मांझी की दो टूक : नीतीश जी, बोधगया को स्थानीय से नहीं विदेशी मोनेस्ट्री से है खतरा

गया, पंकज कुमार/प्रदीप रंजन :  ‘हम’ पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष सह पूर्व मुख्यमंत्री जीतनराम मांझी ने आरोप लगाया है कि विश्व धरोहर घोषित महाबोधि मंदिर की सुरक्षा व्यवस्था के लिए स्थानीय दुकानदार और नागरिक कभी भी खतरा नहीं हो सकते हैं. उन्होंने कहा कि विदेशी मोनेस्ट्री से महाबोधि मंदिर की सुरक्षा व्यवस्था खतरा हो सकता है. मांझी आज गया में लाइव सिटीज से बात कर रहे थे.
पूर्व मुख्यमंत्री जीतनराम मांझी ने कहा कि तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी की हत्या के बाद हत्यारे बोधगया में एक विदेशी मोनेस्ट्री में 17 दिनों तक रुके थे. यह कटु सत्य है.

जीतनराम मांझी ने कहा कि एक तरफ स्थानीय दुकानदार और नागरिक बैंकों से लोन लेकर और सरकार को टैक्स देकर व्यवसाय कर रहे हैं. उन्होंने सवाल करते हुए कहा कि महाबोधि मंदिर के कारण स्थानीय दुकानदारों और नागरिकों को आर्थिक लाभ मिल रहा है. उनकी जीविका का एक बड़ा माध्यम महाबोधि मंदिर रहा है. ऐसे में कोई अपनी जीविका को दरकिनार कर कैसे मन्दिर की सुरक्षा व्यवस्था के लिए खतरा बन सकता है?

पूर्व मुख्यमंत्री जीतनराम मांझी ने आरोप लगाया कि काफी संख्या में विदेशी मोनेस्ट्री अपने यहां ठहरने वाले पर्यटकों के लिए अनिवार्य फार्म सी प्रशासन-पुलिस को उपलब्ध नहीं कराते हैं. उनसे दान में मोटी रकम लेकर महाबोधि मंदिर प्रबंधन कमेटी को आर्थिक क्षति पहुंचा रहे हैं. दूसरी ओर केन्द्र और राज्य सरकार से अनुदान और अन्य सुविधाएं विदेशी मोनेस्ट्री प्राप्त करने में सफल है.

पूर्व मुख्यमंत्री जीतनराम मांझी ने आरोप लगाया कि बोधगया के हालात के लिए राजनैतिक और प्रशासनिक चूक मुख्य कारण है. उन्होंने कहा कि बगैर किसी होमवर्क और वैकल्पिक व्यवस्था के मन्दिर सुरक्षा व्यवस्था के नाम पर नई ट्रैफिक नियम को सख्ती से लागू कर दिया गया. पूर्व मुख्यमंत्री जीतनराम मांझी ने कहा कि स्थानीय दुकानदारों और नागरिकों को जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों पर भरोसा नहीं रह गया है. गया : आरक्षण पर पूर्व सीएम मांझी का नया बयान, कहा- यहां भी तय हो कोटा

इसके पीछे दो दशक पूर्व ताराडीह के वाशिंदों को भगवानपुर स्थानांतरण किया गया था. लेकिन आज भी बड़ी संख्या में रहे ताराडीह के वाशिंदों को मकान और मुआवजा नहीं मिला है. यही हाल महाबोधि मंदिर परिसर के पास से हटाए गए दुकानदारों की है.  उन्होंने कहा कि जनप्रतिनिधि जनता के इच्छा के विरुद्ध नहीं जा सकते हैं. आज बोधगया में यही स्थिति है. बिहार में जनतांत्रिक सरकार है. जम्हूरियत में नागरिकों को अपनी आवाज बुलंद करने की आजादी है.

उन्होंने कहा कि मशाल जुलूस निकाल कर आन्दोलनकारीयों ने सरकारी काम में कैसे बाधा उत्पन्न किया?  मांझी ने सीएम नीतीश कुमार से अपील की है कि वे बोधगया के अन्तर्राष्ट्रीय महत्व को देखते हुए समस्या के समाधान के लिए पहल करें. स्वयं गया आकर या फिर पटना बुलाकर आन्दोलनकारीयों से बात करें. उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में तुगलकी फरमान जारी नहीं होता है. जनता सर्वोपरी है. यह सभी को याद रखना चाहिए.

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