नोटबंदी की अवधि के लिए भेजे गए आधे नोटिस बैरंग लौटे

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लाइव सिटीज डेस्क : 8 नवम्बर को हुए नोटबंदी के बाद से सरकार ने कई नियम बनाये. बहुत से लोगों ने समय रहते अपने पुराने नोट बैंक में जमा करा लिए थे. अब खबर आ रही है कि नोटबंदी की अवधि के लिए टैक्स डिपार्टमेंट की ओर से भेजे गए आधे से अधिक नोटिस वापस लौट आए हैं. इससे यह संकेत मिल रहा है कि डीमॉनेटाइजेशन के दौरान डिपॉजिट या इस्तेमाल किया गया कुछ कैश काला धन हो सकता है. मुंबई में एक इनकम टैक्स अधिकारी ने बताया, ‘हमने लगभग 2,000 नोटिस भेजे थे और उनमें से लगभग 60 पर्सेंट लौट आए हैं.’

नोटिस वापस आने के अधिकतम मामलों में टैक्स पेयर ने अपने पैन को ईमेल से लिंक नहीं किया था या गलत पता दिया था. टैक्स अधिकारी इसे इनकम टैक्स की जांच से बचने की चाल मान रहे हैं. सूत्रों ने बताया कि टैक्स डिपार्टमेंट ने अधिकारियों की एक टीम बनाई है जो जांच को तेज करने के लिए इस तरह के टैक्स पेयर्स की तलाश करेगी. एक सूत्र ने कहा, ‘इस स्पेशल टीम में मुख्यतौर पर स्थानीय टैक्स अधिकारियों को शामिल किया गया है और यह टीम जांच करके यह पता लगाएगी कि व्यक्ति या बिजनेस एस्टैबलिशमेंट कहां मौजूद है और उसने जाली ईमेल आईडी या पता क्यों दिया था.’

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इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने उन लोगों को नोटिस भेजे थे, जिन्होंने संदिग्ध कैश डिपॉजिट किए थे, कैश में महंगे आइटम खरीदे थे और बिजनेस में संदिग्ध एकाउंटिंग एंट्रीज की थी. इसके अलावा टैक्स अधिकारी ऐसे लोगों की भी जांच कर रहे हैं जिन्होंने अपने क्रेडिट कार्ड के जरिए दो लाख रुपये से अधिक खर्च किए थे और इस रकम को चुकाने के लिए नकद भुगतान किया था.

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डिपार्टमेंट की स्पेशल टीम ने इस बारे में टैक्स कंसल्टेंट्स से भी प्रश्न करने शुरू कर दिए हैं. टैक्स एक्सपर्ट्स का कहना है कि डीमॉनेटाइजेशन के दौरान ब्लैक मनी रखने के शक वाले व्यक्तियों के पीछे इनकम टैक्स डिपार्टमेंट लग गया है. लेकिन डिपार्टमेंट की इस कार्रवाई पर सवाल उठ सकते हैं क्योंकि नोटिस और समन भेजना शायद कानून के तहत नहीं है. संदिग्ध बैंक एकाउंट्स की पहचान करने के लिए इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने पहली बार डेटा एनालिटिक्स का इस्तेमाल भी शुरू किया है. डिपार्टमेंट आने वाले सप्ताहों में लगभग 60,000 टैक्स नोटिस भेजने की योजना बना रहा है.