प्रो- कबड्डी लीग: पाकिस्तानी खिलाड़ी भी हैं नीलामी का हिस्सा, लेकिन वीसा ही न मिला तो क्या होगा?

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(लाइव सिटीज डेस्क): आईपीएल का शोर थम चुका है और प्रो— कबड्डी लीग की गहमागहमी शुरू हो चुकी है. आज खिलाड़ियों की नीलामी है. पाकिस्तान के खिलाड़ी भी इस नीलामी का हिस्सा हैं.

पहले भी नीलामी का हिस्सा रह चुके हैं, लेकिन खेलने का मौका मिल पाना या न मिल पाना मौके की बात रही है. पाकिस्तान के खिलाड़ी सियासत और अंतरराष्ट्रीय कूटनीति की बलि चढ़ते रहे हैं. ऐसे में यह सवाल उठना लाजिमी है कि क्या इस बार उन्हें मौका मिल भी पाएगा?

पाकिस्तान की कबड्डी टीम दुनिया की शीर्ष कबड्डी खेलने वाले देशों में शुमार की जाती है. वहां के खिलाड़ी दुनिया के किसी भी देश के खिलाड़ियों से कतई कमतर नहीं रहे हैं और अंतरराष्ट्रीय मुकाबलों में तगड़ी चुनौती पेश करते रहे हैं.

एशियाई खेलों में जहां कबड्डी की प्रतिस्पर्धा होती है, पाकिस्तान अब तक दो रजत पदक और पांच कांस्य पदक अपने नाम कर चुका है. यह सही है कि भारत की कामयाबी के मुकाबले यह कमतर ही है, लेकिन ओवरआॅल इसे अच्छा ही कहेंगे.

 

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भारत और पाकिस्तान के बीच खेल संबंध दोनों देशों के बीच कूटनीतिक, सामरिक और सियासी परिस्थितियों से प्रभावित होती रही हैं. खेल संबंधों में भी उतार चढाव आते रहे हैं.

कभी इसमें गर्मजोशी दिखाई देती है तो कभी खेल रिश्तों में ठंढापन हावी हो जाता है. और कभी—कभी तो फूटी आंख न सुहाने वाली स्थिति भी देखने को मिलती है.

दोनों देशों के बीच खेल दौरों पर संशय के बादल छाते रहे हैं. दौरे बीच में रद्द की जाती रही हैं. अंतिम समय में अनुमति नहीं मिलने के कारण दौरा रद्द भी होता रहा है.

खि​लाड़ियों को वीसा नहीं मिलने के कारण दोनों देशों के खिलाड़ियों को एक दूसरे के देश में जाकर खेल प्रतिभा दिखाने का अवसर कम ही मिल पा रहा है.

प्रो— कबड्डी लीग सीजन पांच के पहले ऐसे सवाल मन में इसलिए आ रहे हैं क्योंकि इस बार दस पाकिस्तानी खिलाड़ी भी नीलामी का हिस्सा होंगे. टीमें उन पर भी बोली लगाएंगे. ऐसा वर्षों बाद हो पा रहा है.

कई सालों तक नीलामी का हिस्सा वे नहीं रह पाए थे. वजह वही जिसका उल्लेख किया जा चुका है. पाकिस्तान की हॉकी, स्क्वैश और कुश्ती के खिलाड़ियों को भी वीसा न मिल पाने से दोनों देशों के बीच खेल दौरों की संभावना खटाई में पड़ती रही है.
पाकिस्तान की कबड्डी टीम कोरिया, इरान और भारत के टक्कर की मानी जाती है. पाकिस्तान के तीन कबड्डी खिलाड़ी वर्ष 2014 में टूर्नामेंट के उद्घाटन संस्करण में हिस्सा लेने के लिए भारत की यात्रा पर आ चुके हैं.

इनमें वसीम सज्जाद भी शामिल थे जो 17 मैचों में शिरकत कर चुके हैं और यहां तक कि पटना पाइरेट्स को नेतृत्व भी प्रदान कर चुके हैं. इस बार की नीलामी में वसीम सज्जाद भी शामिल हो रहे हैं. उनपर सबकी निगाहें होंगी. ​

 

फाइल तस्वीरयदि नीलामी की प्रक्रिया में कोई टीम पाकिस्तानी कबड्डी खिलाड़ियों को अपने साथ जोड़ता भी है तो उनका खेल पाना सुनिश्चित नहीं हो जाएगा.

