सीमित ओवर के मैचों में टीम की कमान रोहित को क्यों नहीं?

लाइव सिटीज डेस्क (विमलेन्दु कुमार सिंह) : महेन्द्र सिंह धोनी द्वारा क्रिकेट के सभी प्रारूपों की कप्तानी से मुक्त होने के फैसले के बाद भारतीय क्रिकेट टीम की कमान पूरी तरह से विराट कोहली के हाथों में पहले ही आ चुकी है. विराट मैदान पर अपनी जिम्मेवारियों को बखूबी निभाते भी रहे हैं. लेकिन पिछली सीरिज के साथ—साथ वर्तमान आईपीएल में भी विराट पूरी तरह से अपनी रौ में नहीं दिखे.

जो तेवर उनकी बल्लेबाजी की खास पहचान थी, वह कहीं न कहीं कुंद पड़ती दिखाई दी. अपनी सेहत के प्रति अतिसंवेदनशील विराट हाल के दिनों में चोटिल भी हुए हैं. यह सही है कि चोट और फॉर्म से खिलाड़ी को कैरियर में कभी न कभी जूझना तो पड़ता ही है. किसी खिलाड़ी के परमॉरमेंश में एकरूपता न तो संभव है और न ही किसी को इसकी अपेक्षा ही करनी चाहिए. लेकिन तब एक बात यह भी सामने आती है कि क्या विराट का बतौर बल्लेबाज प्रदर्शन कहीं कप्तानी से प्रभावित तो नहीं हो रहा है?

टेस्ट मैच की कमान उन्हें पहले ही मिल चुकी थी, टी—20 और वन—डे की कमान उन्होंने बाद में संभाली है. अगर कप्तानी के दायित्व को उनके परफॉरमेंश से जोड़कर देखें और हम इस बात पर चर्चा करें कि सीमित ओवरों के प्रारूप में उनका विकल्प कौन—सा खिलाड़ी हो सकता है तो इसे संदेह या साजिश के नजरिये से नहीं देखा जाना चाहिए.

ध्यान दें कि कप्तानी का जब मौका मिला है तो अजिंक्य रहाणे ने भी मैदान पर नेतृत्व में अपनी काबिलियत बखूबी दिखाई है. ताबड़तोड़ क्रिकेट की आईपीएल जैसी प्रतिस्पर्धा में अपनी टीम को तीन मर्तबा खिताब दिलाकर रोहित शर्मा सीमित ओवरों के प्रारूप में कमान संभालने के लिए स्वाभाविक पसंद बन चुके हैं.

क्या अपने नेतृत्व क्षमता की काबिलियत सिद्ध करने के लिए आईपीएल की कामयाबी एक नजीर नहीं है? मुख्य कोच और श्रीलंका के पूर्व कप्तान महेला जयवर्धने रोहित की कप्तानी के कायल हो चुके हैं. एमआई के कोच ने रोहित को एक बेहतर कप्तान बताया है. उन्होंने कहा कि जिस तरह से मैचों में उन्होंने सीनियर खिलाड़ी से मशविरा किया और उनके अनुभवों का लाभ उठाया, यह नजरिया उन्हें एक बेहतर ​कप्तान साबित करता है.

बहरहाल अभी तो न तो विराट के विकल्प की तलाश हो रही है और न ही वह फिलहाल मन में पक रही ऐसी किसी ख्वाहिशों का इजहार ही किया है. फिर भी अगरहम बात करें तो इतना तय मानकर चला जाना चाहिए कि भविष्य में जब कभी भी सीमित ओवरों के प्रारूप में टीम की कमान किसी अन्य खिलाड़ी को सौंपने एवं विराट के उपर से दबाव कम करने के बारे में विचार किया जाएगा तो चयन समिति के सदस्य रोहित के नेतृत्व क्षमता की अनदेखी हरगिज नहीं कर पाएंगे और उनके नाम पर ​गंभीरतापूर्वक विचार करने को अवश्य ही मजबूर होंगे.

बहरहाल, फिलहाल तो रोहित को अपने बल्ले से ही अपनी क्षमता प्रदर्शित करनी होगी, कमान जब सौंपी जाएगी, तब देखी जाएगी.