कुंबले के बेहतर प्रदर्शन को देखें : लोढ़ा कमेटी

लाइव सिटी डेस्क : भारतीय क्रिकेट टीम के कोच के चयन की प्रक्रिया को लेकर लोढ़ा कमेटी ने बोर्ड से नाराजगी जताई है. खासतौर पर अनिल कुंबले को कमतर आंके जाने को लेकर लोढ़ा कमेटी ने अपनी नाखुशी जाहिर की है.

समिति का कहना है कि बीसीसीआई को अनिल कुंबले के एक साल के बेहतर प्रदर्शन को देखते हुए किसी भी तरह की चयन प्रक्रिया चलाने की बजाय उन्हें ऑटोमेटिक एक्सटेंशन दे देना चाहिए.

लोढ़ा कमेटी के सचिव गोपाल शंकरनारायणन ने कहा कि, ‘यह बेहद अजीब है कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश से बाध्य प्रशासक अब भी ऑफिस में जमे हुए हैं और अपनी मनमानी कर रहे हैं. यही नहीं वे क्रिकेटर्स और कोच को लेकर फैसले भी ले रहे हैं.’


शंकरनारायणन ने कहा, ‘कुंबले के साथ इस तरह का बर्ताव नहीं किया जाना चाहिए. अपने नैशनल कोच के साथ यह व्यवहार करने का तरीका नहीं है. कोचिंग के लिए एक साल का कार्यकाल देना काम करने के लिए काफी नहीं होता. नैशनल कोच के लिए साल दर साल अपॉइंटमेंट देना सही नहीं है.

एक साल के कार्यकाल के लिए आखिर कौन आना चाहेगा.’ शंकरनारायणन ने कहा, ‘आप देख सकते हैं कि ऐसा बोर्ड अधिकारियों की ओर से जानबूझकर किया गया है. आप अपने नैशनल कोच को टुकड़ों में अपॉइंटमेंट नहीं दे सकते. अगला कॉन्ट्रैक्ट एक साल का नहीं होना चाहिए.’


यह पूछे जाने पर कि क्या कुंबले लोढ़ा कमेटी से नजदीकियों की कीमत चुका रहे हैं, शंकरनारायणन ने कहा, ‘कुंबले ने खिलाड़ियों के हित में खड़ा होने का फैसला लिया. उन्होंने सवाल उठाया कि खिलाड़ियों को आईसीसी से आने वाले पैसों में से कुछ नहीं मिलता, बल्कि वह ऐसे लोगों के हाथ चला जाता है, जो उसके हकदार नहीं हैं.’

हालांकि शंकरनारायणन ने आरोपों में बीसीसीआई के अधिकारियों ने कोई जवाब देने से इनकार कर दिया. बोर्ड के एक अफसर ने कहा कि बीसीसीआई की कार्यप्रणाली में लोढ़ा कमेटी का कोई दखल नहीं है.

यदि कोच की नियुक्ति को लेकर कोई प्रॉसेस नहीं होता तो यही कमेटी बीसीसीआई पर सवाल खड़े करती.