आगे सबकुछ इस बात पर निर्भर करता है कि उन्हें भारत में प्रवेश की अनुमति मिल पाती है या नहीं. निगाहें इस बात पर टिकी रहेंगी कि उन्हें इसके लिए वीसा प्रदान किया जाता है या नहीं.

अंतरराष्ट्रीय कबड्डी फेडरेशन मुख्य कार्यकारी अधिकारी देवराज चतुर्वेदी का मानना है कि पाकिस्तानी खिलाड़ी अगर नीलामी की बाधा पार कर लेते हैं तो सरकार के पास वीसा अनुमति के लिए पहल की जाएगी.

अगर अनुमति मिल जाती है तो उनके यहां खेलने पर संशय के बादल छंट जाएंगे और अगर ऐसा नहीं हो पाता है तो स्थापन्न खिलाड़ी उनकी जगह लेंगे.

गौरतलब है कि पिछले साल जम्मू कश्मीर के उरी में आतंकी हमले और इस हमले में भारत द्वारा पाकिस्तान की संलिप्तता के आरोप के बाद पाकिस्तान को अहमदाबाद में विश्वकप में भाग लेने की अनुमति देने से मनाकर दिया गया था. हालांकि पिछले साल फरवरी में पाकिस्तान की टीम दक्षिण एशियाई खेलों में गुवाहाटी में मौजूद थी.

 

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हालांकि, अनिश्चितता अभी भी कर रही है कि क्या पाकिस्तानी खिलाड़ी को टूर्नामेंट के लिए भारत आने की अनुमति दी जाएगी।

“यदि नीलामी के दौरान किसी खिलाड़ी द्वारा किसी खिलाड़ी को चुना जाता है, तो सरकार को वीज़ा प्रक्रिया शुरू करने के लिए संपर्क किया जा सकता है।

इंटरनेशनल कबड्डी फेडरेशन के मुख्य कार्यकारी अधिकारी देवराज चतुर्वेदी का कहना है, यदि वीज़ा को मंजूरी मिल गई है तो उनकी भागीदारी की पुष्टि की जाएगी।

“यदि वीजा के माध्यम से नहीं आते हैं तो टीमों को प्रतिस्थापन खिलाड़ियों के साथ प्रदान किया जाएगा,” वे कहते हैं। पिछले साल, उरी में आतंकवादी हमलों के बाद, पाकिस्तान को अहमदाबाद विश्व कप में प्रतिस्पर्धा करने से मना कर दिया गया था, हालांकि पिछले साल फरवरी में पाकिस्तान की टीम दक्षिण एशियाई खेलों में गुवाहाटी में मौजूद थी. वर्ष 2014 के प्रो कबड्डी लीग के उद्घाटन सत्र के लिए, पाकिस्तानी कबड्डी खिलाड़ी को वीजा नहीं दिया गया था. उनमें नासिर अली भी शामिल थे. आज नई दिल्ली में होने वाली नीलामी में नासिर अली के नाम पर भी विचार होगा. वह भी नीलामी का हिस्सा होंगे.

 

 

प्रो कबड्डी लीग के आगामी संस्करण के लिए नई दिल्ली में आज हो रही नीलामी अब तक की सबसे महंगी नीलामी होगी. इस बार का सीजन भी पहले की तुलना में ज्यादा बड़ा होगा.

इस बार टूर्नामेंट ने चार नई फ्रैंचाइजी जोड़ दी गई है जिससे इस बार टीमों की संख्या बढकर 12 हो गई है. इस नीलामी प्रक्रिया में विगत चार सीजन से खेलती आ रही टाठ टीमों— पटना पाइरेट्स, जयपुर पिंक पैंथर्स, दबंग दिल्ली, बेंगलुरू बुल्स, तेलुगू टाइटन्स, पुनेरी पल्टन, यू—मुंबा और बंगाल वारियर्स के अलावा चार नई टीमें लखनउ, अहमदाबाद, चेन्न्ई और हरियाणा की टीमें भी नीलामी में बोली लगाएंगी.

लीग की अवधि को भी छह सप्ताह से बढ़ाकर 13 सप्ताह कर दिया गया है. यानी तीन माह से भी ज्यादा समय के लिए देश पर कबड्डी का बुखार छाया रहेगा. इस बार की नीलामी में 400 से ज्यादा खिलाड़ी के नामों पर विचार किया जाएगा.

