जानें NPA क्या है, NPA की वजह से कई बैंकों की बैलेंस सीट डगमगाई हुई है?

लाइव सिटीज डेस्क : पिछले काफी वक्त से Non-performing asset की खबरें सुर्खियां बनी हुई हैं. लोन लेने के बाद हो रहे घोटाले के चलते हर कोई जानना चाहता है कि NPA क्या होता है. आपको बता दें कि NPA की वजह से कई बैंकों की बैलेंस सीट डगमगाई हुई है. तो ऐसे सवाल उठता है कि ये NPA आखिर क्या चीज है और इससे बैंक को कैसे नुकसान उठाना पड़ता है. तो चलिए आज हम आपको इसके बारे में जानकारी देते हैं.

NPA क्या है?

यहां आपको पता चल गया होगा कि NPA की फुल फॉर्म Non-performing asset होती है जिसका हिंदी में अर्थ गैर निष्पादित संपत्ति होती है. यहां इसकी फुल फॉर्म से तो आपको इसके बारे में कुछ समझ नहीं आ रहा होगा इसलिए इसे हम सरल शब्दों में जानेंगे. बता दें कि जब कोई देनदार यानी बैंक का कर्जदार अपने बैंक की EMI देने में नाकामयाब रहता है तब उसका लोन अकाउंट Non-performing asset यानी NPA कहलाता है. यानी बैंक का वो कर्ज जो डूब गया है और जिसके फिर से वापस आने की उम्मीद नहीं आने के बराबर है उसे NPA कहते हैं.

अकाउंट को NPA घोषित कर दिया जाता है

आमतौर पर बैंक को कर्ज की EMI 3 महीने पर न दि जाए तो उस अकाउंट को NPA घोषित कर दिया जाता है. इसे ऐसे भी लिया जा सकता है कि जब किसी लोन से बैंक को रिटर्न मिलना बंद हो जाता है तब वह उसके लिए NPA या बेड लोड हो जाता है. लोन के कई क्लासिफिकेशन जैसे स्टैंडर्ड, सब स्टैंडर्ड, डाउटफुल और लोस एसेट हैं.

RBI ने प्रोविजन करने के नियम बनाये हैं

लोन पर डिफॉल्ट के चलते बैंकों पर बहुत ज्यादा असर नहीं पड़े इसके लिए RBI ने उसके प्रोविजन करने के नियम बनाये हैं. बैंक को प्रोविजन की रकम बिजनेस से अलग रखनी पड़ती है. एक रिपोर्ट के मुताबिक इस समय भारतीय बैंकों में 8.50 लाख करोड़ का NPA है. यह रकम 10% होती है जो की काफी ज्यादा है.

तो अब आप जान गए होंगे कि NPA क्या है. इस आर्टिकल को पढ़ने के बाद आपको इसके बारे में काफी जानकारी मिल गयी होगी आप जान गए होंगे कि NPA क्या होता है भारत में बहुत सी ऐसी बड़ी कंपनियां है जो बैंक से लोन लेने के बाद उसे चुकाने में नाकाम रहती है. इस वजह से भारतीय बैंकों को काफी नुकसान भी उठाना पड़ता है.

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