कुटीर उद्योग ला सकती है किसानों के जीवन में खुशहाली

 पटना: हमारे देश की अर्थव्यवस्था का सबसे प्रमुख आधार कृषि है. लेकिन मौजूदा दौर में कृषक विभिन्न तरह की परेशानियों को झेल रहे हैं. एक तरफ जहां बाढ़ के कारण उनके फसल बर्बाद हो जाते हैं तो दूसरी तरफ अनावृष्टि के कारण फसलें खेतों में ही सूख जाती हैं और पैदावार नहीं मिल पाता है. परिणाम, किसान कर्ज के बोझ तले दबते चले जा जाते हैं और कर्ज न उतार पाने के कारण वे अपनी जीवन लीला समाप्त करने को मजबूर हो जाते हैं. संसाधनों की कमी भी उन्हें जीते जी मार रही है. सवाल यह है कि आखिर ऐसा क्या किया जाये जिससे देश के अन्नदाता को बचाया जा सके.
सड़क, बिजली, पानी के बारे में तो बहुत लोग सोच रहे हैं लेकिन इंजीनियरिंग की सेवा से रिटायर्ड हो चुके विनय कुमार ने जो सोचा और किया वह बिजली, पानी, सड़क से भी ऊपर है. इन्होंने देशी तकनीक का अविष्कार कर बेरोजगार किसानों को रोजगार दिया.  विनय कुमार, राजीव नगर रोड नंबर— 7, पटना के रहने वाले हैं. इन्होंने संपतचक प्रखंड के अंतर्गत भोगीपुर गांव को गोद लेकर विकास की एक सफल कोशिश शुरू की है. उस गांव में करीब 80 परिवार रहते हैं. इन्होंने लोक संवाद में मुख्यमंत्री के सामने अपने अविष्कार की जानकारी रखी. मुख्यमंत्री इससे बहुत खुश हुए और आश्वासन दिया कि वह स्वयं भी उस गांव में खुद जाकर उस मशीन को देखना चाहेंगे. लोक संवाद में विनय कुमार ने मुख्यमंत्री से सरकारी भूमि चिन्हित कर उपलब्ध कराने की भी अपील की.
क्या योजना है इनकी: 
गांव के किसानों की आय बढ़ाने के लिए कुटीर उद्योग को बढ़ावा देना इनका मुख्य उद्देश्य है. इसके लिए इन्होंने बिजली से चलने वाली 1hp -2hp की ढेकी, ओखली मूसल, जाता, चक्की एवं इंडक्शन फरनेश से चलने वाले कंसार आदि का आविष्कार किया. विनय कुमार कहते हैं कि मैं गांधी जी की विचारधारा को मानता हूं तथा नरेन्द्र मोदी के मेक इन इंडिया से प्रभावित भी हूं. गाँधी जी कहते थे कि भारत की आत्मा गांवों में बसती है इसलिए मैंने भी भोगीपुर गांव को गोद लेकर यहां के बेरोजगार पिछड़े लोगों तथा किसानों को रोजागर देने की एक कोशिश शुरू की है. मेरा मानना है कि बड़े शहरों में इंडस्ट्रीज खोलने के बदले अगर गांव में ही छोटे छोटे उद्योग खोल दिए जायें तो देश का विकास और तेज़ी से होगा.
कैसे आया ये आईडिया: 
विनय कुमार कहते हैं कि मैं हमेशा से किसानों के लिए कुछ करना चाहता हूं. मैंने किसानों की दुर्दशा को भी देखा है. इस दुर्दशा का मुख्य कारण काला बाज़ार है. किसानों के द्वारा थोक मूल्य पर बिचौलिए के हाथों उत्पादन को बेचना. किसी भी परिवार में अनाजों/सब्जियों की खपत किलो में होती है. अगर किसान अपने खेत खलिहान में ही अनाजों/सब्जियों के छोटे—छोटे पैकेट बना दें तो किसान बिना किसी बिचौलिए की मदद के अपने उत्पादों को सीधे पारिवारिक किचन में पहुंचा सकते हैं. इस स्कीम को ‘किसान टू किचन’ नाम दिया जा सकता है.
विनय कुमार ने दो मशीनों का निर्माण खुद किया है तथा दो मशीन का निर्माण नागपुर स्थित एक कंपनी की मदद से करवाई है. गांव में इन्होंने अभी फ़िलहाल भाड़े का एक घर ले एक मशीन को स्थापित करवाया है और सरकार से 67 डेसीमल जमीन देने का आवेदन दे रखा है.