लाइव सिटीज, सेंट्रल डेस्क : कर्ज के बोझ तले दबी सरकारी विमानन कंपनी एयर इंडिया की 100 प्रतिशत हिस्सेदारी केंद्र सरकार बेचने जा रही है. केंद्र सरकार ने एयर इंडिया के 100 फीसदी शेयर बेचने का फैसला किया है. इसको लेकर प्राथमिक जानकारी भी साझा कर दी गई है. सरकार की ओर से जारी दस्तावेज के मुताबिक ‘रणनीतिक विनिवेश’ के तहत एयर इंडिया, एयर इंडिया एक्सप्रेस के भी 100 फीसदी और AISATS के 50 फीसदी शेयर को बेचा जाएगा.

इसी बीच एक आरटीआई के माध्यम से ये खुलासा हुआ है कि नकदी संकट से जूझ रही विमानन कंपनी एयर इंडिया का अतिविशिष्ट लोगों की उड़ानों को लेकर 822 करोड़ रुपये से अधिक का बकाया है.

822 करोड़ रुपये से अधिक का बकाया

सूचना का अधिकार के तहत दायर एक आवेदन के उत्तर में यह जानकारी साझा की गई है. कंपनी ने एक आरटीआई आवेदन के उत्तर में बताया है कि वीवीआईपी की चार्टर उड़ानों को लेकर 30 नवंबर 2019 तक उसका 822 करोड़ रुपये से अधिक का बकाया था. कंपनी ने कहा कि राहत एवं बचाव कार्यों में विशेष विमानों के प्रयोग का अतिरिक्त 9.67 करोड़ रुपये तथा विदेशी अतिथियों के लिए उड़ानों के मद का 12.65 करोड़ रुपये भी बकाया है.

एयर इंडिया वीवीआईपी उड़ान सेवाओं के तहत राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति और प्रधानमंत्री को यात्रा में चार्टर विमान की सुविधाएं देती हैं. इनके बिलों का भुगतान मंत्रालयों/विभागों द्वारा किया जाता है. चार्टर उड़ानों का बकाया ही नहीं, सरकारी अधिकारियों द्वारा एयरलाइन के उधार लिए गए टिकटों का भी 31 मार्च 2019 तक 526.14 करोड़ रुपये बकाया था. इनमें से 236 करोड़ रुपये से अधिक के बिल तीन साल से भी अधिक समय से बकाया थे. कंपनी ने अपने खाते में ‘वसूली की संभावना नहीं’ के मद में करीब 283 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है. नागर विमानन मंत्रालय ने पांच दिसंबर 2019 को एक जवाब में बताया कि एयर इंडिया 8,556.35 करोड़ रुपये घाटे में थी.

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