दरभंगाः रैन बसेरे में वसूले जा रहे हैं पैसे, खुले में रात गुजारने को मजबूर मुसाफिर

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रैन बसेरा में मुसाफिर(प्रतीकात्मक)

दरभंगाः सर्दी का मौसम आते ही प्रशासन लोगों के लिए रैन बसेरा का इंतजाम करता है, ताकि लोगों को ठंड में खुले आसमान के नीचे ना सोना पड़े. सरकारी स्तर पर नगर निगम क्षेत्र के कई स्थानों पर मुसाफिरों के नि: शुल्क में रात गुजारने के लिए रैन बसेरा का निर्माण कराया गया है. हैरानी की बात ये है कि इन रैन बसेरों में लोगों से पैसे वसूले जा रहे हैं, जी हां, अगर रात को रैन बसेरे में सोना है तो इसके लिए पैसे देने पड़ रहे है जिसकी वजह से गरीब लोग सड़क पर ही रात गुजार रहे है. आश्चर्य की बात है कि रैन बसेरा के निर्माण व इसके रख-रखाब को लेकर सरकारी पैसा पानी की तरह बहाया जाता हैं.

सरकारी निर्देश के मुताबिक, यहां ठहराने वाले मुसाफिरों के लिए बेड से लेकर थाली-गिलास तक की व्यवस्था की जानी है. इतना ही नहीं, मनोरंजन के लिए टीवी व पीने के पानी की समुचित व्यवस्था तक का इंतजाम किया जाना है. खासकर ठंड के दिनों में रैन बसेरा में अलाव के लिए लकड़ी की व्यवस्था की जानी है. प्रति वर्ष जाड़े के दिनों में तापमान गिरने के बाद जैसे-तैसे थोड़ी बहुत लकड़ी के सहारे मुसाफिर अपनी रात बिताते हैं.

रात बिताने के नाम पर मुसाफिरों से पैसे की उगाही की जाती है. इतना ही नहीं, शौच के लिए पैसे देने पड़ते हैं. यहां कार्यरत कर्मियों को यह बताने में गुरेज नहीं है कि मुसाफिरों से उनके मन के मुताबिक कभी-कभार पैसे लिए जाते हैं. कर्मचारियों की मानें तो उन्हें पिछले 11 महीने से काम के एवज में पैसा का भुगतान नहीं किया गया. ऐसे में रैन-बसेरा व शौचालयों की सफाई के लिए मुसाफिरों से उन्हें पैसे लेने पड़ते हैं.

यहां लोकल और बाहरी लोगों को ठहरने के लिए अलग-अलग चार्ज देना पड़ता है. रात बिताने के लिए लोकल लोगों को 10 व बाहरी को 20 रुपये देने पड़ते हैं. रैन बसेरा में काम कर रहे लहेरियासराय वेलबागंज के जीतेन्द्र राय की मानें तो वे यहां एक वर्ष से केयरटेकर का काम कर रहे हैं. लेकिन पैसा नहीं मिलता है. ऐसे में परिवार चलाने में काफी कठिनाई का सामना करना पड़ता है हालांकि रैन बसेरा की प्रबंधक ममता देवी का कहना है कि किसी से भी जबर्दस्ती पैसा नहीं लिया जाता.

जो अपने मन से दे देते हैं हमलोग ले लेते हैं. क्या करें, पिछले कई महीनों से हमलोगों को एक भी पैसा नहीं दिया गया. ऐसे में अपने स्तर से ही शौचालय की सफाई व अन्य कार्य कराने की मजबूरी है. कामोवेश ऐसा ही हाल शहर स्थित अन्य रैन बसेरा का है. यहां भी नि: शुल्क सुविधा के नाम पर अवैध पैसे की उगाही का कारोबार फल-फूल रहा है.

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