24 जून भीमसेनी एकादशी से शुरू होगा चतुर्मासा महायज्ञ का आयोजन

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छपरा: सभी आत्माएं परमात्मा का अंश है. परमात्मा ही सबका सृजन हार है. धर्म आचरण करने वाले धर्मात्मा है जो आत्मा धर्मधारण करता है और अपने संस्कृति और परमपराओं का निर्वहन करता है. वह आत्मा परमात्मा का अंश कहलाने का अधिकारी है. उस धर्म को धारण करने वाला व्यक्ति गृहस्थ आश्रम में हो या साधु संत के रूप में किसी मंदिर या तपोस्थली में हो, उनका एक मात्र उद्देश्य धर्म की रक्षा करना होता है. चाहे वो तुलसीदास, रविदास, स्वामी विवेकानंद हो या हम सभी के पूज्य गुरु त्रिदणदी स्वामी जी महाराज हो, ये सभी धर्मरक्षक है जो अपने शिष्यों को आशीर्वाद के रूप में सुरक्षा और आशीर्वाद देते है.

इस परिपेक्ष में मेरे पूज्य गुरु त्रिदणदी स्वामी जी महाराज का एक आलौकिक घटना का वर्णन जो आप बीती घटना है. जो मां गंगे एवं सरयूज तप पर खलपूरा ग्राम में 1974 में लक्ष्मीनारायण यज्ञ करवाए थे. पूजा हवन के समय शुद्ध गाय का घी घट गया था. समिति के अध्यक्ष उनसे विनम्रता पूर्वक इसकी सूचना स्वामी जो को दी. तत्क्षण स्वामी जी अपने मुख से बोल पड़े जा गंगा मां से उधार मांग ले. फिर वापस लौटा दी. ऐसी आलौकिक चमत्कार एक साधु-संत या ऋषि-मुनि ही कर सकते है.

यथार्थ में ऐसा ही हुआ गंगा मां का जलभर कर लाया गया और वह जल शुद्ध घी में परिवर्तन हो गया. ये कोई जादू का खेल नहीं था बल्कि उनको गंगा मां के प्रति श्रद्धा और भक्ति का एक परिचायक था. यज्ञ समिति द्वारा पुनः घी आ जाने पर उतने मात्रा में घी वापस गंगा जी को लौटाया गया. लौटाने समय वह घी जल में बदल गया. यह आप बीती घटना वहां के लोगों को और छपरा वासियों को जनजन को इस बात की जानकारी है.

हर स्वामी जी का शिष्य अपने गुरु के आदर्शों पर चलना अपना क्रम और धर्म समझते हैं. इसी परिपेक्ष में परम पूज्य पद त्रिदणदी स्वामी जी के शिष्य सुदर्शन पीठाधीकार वेदांतमार्तण्ड स्वामी गोपालाचार्य जी महाराज अपने गुरु की गरीमा को आगे बढ़ाने के लिए उन्हीं के तरह अपने गुरु की तपोस्थल खलपूरा जगशाला में चतुर्मासा करने का निर्णय लिया है जो इस वर्ष जून माह ज्योष्ठ भीमसेनी एकादशी 24 जून से प्रारंभ करने का निर्णय लिए है.

आशा है अपने गुरु त्रिदणदी स्वामी जी के शिष्य वेदांतमार्तण्ड स्वामी गोपालाचार्य जी के चतुर्मासा करने का निर्णय लिया गया, निर्णय सभी शिष्यों के लिए फलकारी शुभकारी एवं अपने गुरु प्रति आस्था के प्रति सम्मान करेंगे, मां गंगा एवं यमुना जी के प्रति विश्वास रखेंगे. गंगा और गुरु के प्रति निष्ठावान शिष्य अपने गुरु के निर्णय का सम्मान करेगा. वेदांतमार्तण्ड स्वामी गोपालाचार्य जी महाराज जी द्वारा अस्थिदाता दधिचाश्रम उमानाथ मंदिर का जीणोद्धार अपने करकमलों द्वारा शुभारंभ कर छपरावासियों को कृतार्थ किए हैं.

आज भी निर्माण कार्य को पूर्ण करने के लिए हमेशा ततपर है और अपने शिष्यों में प्रेरणा जागृत कर रहे हैं. इस अवसर पर अम्बिका आईटीआई के संस्थापक निदेशक व नमामि गंगे के जिलाध्यक्ष जयराम सिंह के साथ सैकड़ों त्रिदणदी स्वामी महाराज के भक्त व कई समाज सेवी मौजूद थे.

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