गया पहुंची FSL की टीम ने लिया सैंपल, टाउन डीएसपी आलोक सिंह करेंगे रेप मामले की जांच

IG-patna
जोनल आईजी नैयर हसनैन खान

लाइव सिटीज, गया से पंकज कुमार : टाउन डीएसपी आलोक कुमार सिंह को आठ वर्षीय बच्ची के अपहरण के बाद दुष्कर्म और हत्या के मामले में नया अनुसंधानकर्ता बनाया गया है. वैज्ञानिक साक्ष्य एकत्रित करने के लिए पटना के विधि विज्ञान प्रयोगशाला से वैज्ञानिक टीम ने बुधवार की रात और गुरुवार को प्रर्दश के नमूने को जब्त किया है. गया पुलिस आरोपियों को सख्त सजा दिलाने के लिए अदालत में अभियोजन साक्ष्यों का बयान 164 के तहत दर्ज कराने की तैयारी में है.

गया के रामपुर थाना में 6 फरवरी को आरोपियों के खिलाफ भादवि की धारा 363, 364, 366A और पास्को एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया था. अनुसंधानकर्ता एसएचओ सुजय विद्यार्थी स्वयं बने. लेकिन अब टाउन डीएसपी आलोक कुमार सिंह को अनुसन्धान करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है.

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पटना प्रक्षेत्र के आईजी नैय्यर हसनैन खान ने पूछे जाने पर स्वीकार किया कि घटना काफी गंभीर है. उन्होंने कहा कि डीआईजी एवं एसएसपी को कहा गया है कि वे स्वयं अपने देखरेख में कांड का वैज्ञानिक आधार पर अनुसंधान कराएं. उन्होंने कहा कि डीजीपी पीके ठाकुर और अपराध अनुसंधान विभाग के एडीजी विनय कुमार के आदेश पर बुधवार को ही एफएसएल की टीम गया आकर प्रदर्श को जब्त करने में सफल हुए हैं. आईजी नैय्यर हसनैन खान के अनुसार आरोपी के नाखून, उंगली, मारुति कार एवं सम्बंधित स्थान से प्रदर्श एकत्रित करने में टीम सफल रहीं हैं.

आईजी ने कहा कि आरोपियों के खिलाफ अदालत में स्पीडी ट्रायल के लिए पुलिस प्रार्थना करेगी. उन्होंने कहा कि फोरेंसिक और पोस्टमार्टम रिपोर्ट अभियोजन को अदालत में आरोप प्रमाणित करने में अहम भूमिका निभाएगी. उन्होंने बताया कि आईओ किसी महिला डीएसपी को बनाने के लिए कहा गया है. महिला डीएसपी के न उपलब्ध रहने पर टाउन डीएसपी आलोक कुमार सिंह को आईओ का प्रभार लेने का आदेश दिया गया है

मालूम हो कि दुष्कर्म पीड़ित बच्ची का शव गया के अति सुरक्षित क्षेत्र जिलाधिकारी कोठी के पश्चिमी चारदिवारी से सटे झाडी में बुधवार सुबह मिला था. गया पुलिस अभी तक यह तय नहीं कर सकी है कि बच्ची के साथ दुष्कर्म की घटना हुई कहां है. बुधवार को एसएसपी आवास के आसपास नागरिकों ने रामपुर थाना पुलिस के खिलाफ मोर्चा खोल दिया. डीएम-एसएसपी उग्र भीड़ को शान्त कराने में असफल रहे. ऐसे में प्रमंडलीय आयुक्त जीतेन्द्र श्रीवास्तव और डीआईजी विनय कुमार को आगे आना पड़ा.

स्थानीय नागरिकों की मानें तो भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने लाठीचार्ज कर दिया. जिसके बाद भीड़ की ओर से रोड़ेबाजी शुरू हो गई. अति संवेदनशील गेवालबिगहा मुहल्ले के हिंदू और मुस्लिम समाज के सैकड़ों लोग अबोध बच्ची के साथ घटित घटना को लेकर एकजुट होकर सड़क पर उतर आए. वहीं कुछ ऐसे भी थे जिन्होंने मामले को बेवजह तूल देने की असफल कोशिश की.

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