छोडि़ए मकान बनाने में नुकसानदेह लाल ईंट लगाना, क्‍योंकि अब मिलने लगा है सफेद कृष ब्रिक्‍स

लाइव सिटीज, सेंट्रल डेस्‍क : समय के साथ तकनीक बदलती है . कारण, नए आविष्‍कार हैं . दूसरी बात है कि अपडेटेड तकनीक को बिहार आने में देर लगती है . आज हम बातें करेंगे मकान बनाने में लगने वाले ईंट की . अब तक हम – आप लाल ईंट से बनते घर देखे हैं . पर, दुनिया की बात छोडि़ए, भारत देश के ही बड़े शहरों में चले जाइए, भवन निर्माण में आप लाल ईंटों की जगह सफेद  ईंट/ब्‍लॉक्‍स को लगते देखा होगा . इन्‍हें एएसी ब्‍लॉक्‍स कहते हैं . इनका इस्‍तेमाल क्‍यों और कैसे हो रहा है, आगे बताते हैं . पर, इसके पहले आपको यह बता दें कि पटना में भी ये एएसी ब्‍लॉक्‍स बनने लगे हैं और इन सफेद ईटों का निर्माण कर रहे हैं कृष व्‍हाइट ब्रिक्‍स एलएलपी . इस्‍तेमाल और फायदे के लिए आप बात करना चाहते हैं, तो कॉल करिए पटना में 9523096466, 9334482329, 9771496501 व 9835021435 पर .

कृष ब्रिक्‍स का पटना में आफिस बुद्ध मार्ग के पुष्‍पांजलि वेंकटेश अपार्टमेंट के सेकंड फ्लोर पर है . आप वहां जाकर सब कुछ पता कर सकते हैं और आर्डर भी बुक कर सकते हैं . भवन निर्माण के विशेषज्ञों का कहना है कि पटना में सफेद ईंटों की तकनीक आने में 36 साल की देरी हुई है . अब तो पटना में भी कई बड़े निर्माण सफेद ईंटों से होने लगे हैं . नामी आर्किटेक्‍ट कंस्‍ट्रक्‍शन में अब इन्‍हीं ईंटों के निर्माण की सलाह दे रहे हैं .

परंपरागत लाल ईंट की सबसे बड़ी खामी यह है कि इसमें आग बहुत जल्‍द लगती है . फिर यह मकान में जंग भी पैदा करता है . इको फ्रेंडली तो है ही नहीं . लाल ईंट लगाने में मजदूरी और समय का खर्चा भी अधिक है . ‍और तो और यह, नई तकनीक के सफेद ईंट से बहुत महंगा भी है . मतलब लाल ईंट कम काम का और अधिक दाम का है .

अब व्‍हाइट ब्रिक्‍स मतलब पटना/बिहार में उपलब्‍ध कृष ब्रिक्‍स की बातें करें, तो फायदे आपको खुद समझ में आ जायेंगे . पहली बात तो यह कि ब्‍हाइट ब्रिक्‍स चिमनियों में तैयार होने की जगह साइंटीफिक और माडर्न प्‍लांट में तैयार होती है . यह ब्‍लॉक्‍स में आती है . साइज दीवार से मेल खाता है . इसके कारण सबसे पहले कंस्‍ट्रक्‍शन कास्‍ट में कमी आती है . लगाने में समय भी कम लगता है .

भवन निर्माण की नई तकनीक के जानकार और कृष व्‍हाइट ब्रिक्‍स के शशांक अग्रवाल कहते हैं कि तुलनात्‍मक देखें तो हजार लाल ईंट को लगाने में सीमेंट, स्‍टील, मजदूरी वगैरह को जोड़कर खर्च 16551 रुपये आता है, जबकि आप कृष व्‍हाइट ईंटों का उपयोग करेंगे तो यह खर्च मात्र 10200 रुपये बैठेगा . इसके अलावा समय भी कम लगेंगे .

बकौल शशांक अग्रवाल सफेद ईंट मतलब कृष ब्रिक्‍स के इस्‍तेमाल का फायदा यह भी है कि बड़े आकार का होने के कारण जोड़ों की संख्‍या कम हो जाती है . कोई भीतरी प्‍लास्‍टर की आवश्‍यकता नहीं होती है . लाल ईंट में आपको दीवार को दोनों ओर से प्‍लास्‍टर करना होता है, जबकि यहां सिर्फ बाहरी प्‍लास्‍टर से काम चल जाता है . इमारत के भार में 30 प्रतिशत और स्‍टील की लगात में 20 प्रतिशत की कमी आती है .

शशांक अग्रवाल बताते हैं कृष ब्रिक्‍स के इस्‍तेमाल का फायदा लाइफटाइम मिलता है . एयरकंडीशनिंग कास्‍ट में कमी आती है . यह बात तो पहले ही बताई जा चुकी है कि सफेद ईंट अग्नि प्रतिरोधक है . साथ में ध्‍वनि अवशोषक भी . इमारत के भार में कमी की वजह से भूकंप प्रतिरोधन क्षमता भी अधिक है .

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