AI को कर्ज से उबारने के लिए कर्मचारियों ने उठाया ये भावुक कदम

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लाइव सिटीज डेस्क : घाटे में चल रही विमानन कंपनी एयर इंडिया के निजीकरण की चिंता इसके कर्मचारियों को सताने लगी है. लंबे समय से एयर इंडिया में काम कर रहे कर्मी दुविधा में है. घाटे से उबारने के लिए गत दिनों सरकार द्वारा एयरलाइंस के निजीकरण अथवा अन्य उपाय किए जाने की बात कही गई थी. जिसके बाद कुछ कर्मचारी इसकी स्थिति सुधारने के लिए आगे आए हैं.

एयरलाइंस का दबदबा कायम रहे इसके लिए कर्मियों ने अपने खर्च में कटौती कर तनख्वाह के रुपये अथवा यात्रा भत्ता की राशि का त्याग करने संबंधी पत्र एयर इंडिया के सीएमडी अश्वनी लोहानी को लिखा है. कर्मियों का कहना है कि उनकी इस छोटी सी मदद से यदि एयर इंडिया का भविष्य सुरक्षित रहता है तो यह उनके लिए खुशी की बात होगी.

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कर्मियों के भावुकता भरे इन पत्रों पर अधिकारियों का कहना है कि एयर इंडिया से वर्षो पुराने जुड़ाव की वजह से ही कर्मचारी इस महंगाई के समय में अपना योगदान देने को तैयार हैं. वर्ष 1951 में एयर इंडिया का राष्ट्रीयकरण किया गया था. वर्तमान में इसके अंतर्गत पांच अनुषांगिक कंपनियां काम कर रही हैं. इसके बेड़े में करीब 140 छोटे-बड़े विमान हैं. वहीं कंपनी में करीब 21 हजार कर्मी कार्यरत हैं. एयर इंडिया पर वर्तमान में पांच हजार करोड़ रुपये का कर्ज है.

दूसरी ओर एयर इंडिया की सात कर्मचारी यूनियनों ने केंद्र सरकार को पत्र लिखकर चेतावनी दी है कि यदि नीति आयोग के एयर इंडिया के निजीकरण के प्रस्ताव को अनुमति दी जाती है तो वे बड़े स्तर पर विरोध प्रदर्शन करेंगे. नागर विमानन मंत्री अशोक गजपति राजू को 14 जून को लिखे एक पत्र में यूनियनों ने उनसे एयर इंडिया के भविष्य को लेकर अपनी चिंताओं के बारे में बातचीत करने के लिए मिलने का समय मांगा है. उन्होंने सरकार की शीर्ष नीति निर्माता इकाई की इस एकतरफा और मनमानी सिफारिश का विरोध करते हुए कहा कि आयोग निजी क्षेत्र के प्रवक्तो की भाषा बोल रहा है.

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