खिलाड़ियों की नियुक्ति बंद क्यों? जवाब दो!

पटना: अन्य राज्यों में पदक विजेता खिलाड़ियों को सम्मान के साथ-साथ सरकारी नौकरी की व्यवस्था है लेकिन बिहार में खिलाड़ियों की नौकरी में बहाली क्यों बंद है. इसका जवाब हम राज्य सरकार , विभाग व प्राधिकरण के अधिकारियों से मांग कर रहेंगे. हम खिलाड़ी हैं, आमरण अनशन और धरना प्रदर्शन मैदान छोड़कर करना हमारा काम नहीं है. उक्त बातें नियुक्ति व पांच सालों से राज्य में बंद बहाली को लेकर खिलाड़ियों ने उठाए.

सरकारी नौकरी में खिलाड़ियों की बहाली में देरी और अन्य मांगों को लेकर बिहार के 200 से अधिक राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी  शनिवार को आमरण अनशन करने को विवश हो गए.  मोइनुल हक स्टेडियम परिसर में अनशन का नेतृत्व कर रहे बिहार प्लेयर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष मृत्युंजय तिवारी ने कहा कि खिलाड़ियों की बहाली पांच सालों से बंद है. नौकरी के लिए चयनित किए गए कई खिलाड़ियों को अभी तक नियुक्ति पत्र नहीं मिला है. उन्होंने कहा कि बिहार में खेल और खिलाड़ियों का विकास मुख्यमंत्र्ी का ड्रीम प्रोजेक्ट है. लेकिन कला, संस्कृति व युवा विभाग और बिहार राज्य खेल प्राधिकरण के अधिकारियों के लापरवाही के कारण खिलाड़ी दो जून की रोटी को इधर—उधर भटकने को विवश है. इससे इनके खेल में बाधा आ रही है.


उन्होंने कहा कि खिलाड़ी लगातार अपनी मांगों को लेकर विभाग व प्राधिकरण का ध्यान इस ओर आकृष्ट कराया परंतु उन्हें इनकी कोई चिंता नहीं है. मजबूरन खिलाड़ियों को आमरण अनशन पर उतरना पड़ा यह अनशन तब तक जारी रहेगा जबतक खिलाड़ियों की मांग पूरी नहीं हो जाती. हालांकि देर शाम होते होत धरनास्थल पर सरकार कई मंत्री और विधायक एकत्रित हो गए. इनमें मुख्य रूप से राजद के प्रदेश अध्यक्ष रामचंद्र पूर्वे, विधायक भाई वीरेंद्र, रामानुज प्रताप रहे. खिलाड़ियों के मांग और अनशन को पर प्रदेश अध्यक्ष व विधायकों ने समर्थन करते हुए कहा कि यह आमरण अनशन राजनीतिक नहीं पर जनतांत्रिक है. खिलाड़ी हमारे प्रदेश का नाम अंतरराष्ट्रीय पटल पर गौरांवित कर रहे हैं. इनका हक मिलना चाहिए. इनकी मांगों को जल्द मुख्यमंत्री से मुलाकात कर रखेंगे.

खिलाड़ियों का आरोप
– सरकार खिलाड़ियों को खेलने के उचित संसाधन मुहैया कराने में असफल है. न खेल मैदान न कोच
– राजधानी पटना तक खिलाड़ियों को प्रैक्टिस की जगह नहीं मिल पाती है
– पदाधिकारी पैसा का रोना रोते हैं जबकि खेल विभाग आवंटित राशि खर्च नहीं कर सकी और राशि सरेंडर हो गया
– बिहार सरकार के एकलव्य सेंटर की स्थिति भी बदहाल है
– केंद्र सरकार का साई सेंटर भी सही से नहीं काम कर रहा
– खेल विधायक को लेकर राज्य सरकार की नीति स्पष्ट नहीं है.