Success Mantra : IITian Guru एमके Sir बता रहे हैं,किसे मिल जाती है IIT में सफलता

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MK सर

लाइव सिटीज डेस्क : IIT में पढ़ने का सपना देश का हर विद्यार्थी एक न एक बार जरूर देखता है. कारण साफ है कि IIT में इस देश की सर्वश्रेष्ठ प्रतिभाएं ही एडमिशन लेती हैं. IIT में दाखिले के लिए विद्यार्थी रात-दिन मेहनत करते हैं. कई बार तो Students Class 7 या 8 से ही कोचिंग शुरू कर देते हैं. इतनी मेहनत के बाद भी कई बार वह सफल नहीं हो पाते. इस पूरी प्रक्रिया में कमी कहां रह जाती है?  विद्यार्थी की मेहनत में या फिर उसकी पढ़ाई के कंटेंट में, जिसके सहारे वह IIT की प्रवेश परीक्षा देने के लिए गया था.

लाइव सिटीज ने आज इसी के बारे में बातें की IIT मुंबई के पूर्व छात्र और पटना में विद्यापीठ कोचिंग संस्थान के निदेशक एम के सिंह से . जानिए क्‍या कहते हैं वे –

होनी चाहिए Burning Desire

IIT मुंबई के ग्रेजुएट मुखलाल कुमार सिंह को उनके स्टूडेंट M.K.Sir भी कहते हैं. MKSir  को IIT की तैयारी करने वाले छात्रों को पढ़ाने का 12 सालों का अनुभव है. अब तक उनके पढ़ाए हुए 300 से अधिक छात्र IITian बन चुके हैं. MKSir बताते हैं कि आईआईटीयन बनने के लिए उसके भीतर Burning Desire होनी चाहिए. ये Desire उसके भीतर कोई भी कोचिंग या शिक्षक पैदा नहीं कर सकता.

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कंटेंट मजबूत हो तभी मिलेगी Success

IIT की तैयारी करने वाले ज्यादातर स्टूडेंटस की विफलता का कारण उनकी तैयारी करने का गलत तरीका होता है. आईआईटी की तैयारी एक लंबी तपस्‍या है जिसमें स्टूडेंट को बिना Divert  हुए लगातार दो साल तक कठिन परिश्रम करना पड़ता है जिसमें Appropriate Content का कम से कम 10000 Hours तक Practice करना पड़ता है. ऐसे में अगर आपका Syllabus समय पर खत्म नहीं हो या आपका content updated नहीं हो या आप पर्याप्त Practice नहीं कर पाएं तो आप विफल हो सकते हैं या यूँ कहे कि विफलता निश्चित है. इसलिए current pattern को follow करते हुए updated  स्टडी मेटेरियल, डीपीपी और टेस्ट को follow  करने से सफलता का रेट बढ़ जाता है.

होना चाहिए शिक्षको का सही Combination

IIT की तैयारी में तीनों विषय,  Physics, Chemistry & Mathematics Faculty का equally अच्छा होना बहुत जरूरी है. इसमे सभी Subjects का syllabus और content appropriately deliver  होता है और syllabus समय पर समाप्त हो जाता है. विद्यापीठ में Maths हरिहर शर्मा सर (ISMDhanbad, Graduate) और पटना के विख्यात Faculty शकील रहमान सर फिजिक्स पढ़ाते हैं.

होना चाहिए Limited Batch Size

क्लासरूम में स्टूडेंट की संख्या 50 से अधिक नहीं होनी चाहिए. इस संख्‍या में शिक्षक को छात्रों के साथ सही सामंजस्य बिठाने में मदद मिलता है. Teacher को exactly पता होता है कि  Student को क्या समझ में आ रहा है और क्या नहीं. बड़े Batch में  one way communication हो जाता है. इसका उदाहरण IIT और अन्य महत्वपूर्ण संस्था में भी देखने को मिलता है जहाँ Lecture Hall में एक साथ 100-200  students lecture attend करते है वहीं  tutorial class जिसमें Professor और  Studetns में सीधा संवाद होता है उसमें केवल 40 studetns ही होते हैं.

