जीएसटी रेट की राह ताक रहे कई बाजार

लाइव सिटीज डेस्क: जीएसटी दरों के चार स्लैब की घोषणा होने के बाद से ही ज्यादातर ट्रेडर्स ने अपने टैक्स रेट का अंदाजा लगा लिया है, लेकिन 1 से 2 पर्सेंट वैट के दायरे में आने वाले कुछ आइटमों के लिए एक ‘स्पेशल रेट’ अभी तय होना है. इसे लेकर अटकलों का बाजार गर्म है और कारोबार भी प्रभावित हो रहा है. साथ ही एक ही तरह के कई आइटमों, जिन पर अलग-अलग वैट लगता है, लेकिन जीएसटी दरों को लेकर तरह-तरह के कयास लगाए जा रहे हैं.



जानकारों का कहना है कि जीएसटी काउंसिल की आगामी बैठकों में भी आइटम-वाइज रेट्स से पर्दा उठने के आसार कम हैं और सरकार इसे आखिरी क्षणों में घोषित करेगी. फिलहाल जीएसटी के तहत 5, 12, 18 और 28 पर्सेंट के रूप में चार दरें सामने आई हैं. सरकार ने पहले ही साफ कर दिया है कि वैट के तहत टैक्स-फ्री चली आ रहीं ज्यादातर चीजों पर जीएसटी भी नहीं लगेगा. इनमें खाद्य और आम इस्तेमाल की कई जरूरी चीजें हैं.

फिलहाल ज्यादातर राज्यों में सोने-चांदी के गहने और साजोसामान, कीमती पत्थर, बुलियन आर्टिकल्स पर 1 पर्सेंट वैट लगता है. जीएसटी के तहत इनके लिए 3 से 5 पर्सेंट के बीच एक स्पेशल रेट तय करने की बात की जा रही है. एक बुलियन डीलर ने बताया कि अभी तक कोई सटीक अंदाजा नहीं मिलने के चलते ट्रेडर 30 जून तक के स्टॉक और वायदा सौदे को लेकर कोई फैसला नहीं कर पा रहे हैं और इससे बाजार में अफवाहों को हवा मिल रही है.

टैक्स की दर पर संशय बरक़रार

फिलहाल 3500 रुपये से सस्ती साइकलों पर वैट नहीं लगता, जबकि इसके ऊपर 5 पर्सेंट टैक्स लगता है. सस्ती साइकल और ट्राइसाइकल बेचने वाले ट्रेडर्स को समझ नहीं आ रहा कि वे टैक्स फ्री स्लैब में आएंगे या जीएसटी के दायरे में. एक ही तरह के कई आइटमों पर फिलहाल 5 से 12.5 पर्सेंट का टैक्स लगता रहा है. केरोसिन ऑयल के स्टोव टैक्स फ्री हैं, जबकि गैस स्टोव पर वैट लगता है. इसी तरह कई मेडिकेटेड चीजें अगर मेडिकल स्टोर से खरीदें तो उन पर 0 से 5 पर्सेंट वैट लगता है, जबकि रिटेल शॉप पर 12.5 पर्सेंट. यहां तक कि एक ही चीज के पाउडर और लिक्विड फॉर्म पर टैक्स की अलग-अलग दरें हैं. हालांकि अंदाजा लगाया जा रहा है कि एक ही तरह की ज्यादातर चीजों पर रेट एक होंगे, लेकिन ट्रे़डर्स को आधिकारिक रेट लिस्ट का इंतजार है.

सीए अतुल गुप्ता कहते हैं कि सरकार आइटम वाइज दरों की घोषणा जीएसटी लागू होने से कुछ घंटे पहले कर सकती है, क्योंकि बहुत पहले इसके ऐलान से कई तरह की विसंगतियां पैदा हो सकती हैं. आगामी 18-19 मई की बैठक में ज्यादा से ज्यादा दरों पर चर्चा हो सकती है या किसी सहमति पर पहुंचा जा सकता है. खाद्य तेल कारोबारी हेमंत गुप्ता ने बताया कि अब तक खाद्य तेल पर 5 पर्सेंट वैट लगता था और ट्रेडर मानकर चल रहे हैं कि रेट इतना या इससे कम रह सकता है.

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