इसके अलावा नीलामी में 131 युवा प्रतिभाशाली खिलाड़ी भी शामिल होंगे जिन्हें स्टार स्पोर्ट्स की ओर से आयोजित टैलेंट हंट के द्वारा देश के 15 शहरों से तलाशा गया है. पाकिस्तान सहित 16 से ज्यादा देशों के 60 से ज्यादा विदेशी खिलाड़ी भी इस नीलामी में होंगे.

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प्रो कबड्डी लाग का सीजन 5 अब तक के तमाम सीजन में से सबसे बड़ा सीजन साबित होने जा रहा है. आज लीग के इतिहास में सबसे महंगी नीलामी होने जा रही है. प्रत्येक फ्रेंचाइजी टीम का सैलरी पर्स इसबार 4 करोड़ रूपये होगा. विगत दो नीलामी के सैलरी पर्स क्रमश: 60 लाख और 2 करोड़ रूपये की तुलना में यह बहुत ही ज्यादा है.

आठ में से 7 फ्रेंचाइजी ने एक—एक खिलाड़ी को रिटेन किया है जबकि एकमात्र जयपुर पिंक पैंथर्स ने किसी भी खिलाड़ी को रिटेन नहीं किया है.

टीम स्ट्रेंथ भी इस बार ज्यादा होगी. प्रत्येक टीम के लिए इसबार न्यूनतम 18 खिलाड़ियों को खरीदने की आवश्यकता होगी जिनमें दो विदेशी खिलाड़ियों के साथ यंग टैलेंट भी होंगे. नीलामी की प्रक्रिया के पहले ही अटकलों का बाजार भी गर्म है कि क्या इस बार कोई टीम किसी खिलाड़ी पर करोड़ रूपये का दांव लगाएगी?

दूसरे शब्दों में कहें तो क्या कोई खिलाड़ी इस बार एक करोड़ से ज्यादा की रकम हासिल कर पाएगा? फिलहाल तो इंतजार ही करना होगा.

लेकिन आपको बता दें कि पिछले साल के सबसे महंगे खिलाड़ी मोहित छिल्लर रहे थे जिन्हें बेंगलुरू बुल्स ने 53 लाख रूपये में अपनी टीम का हिस्सा बनाया था.

दूसरे सीजन की चैंपियन यू मुंबा टीम के सीईओ सुप्रतीक सेन का कहना है कि पर्स का आकार बढ़ गया है, इसलिए इस बार गणितीय रूप से खिलाड़ियों के लिए संभावनाएं भी पहले से ज्यादा हैं.

लेकिन लीग के लंबे सीजन और खेल की प्रकृति के आधार पर तेलुगू टाइटन्स के आॅनर श्रीनिवास श्रीमणि किसी एक खिलाड़ी पर ज्यादा रकम लगाने के दांव की किसी भी संभावना से इन्कार करते हैं.

उनका मानना है क ज्यादा पर्स रकम के साथ छोटी अवधि के सीजन में तो ऐसा मुमकिन है लेकिन एक लंबी अवधि के सीजन में इसकी संभावना कम ही है.

वह मानते हैं कि लंबी अवधि के खेल सीजन में कबड्डी खिलाड़ियों के चोटिल होने की आशंका ज्यादा रहती है. इसलिए किसी एक खिलाड़ी पर ज्यादा रकम का दांव लगाने से कहीं ज्यादा संपूर्ण बेंच स्ट्रेंथ पर ध्यान केंद्रित करने पर फ्रेंचाइजी का ध्यान ज्यादा रहेगा.

इसलिए किसी एक खिलाड़ी पर ज्यादा रकम का दांव खेलने को प्राथमिकता कोई फ्रेंचाइजी शायद ही दे.

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बहरहाल पूरी नीलामी में लोगों की निगाहें अन्य बातों के अलावा पाकिस्तानी खिलाड़ियों की नीलामी पर भी रहेगी और खिलाड़ियों और खेल प्रेमियों दोनों में उत्सुकता जाहिर तौर जितनी भारत में रहेगी, पाकिस्तान में भी कतई उससे कम नहीं रहेगी.

दोनों देशों के बीच के वर्तमान संबंधों को देखते संशय के बादल ही ज्यादा नजर आ रहे हैं. लेकिन अगर ऐसा नहीं हुआ तो निश्चित तौर पर खेल के लिए यह एक सुखद संदेश होगा.

 

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