बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने की बाल गृह की जांच, कई निर्देश भी दिए

गया (पंकज कुमार) : बिहार बाल अधिकार संरक्षण आयोग के अध्यक्ष डा0 हरपाल कौर एवं सदस्य परमहंस कुमार और प्रमिला सिंह ने जिला बाल संरक्षण इकाई के सहायक निदेशक एवं बाल संरक्षण पदाधिकारी के साथ बाल गृह (डॉर्ड), गया का निरीक्षण किया गया. बाल गृह के बच्चों द्वारा अध्यक्ष एवं सदस्यों को गुलदस्ता देकर स्वागत किया गया. निरीक्षण के समय बाल गृह में 49 बच्चे आवासित थे. आयोग के अध्यक्ष द्वारा सर्वप्रथम बच्चों को उनके अधिकार एवं बिहार बाल अधिकार संरक्षण आयोग के बारे में जानकारी दी गयी. उनको बाल गृह में क्या-क्या सुविधाएँ दी जाती है, जैसे-भोजन, सोने, रहने की व्यवस्था, शिक्षा, उचित देखभाल, पोषण इत्यादि की जानकारी दी गयी.

आयोग के द्वारा गृह के रसोई घर एवं बच्चों के बेड रूम की जाँच किया गया. नाले के पानी की निकासी न होने के वजह से गृह स्थानातंरण हेतु निदेश दिया गया. गृह में कितने स्टॉफ है तथा स्टॉफ को क्या-क्या कार्य हैं. इन सब बातों की जानकारी प्राप्त की गई. आयोग के द्वारा गृह में संधारित सभी तरह के रजिस्टर की जाँच की गई. गृह में किस-किस जिले के बच्चे हैं, इसकी जानकारी माँगी गई. गृह में आवासित बच्चों को पुर्नवास हेतु निदेश दिया गया. गृह में आवासित बच्चे कब से और कहाँ से एवं कितने दिनों से है, इसकी जानकारी माँगी गई. अधीक्षक ने बताया गया कि गृह  में बाल श्रम से विमुक्त हुये एवं भूले-बिसरे एवं अनाथ,  वाले बच्चे को आश्रय दिया जाता है.

बाल गृह में बच्चों के आने पश्चात परामर्शी के द्वारा उनका काउसलिंग के आधार पर उनके घरों के सत्यापन के पश्चात बाल कल्याण समिति के आदेषानुसार पुर्नवासन कराया जाता है. अध्यक्ष एवं सदस्यों के द्वारा पूछा गया कि कितने बच्चे स्कूल जाते हैं. अधीक्षक के द्वारा बताया गया कि 20 बच्चे प्राथमिक विद्यालय मुस्तफाबाद, गया में जाते है एवं 10 विशेष देखभाल वाले बच्चों को विशेष विद्यालय साउथ लखीबाग, मानपुर, गया में भेजा जाता है.

अधीक्षक के द्वारा बताया गया कि 01 फरवरी 2018 को जयपुर से विमुक्त होकर 68 बालकों में 06 बच्चों को बाल गृह में आश्रय दिया गया. इन बच्चों को बाल कल्याण समिति के आदेशानुसार उनके गृह में पुर्नवासन किया जा रहा है. जिन बच्चों का घर का पता लग गया है उनको यथाशीघ्र घरों में पुर्नवासित करने का निदेश दिया गया है.  अध्यक्ष के द्वारा विशेष देखरेख के बच्चों के बारे में पूछा गया. बाल गृह के अधीक्षक ने बताया गया कि गृह में 17 बालक विशेष देखरेख के है. अधीक्षक ने बताया कि बाल गृह (डॉर्ड) स्पेशल यूनिट दिये जाने हेतु विभाग को कई बार लिखा गया, परंतु अब तक स्पेषल यूनिट गठित नहीं किया गया.

बाल गृह में एक पारा मेडिकल स्टाफ है, जो कि बच्चों के स्वास्थ्य की देखभाल करती है. सीएनसीपी वाले बच्चों को दी जानी वाली विशेष भोजन के बारे में पूछा गया तो बालक सरताज ने बताया कि सप्ताह में एक दिन मांसाहारी भोजन दिया जाता है. आयोग के द्वारा गृह के रसोईघर, भंडार गृह एवं शयन कक्ष का जांच किया गया. नाले के पानी के निकासी न होने के कारण से गृह का स्थानातंरण किये जाने का निदेश दिया गया एवं साफ-सफाई पर ध्यान दिये जाने पर निदेश दिया गया.

पूर्व में 30 बच्चों का हेल्थ कार्ड बनाया गया था. वर्तमान में 12 बच्चों का हेल्थ कार्ड बना था. बाकी बच्चों का हेल्थ कार्ड क्यों नहीं बनाया गया है, जबकि गृह 30 बच्चे लंबे समय से गृह में आवासित है. सभी बच्चों का हेल्थ कार्ड बनाने का निदेष दिया गया. पारामेडिकल कर्मी के द्वारा बताया गया कि जब हम चार-पाँच बच्चों का हेल्थ कार्ड बनाने के लिए प्रयास करते है तो नहीं बनता है. सरकारी अस्पताल में यह कहा जाता है जब एक साथ तीस-चालीस बच्चे हो तो ही बच्चों का कार्ड बनेगा, एक दो बच्चों का नहीं है. लीगल एडवाईजर से पूछा गया कि यह जानकारी अपने सीनियर ऑफिसर को दी है या नहीं.