विद्यार्थी से जरूरी है संवाद

स्टूडेंट को सिर्फ पढाना ही महत्वपूर्ण नहीं है, पढाने के साथ-साथ समय-समय पर उनका मार्गदर्शन और उत्साह भी बढ़ाते रहना चाहिए. हर छात्र के साथ सीधा संवाद भी स्थापित करना चहिए, जो स्टूडेंट को हो रहे वास्‍तविक समस्या को समझने में मदद करता है, जिसमें उनके सफलता का रेट भी कहीं अधिक हो जाता है. M K Sir बताते हैं कि शिक्षकों की भी कई लेयर होती हैं, पहली लेयर में वह शिक्षक हैं जो क्वालीफाइड हैं यानी खुद IIT व अन्य प्रतिष्ठत संस्थान से पढ़कर आए हैं. प्रैक्टिस में भी पक्के हैं, यानी कि उन्हें पढ़ाने का अनुभव भी है. दूसरी लेयर में वह शिक्षक हैं जो IIT या किसी दूसरे प्रतिष्ठित संस्थान से पढ़कर आए हैं, लेकिन उन्हे स्टूडेंट की जरूरत को समझने या फिर उन्हें तजुर्बा नहीं है. तीसरे लेवल पर वह शिक्षक हैं जो प्रैक्टिशनर हैं यानी कि लगातार कई सालों से 10 – 12 घंटे पढ़ाने के बाद उन्हें कटेंट याद है .

अनुभव है सिद्धांतो के सफल होने का

M K Sir  के सिद्धांतो का प्रभाव संस्थान के Result मे साफ दिखता है. संस्थान के छात्र लगातार आई आई टी, बीट-सैट, आर०एम०ओ, जैसी महत्वपूर्ण परीक्षा में सफलता हासिल कर रहे हैं. JEE Main की प्रवेश परीक्षा में 2015 में 65 में से कुल 36 छात्रों को सफलता मिली थी जबकि 2016 में 70 में से कुल 38 बच्‍चों को सफलता मिली. 2017 में 73 छात्रों मे से कुल 42 छात्रों को सफलता मिली है, वहीं संस्थान के छात्रों ने रीजनल मैथ्स ओलम्पयाड में भी अपना परचम लगातार लहराया है. 2016 में संसथान के तीन छात्रों ने इस प्रतियोगिता में बिहार का नाम ऊंचा किया था, IIT में भी 2015 में 36 में कुल 11, 2016 मे 38 में कुल 12 और 2017 में 42 में से कुल 14 स्टूडेंट सफल रहे. 2017 के PRMO परीक्षा में संस्थान से भाग लिए 51 में कुल 33 स्टूडेंट सफल रहे हैं.

 

पटना में भी उपलब्ध है कोटा और दिल्ली जैसी व्यवस्था

देश के बड़े Coaching Hub से अगर Compare करेंगे तो पायेंगे कि अब IIT में सफलता किसी शहर विशेष में केंद्रित नहीं रह गया है. इसको हम ऐसे समझें कि 2017 के JEE Main Rank-1 जो कि उदयपुर का छात्र है, ने उदयपुर में पढ़ाई करके हासिल की थी, और JEE Advanced  में रैंक 1 चंडीगढ़ शहर से आया है. Kota का bestrank 5 है. विद्यापीठ में स्टूडेंट्स के चयन का प्रतिशत लगभग 60% JEE Main में और 30% JEE Advanced में है, जबकि Kota का चयन प्रतिशत JEE Main में 20-25% और JEE advanced में लगभग 2 से 3 प्रतिशत है. Kota में लगभग 1.5 लाख Student प्रत्येक साल IIT की तैयारी के लिए जाते हैं और केवल 3000 से 3500 Students का IIT में Selection हो पाता हैं. कमोबेश यही हाल अन्य शहरो का भी हैं. Kota और Delhi जैसे शहरों के Coaching centers में एक बैच में 150 से 200 तक Students पढ़ते हैं जो पहले हीं उनको असहज कर देता है. उसके बावजूद जो सबसे ज्यादा परेशान करने वाली बात ये है कि Kota में Students को 14 से 16 घंटे पढ़ाई का Schedule follow करना पड़ता है और क्लासरूम में भी बहुत सारे Problems और DPP Solve करना पड़ता है, जिसका Pressure एक बार Slip होने पर Students इोल नहीं पाते हैं.

तलाश है प्रतिभाओं की

विद्यापीठ अब बिहार में प्रतिभाएं भी तलाश रही है. विद्यापीठ संस्थान कक्षा 8, 9 और 10 में पढ़ने वाले स्टूडेंटस के लिए DREAM-40 बैच की शुरूआत भी करने जा रही है. इस बैच में सिर्फ 40 Students पढ़ते हैं जिसका Admisssion zero fee में होता है. इसके लिए आपको V-MAT 2018 Test परीक्षा में शामिल होना पड़ेगा. इस Test के जरिए Students को Cash Reward  भी मिलेगा. विद्यापीठ हर कक्षा 10 सफल विदयार्थियो के लिए भी विनर्स कैम्प आयोजित करेगी, इस परीक्षा में सफल होने वाले विद्यार्थी ही DREAM-40 बैच का हिस्सा बन सकेंगे.

(सभी तस्वीर प्रतीकात्मक. विभिन्न स्रोतों से साभार)