवाना मुश्किल है.

मध्याह्न भोजन में मानक खाद्य सामग्री :

प्राथमिक वर्ग के बच्चों के लिए उनके मध्याह्न भोजन में जो मानक तय है, उसके अनुसार एक बच्चे के सौ ग्राम चावल, 20 ग्राम दाल, 50 ग्राम हरी सब्जी व 0.5 ग्राम सरसो तेल व स्वादानुसार नमक का प्रावधान है. वहीं मध्य विद्यालय के बच्चों के लिए 150 ग्राम चावल, 30 ग्राम दाल, 75 ग्राम हरी सब्जी व 7.5 ग्राम सरसो तेल व स्वादानुसार नमक का प्रावधान है. इसके अतिरिक्त मंगलवार के लिए जीरा, सोयाबीन व आलू तथा शुक्रवार के मेन्यू के लिए पुलाव के लिए रिफाइन व काबुली व लाल चना तथा सलाद के सामान भी खरीदने हैं. तेल व मसाले एक मार्क वाले यानि ब्रांडेड ही खरीदने हैं. चावल की आपूर्ति को विभाग करता है. अन्य सामानों के लिए प्राथमिक स्तर के लिए प्रति छात्र चार रुपये 13 पैसे और उसके ऊपर के लिए प्रति छात्र छह रुपये 18 पैसे दिए जाते हैं. विद्यालय प्रधानों का कहना है कि इतनी कम राशि में सामानों की खरीदारी में मुश्किलों का सामना करना पड़ता है.

निगरानी के लिए विद्यालयों में माता समिति :-

मध्याह्न भोजन के निगरानी के लिए हर विद्यालय में माता समिति के गठन का प्रावधान है. लेकिन जिले के 40 फिसदी विद्यालयों में यह समिति नहीं है. जिन 60 प्रतिशत विद्यालयों में माता समितियां हैं उनके आधे से अधिक कागजी हैं. प्रावधान यह है कि विद्यालय में 11 सदस्यीय माता समिति होगी. हेडमास्टर इसके सचिव होंगे और संबंधित वार्ड के सदस्य पदेन सदस्य होंगे. नौ सदस्यों का चुनाव विद्यालय में पढ़ने वाले छात्रों के माताओं में से होगा.

उन्ही माताओं में से एक समिति की अध्यक्ष होंगी. अध्यक्ष व सचिव के हस्ताक्षर से मध्याह्न भोजन के खाते का संचालन होगा. यह समिति हर रोज मध्याह्न भोजन की निगरानी करेंगी. लेकिन धरातल पर ऐसा नहीं है. अधिकतर विद्यालयों में खाते का संचालन हेडमास्टर और वहां के एक वरीय शिक्षक ही करते हैं.

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