रेल किराया में 10% तक हो सकती है बढ़ोतरी , प्रभु लेंगे फैसला !

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लाइव सिटीज डेस्क : केंद्र सरकार रेल यात्रियों को एक और झटका दे सकती है. मिल रही जानकारी के अनुसार रेल मंत्रालय फिर से रेल किराया बढ़ाने पर विचार कर रहा है. किराया कितना बढ़ाया जाएगा, इसपर अभी कोई अंतिम फैसला नहीं लिया गया है. लेकिन रेल मंत्री सुरेश प्रभु के पास किराया बढ़ाने के लिए 5 अलग-अलग प्रस्ताव आये हैं. इनमें एकमुश्त 10% की वृद्धि से लेकर प्रतिमाह 1% की वृद्धि तक के प्रस्ताव शामिल हैं. किराया किस फार्मूले के तहत बढ़ाया जाए, इसपर अंतिम फैसला रेल मंत्री सुरेश प्रभु लेंगे.

अंग्रेजी अखबार ‘टाइम्स ऑफ़ इंडिया ‘ की एक खबर के अनुसार रेलवे बोर्ड के एक टॉप अफसर ने बताया है कि बोर्ड के सामने किराया बढ़ाने से संबंधित पांच प्रस्ताव आए हैं. इसका मकसद है कि रेलवे के यात्री किरायों से होने वाली आमदनी में बढ़ोतरी की जाए. हालांकि अभी इस मामले में फैसला नहीं लिया गया है. इन प्रस्तावों में राजधानी, शताब्दी और दुरंतो ट्रेनों में फ्लेक्सी फेयर को खत्म करने या घटाने के लिए भी कहा गया है.

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फाइल फोटो

रेलवे बोर्ड को जो 5 प्रस्ताव मिले हैं, उनके अनुसार –

1. हर महीने 1% किराया बढ़े

रेलवे सूत्रों का कहना है कि इस बात पर विचार किया जा रहा है कि एकमुश्त किराया बढ़ाने के बजाय यह नियम बना दिया जाए कि हर महीने किराये में 1% बढ़ोतरी होगी. इससे यात्रियों की जेब पर एक ही झटके में बोझ नहीं बढ़ेगा. साथ ही रेलवे की आलोचना भी नहीं होगी. इसका फायदा यह होगा कि साल भर में किराया बढ़ोतरी लगभग 15% तक हो जाएगी.

2. फ्लेक्सी फेयर बंद हो

एक प्रस्ताव फ्लेक्सी फेयर हटाने का भी है. हालांकि रेलवे को इससे सालाना लगभग छह सौ करोड़ का फायदा हो रहा है. लेकिन इस वजह से उसे नाराजगी भी झेलनी पड़ रही है. बोर्ड के सूत्रों का कहना है कि फ्लेक्सी फेयर को पूरी तरह से हटाया या फिर उसे कम किया जा सकता है. यानी 10% सीटों पर 10% किराया बढ़ाने की जगह 5% बढ़ोतरी की जाए.

3. एकमुश्त 10% बढ़े

तीसरा प्रस्ताव है कि अगर फ्लेक्सी फेयर खत्म किया जाता है तो सभी तरह की ट्रेनों की सभी श्रेणियों में 10% किराया बढ़ा दिया जाए. रेलवे को अभी यात्री किराये से लगभग 45 हजार करोड़ रुपये की आमदनी होती है. अगर दस फीसदी किराया बढ़ता है तो साढ़े चार हजार करोड़ की अतिरिक्त कमाई होगी.

4. सेकंड क्लास अलग

एक प्रस्ताव यह भी है कि सेकंड क्लास के यात्रियों पर बोझ न डाला जाए. पीएम नरेंद्र मोदी लगातार गरीब कल्याण की बात कर रहे हैं. ऐसे में रेलवे नहीं चाहता कि ऐसा नजर आए कि वह गरीबों को नजरंदाज कर रहा है. हालांकि रेलवे में एक राय यह भी है कि सेकंड क्लास में भले ही बेहद कम किराया बढ़ाया जाए लेकिन इसमें भी बढ़ोतरी होनी चाहिए.

5. थर्ड एसी को बख्शा जाए

रेलवे के आंकड़ों को देखें तो उसे थर्ड एसी के अलावा हर क्लास में घाटा होता है. मसलन, एसी चेयरकार में उसका हर पैसेंजर पर खर्च एक रुपये 13 पैसे प्रति किमी. आता है. लेकिन आमदनी एक रुपये चार पैसे ही होती है. वहीं थर्ड एसी में यही खर्च 93 पैसे होता है और आमदनी एक रुपये चार पैसे. इसलिए थर्ड एसी छोड़कर बाकी क्लास से कमाई करने का तरीका निकालने की चर्चा है.

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