पुण्यतिथि विशेष : हमेशा याद किये जायेंगे ड्रिबलिंग के स्टार मोहम्मद शाहिद

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लाइव सिटीज डेस्क : विश्व के हॉकी में ड्रिबलिंग और रिवर्स फ्लिक के लिए विश्वविख्यात मोहम्मद शाहिद आज के दिन ही (20 जुलाई 2015) पिछले वर्ष अपने हजारों प्रशंसकों को गमगीन कर मात्र 56 वर्ष की आयु में दुनिया से कूच कर गए. मास्को ओलंपिक 1980 में भारत को हॉकी में स्वर्ण पदक दिलाने वाले मोहम्मद शाहिद बड़े जिंदादिल व्यक्ति थे.

बनारस की तंग गलियों से निकला छरहरा, घुंघराले बालों वाला वह लड़का पूरी दुनिया के लिए खौफ था. पाकिस्तान के महान खिलाड़ी हसन सरदार ने एक बार मैच हारने के बाद कहा था कि हम हिंदुस्तान से नहीं हारे, शाहिद से हारे हैं. मोहम्मद शाहिद से उस दौर के ज्यादातर हॉकी प्रेमियों की पहचान रेडियो के दौर की थी. रेडियो पर आवाज आती थी – शाहिद… शाहिद… शाहिद… और गोल… वह दौर आज से अलग था. देश-विदेश के हर हॉकी मैच की कमेंटरी रेडियो पर होती थी. लखनऊ और गोरखपुर जैसे शहरों में हो रहे घरेलू टूर्नामेंट की भी. शाहिद उस दौर के हीरो थे. मास्को ओलंपिक 1980 में भारत को हॉकी में स्वर्ण पदक दिलाने वाले शाहिद बड़े जिंदादिल व्यक्ति थे.

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उनसे मिलने घर या आफिस जाने पर सबसे पहले यहीं कहते थे, ‘और पार्टनर बताओ क्या हाल-चाल है.’ इसके बाद ही बातचीत शुरू होती थी. वह हमेशा हॉकी के विकास के बारे में सोचते थे ताकि हम फिर दुनिया में राज कर सकें. वह भारतीय हॉकी शैली से ही सबको शिकस्त देने में विश्वास रखते थे. इतने सरल व्यक्तित्व के धनी थे कि चुपचाप हॉकी मैच देखते थे. उनका मानना था कि दर्शक दीर्घा से मैच देखने का आनंद कुछ और ही होता है.

उनके खेल को देखते हुए भारत सरकार ने उन्हें पद्मश्री और अर्जुन अवार्ड से सम्मानित किया. वर्ष 1979 से 1989 में विपक्षी उनके सामने आने से डरते थे. हॉकी में रिवर्स फ्लिक लगाने में उन्हें महारथ हासिल थी.

शाहिद का जन्म 14 अप्रैल 1960 को अर्दली बाजार में एक सामान्य परिवार में हुआ था. बचपन से ही उनमें हॉकी के प्रति जुनून था. वर्ष 1980 में उनका चयन स्पोट्र्स हास्टल लखनऊ में हो गया. इसके बाद उन्होंने मुड़कर नहीं देखा. वर्ष 1979 में पहली बार शाहिद का चयन भारत की जूनियर हॉकी टीम में हुआ और इसी वर्ष सीनियर हॉकी टीम में भी चुने गए. वर्ष 1989 तक उनके समकक्ष कोई खिलाड़ी नहीं था.

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