जेपीयू ने उपयोगिता का पत्र भेज अपने आप को ब्लैक लिस्टेड होने से बचाया

chhapra

छपरा: यूजीसी द्वारा ब्लैक लिस्टेड होने से जयप्रकाश विश्वविद्यालय बच गया. यूजीसी द्वारा दिए गए रुपयों का लंबे समय से बकाए उपयोगिता को विवि प्रशासन ने भेज दिया. उपयोगिता भेजने के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन कुछ रिलैक्स महसूस कर रहा है क्योंकि यूजीसी द्वारा कड़ा पत्र मिलने से अफसरों की बेचैनी बढ़ गई थी. विश्वविद्यालय अनुदान आयोग ने उपयोगिता जमा करने के लिए मार्च महीने का ही डेड लाइन तय किया था.

पत्र में स्पष्ट कर दिया गया था कि मार्च में उपयोगिता नहीं जमा किया गया तो विश्वविद्यालय को ब्लैक लिस्टेड कर दिया जाएगा. पत्र मिलते ही विवि में खलबली मच गई थी आनन-फानन में उपयोगिता बनाकर भेजी गई.

35 फिसदी राशि हो पायी है खर्च: विवि को 11वीं पंचवर्षीय योजना के अंतर्गत साढ़े चार करोड़ रुपये मिले थे. इसमें मात्र एक करोड़ तीस लाख रुपये ही विवि खर्च कर पाया. उधर, 12वीं पंचवर्षीय योजना में 11 करोड़ रुपये यूजीसी के द्वारा जेपीविवि को देने की अनुशंसा की गई. हालांकि ग्यारहवीं पंचवर्षीय योजना की ही राशि खर्च नहीं कर पाने के कारण यूटिलाइजेशन सर्टिफिकेट यूजीसी को नहीं भेजा जा रहा था. अब तो बची राशि को खर्च करने का समय भी बीत गया. बची राशि को सरेंडर करना मजबूरी बन गई है. भविष्य में अनुदान मिलने पर भी संशय बन गया है. राशि मिलने के बाद भी इफ्रास्ट्रक्चर को पूरी तरह से विकसित नही कर पाया.

एक हजार करोड़ का प्रस्ताव भेजा रूसा को: विवि प्रशासन ने बड़ा प्रोजेक्ट बनाकर एक हजार करोड़ रुपये का प्रस्ताव रूसा को भेजा है. हालांकि जानकारों की मानें तो रूसा की राशि तभी मिलती है जब विश्वविद्यालय को नैक से मान्यता मिली रहती है. नैक से मान्यता लेने की भी बात है तो उसके लिए अब मई में ही अप्लाई होगा. अप्लाई होने के बाद ही राशि मिल पाएगी. कुलपति प्रो. हरिकेश सिंह ने कहा कि विवि को इंटर्नल व एक्सटर्नल दोनों तरह से मजबूती दिलाने के लिए प्रयासरत हैं. सहयोग की अपेक्षा है ताकि विवि का नाम भी बड़े पटल पर दिख सके. वैसे प्रयास के अनुकूल सफलता नहीं मिल रही है.

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