सबसे धनी खेल संघ का यह हाल! अरे ‘मजदूरों’ को मेहनताना तो दो मालिक!

BCCI के नाम से कौन भला अपरिचित होगा. दुनिया का सबसे ‘धन्ना सेठ’ क्रिकेट संघ. सही मायने में धन कुबेर समझें. लेकिन यह क्या 115 अंपायर, 62 मैच रेफरी, 170 विडियो एनालिस्ट और 150 स्कोरर को अभी तक मानदेय तक नहीं दिया है. है न हैरानी वाली बात!

आपको बता दें कि इस सीजन में घरेलू मैचों में अपनी जिम्मेवारी निभाने वाले मैच आॅफिशियल्स, स्कोरर और विडियो एनालिस्ट को दैनिक भत्ता का भुगतान नहीं किया है. यानी उनकी हैप्पी ​दीपावली को अनहैप्पी करने का पूरा इंतजाम कर रखा है BCCI ने.

घरेलू क्रिकेट सत्र का शुभारंभ दिलीप ट्रॉफी के मैचों से हुआ और अभी तक रणजी ट्रॉफी के दो राउंड खेले जा चुके हैं. लेकिन 115 अंपायरों, 62 मैच रेफरियों, 170 विडियो एनालिस्ट और 150 मैच स्कोरर्स को अभी भी BCCI से मानदेय मिलने का बेसब्री से इंतजार है. इन आॅफिशियल्स को दैनिक भत्ता के रूप में 750 रुपये का भुगतान किया जाता है. बोर्ड आमतौर पर इन खर्चों को कुछ दिनों के बाद रिइम्बर्स कर देता है. लेकिन इस साल बोर्ड ने इस ड्यूज को क्लीयर करने में एक माह से भी ज्यादा लगा दिया है. लेकिन अभी तक यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि आने वाले कुछेक दिनों में बोर्ड इस बकाये का भुगतान कर रही है या नहीं.

एक विडियो एनालिस्ट ने अपना दर्द कुछ यूं बयां करते हैं,’ बोर्ड को य​ह समझना चाहिए कि विडियो एनालिस्ट और स्कोरर्स कोई बहुत संपन्न परिवार से ताल्लुक नहीं रखते हैं. इनमें से कई लोग छोटे मोटे रोजगार करने वाले लोग हैं और इसी के बूते अपना और अपने परिवार का भरण पोषण करते हैं. मुझे एक के बाद एक तीन मैचों में ड्यूटी करनी पड़ी. मेरे लिए अगले 20 दिनों के लिए पैसे खर्च कर पाना बेहद मुश्किलों से भरा था.’  काम न मिलने का खतरा भला किसे नहीं सताता है! डर इन्हें भी है. इसलिए पीड़ितों में से कोई बोर्ड से शिकायत करने का रिस्क नहीं लेना चाहता है. उन्हें डर सता रहा है कि बोर्ड उन्हें कहीं ब्लैकलिस्टेड न कर दे और भविष्य में कहीं उन्हें काम मिलना ही बंद न हो जाए.
प्रत्येक साल खेल सत्र आरंभ होने से पहले बोर्ड अंपायर, मैच रेफरी, विडियो एनालिस्ट और स्कोरर के लिए देश के अलग—अलग अकादमियों में दो दिवसीय सेमिनार का आयोजन करता है.

इस साल विडियो एनालिस्ट एवं स्कोरर के लिए सितंबर के मध्य में यह आयोजन नागपुर में हुआ था. यहां BCCI की स्पेशल अकादमी है. प्रत्येक स्कोरर और विडियो एनालिस्ट ट्रेन से एसी टू से यात्रा करने का पात्र होता है लेकिन उन्हें टिकट स्वयं अपने पैसे से बुक कराना होता है. BCCI के नए नियम, जो कि इसी सत्र से प्रभावी हुआ है, के मुताबिक बोर्ड सभी मैच आॅफिसियल को दैनिक भत्तों का भुगतान आॅनलाइन करेगा. यह समयसाध्य होगा क्योंकि संघ दैनिक भत्तों का भुगतान प्रत्येक आॅफिसियल्स को मैच के पहले दिन करता रहा है और नकद में करता रहा है. एक मैच रेफरी की गुहार है कि सबसे जरूरी तो यह है कि BCCI पहले अब तक भुगतान न हो पाए मसले को देखे फिर दूसरी परेशानियां भी है जिसका हल होना जरूरी है. जैसे दैनिक भत्ता सहित दूसरी सुविधाओं में बढोतरी होनी चाहिए.

वह कहते हैं कि बोर्ड मैच रेफरी और अंपायर को पांच सितारा होटलों में ठहराती है जहां एक सैंडबिच भी 1500 रुपये का मिलता है. एक कर्ड राइस के लिए 1200 रुपये चुकाने होते हैं. स्टेट की ओर से खेलने वालों को 1500 रुपये दिए जाते हैं जबकि हमें इसके ठीक आधे. आॅफिशियल्स अपनी व्यथा छिपा नहीं पाते हैं. एक मैच रेफरी कहते हैं कि बोर्ड ऐसा पहले कभी नहीं था. हममें से कई पिछले तीन सप्ताह से सड़कों पर है. कई बिडियो एनालिस्ट कहते हैं कि शायद जीएसटी को लेकर कोई इश्यू है जिसके कारण विलंब हो रहा है. लेकिन BCCI अधिकारी से जानने की जब कोशिश की जाती है तो कोई अपनी जुबां खोलने को तैयार नहीं होता है. इस दीपावली BCCI भले चकाचौंध रोशनी में जगमग करे लेकिन इसके डोमेस्टिक आॅफिसिल्स के घरों में अमावस का अंधियारा छाया हुआ है.