आपके हौसले को सलाम है, पूरा बिहार आपके साथ है: सुशील मोदी

लाइव सिटीज डेस्क (विकास पांडेय): हौसले हों बुलन्द तो हर मुश्किल को आसां बना देंगे,छोटी टहनियों की क्या बिसात हम बरगद को हिला देंगे.कुछ इसी सोच के साथ दो दिव्यांग खिलाड़ियों ने सियाचीन में तिरंगा लहराने की जिद ठानी है. उनका मकसद बिहार के साथ-साथ हिन्दुस्तान का नाम रौशन करना और फिर से एक बार विश्व कीर्तिमान स्थापित करना है.


इसके लिए कई दिनों से दोनों खिलाड़ी राजधानी में घूम-घूमकर लोगों को अपने सफर की जानकारी दे रहे हैं और राज्य व केंद्र सरकार की बेरूखी भी बयां कर रहे हैं. हम बात कर रहे हैं अंतरराष्ट्रीय दिव्यांग एथलीट अनुराग चंद्रा और संतोष मिश्रा की. रविवार को यह दोनों एथलीट पूर्व उप मुख्यमंत्री सुशील मोदी से मिले और अपने अभियान से अवगत कराया. पूर्व उपमुख्यमंत्री ने एथलीटों को उनके मकसद में कामयाबी की शुभकामनाएं दी. कहा कि आपके हौसले को सलाम है, पूरा बिहार आपके साथ है.


अनदेखी को स्वीकारा
खेल की दुनिया में राज्य और देश के नाम मेडल लाने के बाद एक बार नहीं बल्कि दर्जनों बार मंत्री से लेकर मुख्यमंत्री ने इन खिलाड़ियों का स्वागत किया और सम्मानित भी किया.आज ये खिलाड़ी जंग लगे मेडल,सम्मान की निशानी और सर्टिफिकेट की फेहरिस्त देखकर सिस्टम को कोस रहे हैं और उसे ही दिव्यांग बता रहे हैं. वर्षों से सरकारी दफ्तरों का चक्कर लगाने के बाद भी इन दोनों खिलाड़ियों को सरकार ने चपरासी तक की नौकरी नहीं मिल रही है. इस पर पूर्व उपमुख्यमंत्री ने स्वीकार किया की उनके साथ अच्छा नहीं हो रहा है. साथ ही आश्वासन दिया की उनकी इस लड़ाई में साथ खड़े रहेंगे.


आश्वासन के अलावा कुछ नहीं मिला
हैरानी की बात ये है कि इन जुनूनी और साहसिक खिलाड़ियों को मदद के नाम पर सिस्टम से फूटी कौड़ी तक नहीं मिली.दोनों शरीर से दिव्यांग होने के बावजूद चट्टानी इरादों के बल पर दर्जनों मेडल अपने नाम कर चुके हैं.अब फिर से एक ऐसे सफर पर निकलनेवाला है जो आम इंसान के लिए भी नामुमकिन है. इस साहसिक सफर में आनेवाले खर्च और रास्ते में सुरक्षा के लिए राज्य से लेकर केंद्र सरकार तक गुहार लगाई. एक ओर जहां केंद्र सरकार दिव्यांगों के सशक्तिकरण के लिए प्रचार—प्रसार कर रही, वहीं इनकी सुनी नहीं गई. अनुदान राशि होने के बाद भी राज्य सरकार की नींद इनके लिए नहीं टूटी. वहीं राज्यपाल निवास से फोन पर सप्ताहपूर्व ब्यौरा लेकर मदद का दिया गया आश्वासन सिर्फ आश्वासन ही रह गया.


फिर भी हौसला बुलंद है..

इसे रंगों में हिन्दुस्तानी लहू का जोश समझिए या फिर भारत मां का आशीर्वाद आर्थिक व शारीरिक रूप से कमजोर होते हुए भी दोनों एथलीट 3000 किमी सियाचीन ग्लेशियर का सफर 21 जून से शुरू करने वाले हैं और -12 डिग्री पर तिरंगा लहराने का मन बना चुके हैं. इससे पहले भी वर्ष 2015 में दोनों ने ट्राईसाइकिल के सहारे इंडिया गेट से लेह लद्दाख यानि 24 हजार फीट का सफर तय कर विश्व कीर्तिमान स्थापित करने का रिकॉर्ड अपने नाम किया था.