नियोजित शिक्षकों के कार्यप्रणाली की होगी जांच, गार्जियन और सीनियर से लेंगे फीडबैक

गया (पंकज कुमार) : केन्द्र एवं राज्य सरकार ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा व्यवस्था में बदलाव लाने के लिए बड़ी राशि खर्च कर रही है. प्राथमिक से लेकर उच शिक्षा के लिए फैकल्टी की समस्या को देखते हुए नियोजित शिक्षकों को लगाया गया है. नियोजित शिक्षकों की कार्यप्रणाली को लेकर कई बार सवाल उठते रहा है. राज्य के कई जिलों में मैट्रिक एवं इन्टर के परीक्षा परिणाम सरकार के तय लक्ष्य के अनुरूप नहीं रहा. इसके पीछे बड़ी संख्या में शिक्षकों की योग्यता और क्षमता सवालों के घेरे में रहा है.

मगध प्रमंडल के आयुक्त जीतेन्द्र श्रीवास्तव ने मगध प्रमंडल के पांच जिलों के जिलाधिकारी और उप विकास आयुक्त को त्रिस्तरीय पंचायत के अन्तर्गत आने वाले शिक्षा संस्थानों में कार्यरत नियोजित शिक्षकों के बारे में बच्चों, अभिभावक और सीनियर से फीडबैक लेने को कहा है.
मगध प्रमंडल के आयुक्त जीतेन्द्र श्रीवास्तव ने बताया कि सरकार शिक्षा व्यवस्था पर बड़ी राशि खर्च कर रही है. मैट्रिक और इन्टर के परीक्षा परिणाम तय मानक के अनुरूप नहीं रहा है.

उन्होंने कहा कि इसके पीछे एक बड़ा कारण यह है कि शिक्षकों की योग्यता और उनके पढ़ाने की क्षमता सवालों के घेरे में है. बच्चे स्कूल नहीं जा रहे हैं. यदि जा रहें हैं तो उन्हें गुणवत्तापूर्ण शिक्षा नहीं दी जा रही है.
आयुक्त श्री श्रीवास्तव ने बताया कि गया, जहानाबाद, अरवल, औरंगाबाद और नवादा जिला के डीएम और डीडीसी को आदेश दिया गया है कि वे अपने जिले में कार्यरत नियोजित शिक्षकों की योग्यता और उनके पढ़ाने की क्षमता को लेकर फीडबैक प्राप्त करे.

आयुक्त जितेन्द्र श्रीवास्तव के जिलाधिकारी और डीडीसी को दिए गए आदेश में कहा गया है कि स्कूल में छात्रों की उपस्थिति की जांच कराएं
नियोजित शिक्षक किस विषय के हैं, उनका अपने विषय पर पकड़ कैसी है ? पढ़ाने का सामर्थ्य कैसा है? Teaching skills क्या है? बच्चों को उनके द्वारा किस हद तक अनुशासित किया गया है? बच्चों का outcome कैसा है?
आयुक्त जितेन्द्र श्रीवास्तव ने अपने आदेश में स्पष्ट लिखा है कि नियोजित शिक्षकों के बारे में अभिभावकों की राय क्या है? प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी और वरीय अधिकारियों की राय सम्बंधित नियोजित शिक्षकों के बारे में क्या है? इस सम्बन्ध में प्रतिवेदन प्राप्त करे.
आयुक्त जितेन्द्र श्रीवास्तव ने कहा कि डीएम और डीडीसी जहां कमी पाएं. वहां के नियोजित शिक्षकों के कार्य प्रणाली में सुधार के लिए आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित कराएं.

भाजपा के वरिष्ठ नेता, अखौरी निरंजन प्रसाद, बिहार विधान परिषद के पूर्व सदस्य अनुज कुमार सिंह, प्रदेश कार्यकारिणी के सदस्य अनिल स्वामी ने कहा है कि शिक्षा व्यवस्था में सुधार और बदलाव लाने के लिए केन्द्र एवं राज्य सरकार अरबों रुपए खर्च कर रही है. ऐसे में प्रमंडलीय आयुक्त जीतेन्द्र श्रीवास्तव की पहल से स्वागत योग्य कदम है.

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