लीगल एडवाइजर के द्वारा यह पूछा गया कि गृह में लाईब्रेरी की सुविधा है या नहीं. इसके बारे में पूछा गया तो अधीक्षक ने बताया कि बच्चे के लिए किताब, कलर पेन, पेंटिग का सामान है जो बच्चों के द्वारा बनाया जाता है. अध्यक्ष को बच्चों के द्वारा बनाया गया बेहतर पेंटिग दिखाया गया. इस पर अध्यक्ष महोदया ने उसे फ्रेम करवाकर दिवाल पर लगाने का निदेष दिया. काउंसलर के द्वारा किताबे, कॉपी, कविता एवं बाल गीत की पुस्तके दिखायी गयी. आयोग के द्वारा सुझाव दिया गया कि जो भी पेंटिग्स बच्चों के द्वारा बनायी गयी है. उसे दिवाल पर लगाया जाये और जिन बच्चों ने अच्छे चित्र बनाये है.

उन्हें फ्रेम करवाकर दीवाल एवं सभी गृह के दीवारों में लगवाया जाए. इससे बच्चे प्रोत्साहित होंगे. आयोग के द्वारा कागजी जाँच भी गई जिसमें कि बाल गृह उपस्थिति पंजी, स्टॉक पंजी, स्टॉफ डिटेल का निरीक्षण किया गया, लगातार अपडेट करने को कहा गया. अध्यक्ष के द्वारा पर्यवेक्षण गृह, गया का निरीक्षण किया गया. निरीक्षण के समय गृह में 118 किशोर संसीमित है. अध्यक्ष के द्वारा गृह में बाल अधिकार आयोग के अध्यक्ष ने अधीक्षक को आदेश दिया राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग का बोर्ड लगाने का निदेश दिया तथा पोस्को एक्ट का बोर्ड लगाने का निदेश दिया गया.

गृह में बच्चे कितने दिन से सम्मिलित है उस बारे में पूछा गया. अधीक्षक ने बताया कि 30-40 बच्चे एक वर्ष से ऊपर रह रहे है. निरीक्षण के दौरान एक किशोर ने छत्तीसगढ़ का पता बताया तो अध्यक्ष महोदया ने कहा कि उसके माता पिता सूचना देने का स्पष्ट निदेश दिया गया. संसीमित भवन में यथाशीघ्र शिफ्ट करने का निदेश दिया गया तथा ऑफिस को छोटा कर किशोरों के रहने के लिए प्राप्त जगह उपलब्ध कराने हेतु निदेश दिया गया. गृह में 18 वर्श के कितने किशोर है. इसके बारे में पूछा गया तो अधीक्षक ने बताया कि 18 बच्चे 18 वर्ष से अधिक है तो इसपर तुरंत कार्रवाई करते हुए प्लेस ऑफ सेफ्टी में स्थानातंरण करने का निदेश दिया.

गृह में कितने स्टॉफ है सभी स्टॉफ से उनके कार्य के बारे में पूछा गया. शिक्षक को किशोर को नैतिक शिक्षा के बारे में बताने हेतु निदेश दिया गया. नये भवन कब से होगा इसके बारे पूछा गया तो अधीक्षक ने बताया कि नवम्बर 2016 में ही कर दिया गया. पर बिजली का कार्य अभी पूरा नहीं किया गया. इस पर अधीक्षक यथाशीघ्र नये भवन में स्थानातंरण करने हेतु निदेश दिया गया. जो किशोर ज्यादा समय से संसीमित है अब उनका केस यथाशीघ्र निष्पादन करने हेतु जे0जे0बी0, एस0जे0पी0यू0 तथा जिला पदाधिकारी के साथ बैठक करने तथा यथाशीघ्र निष्पाद करने हेतु निदेश दिया गया तथा संसीमित किशोरों में बड़े किशोरों द्वारा छोटे किषोरों के साथ अच्छा व्यवहार करने के साथ सभी स्टॉफ को इसे सुनिष्चित करने का निदेष दिया गया.

आयोग के अध्यक्षों एवं सदस्यों के द्वारा 4:30 बजे अपराह्नन विशिष्ट दत्तकग्रहण संस्थान का निरीक्षण किया गया. सर्वप्रथम गृह में आवासित नवजात शिशु को देखने गये. उसके बाद सभी बच्चों से मिले. उसको दी जाने वाली सुविधाओं के बारे में जानकारी दी गई. समन्वयक ने बताया कि अब तक कुल 28 बच्चे को दत्तकग्रहण में दिया गया जिसमें कुल 22 बच्चों को कानूनी रूप से पूर्ण दत्तकग्रहण में दिया गया. इनमें से तीन बच्चे विदेशों (दो इटली एक स्पेन) में गये तथा तीन बच्चे प्री-एडोपशन में गये. 0-6 वर्ष बच्चों के लिए पालना लगा हुआ था.

अध्यक्ष महोदया ने छोटे बच्चों का विशेष ध्यान दिये जाने पर जोर दिया. उन्हें विशेष देखभाल एवं पोशनमान का ध्यान देने को कहा गया. विशेष देखभाल वाले बच्चों को लगातार स्वास्थ्य जांच कराने का निदेश दिया गया. आयोग के अध्यक्षों/सदस्यों द्वारा सभी गृहों में आवासित बालक एवं बालिकाओं का स्वास्थ्य कार्ड एवं आधार कार्ड बनाये जाने का विशेष निदेश दिया गया. विशिष्ट दत्तकग्रहण के पश्चात लार्ड बु़द्वा, चिल्ड्रेन होम, शिलौंजा, बोधगया का निरीक्षण किया गया. जहां गृह के संचालन की व्यवस्था को देखकर अध्यक्ष एवं सदस्यों द्वारा काफी सराहना की गयी.

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