मगध प्रमंडल : डिजिटाइजेशन में पूरे बिहार में अरवल और औरंगाबाद आगे, गया पीछे

लाइव सिटीज, गया से पंकज कुमार/प्रदीप रंजन की रिपोर्ट : राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग, बिहार के प्रधान सचिव विवेक सिंह की अध्यक्षता में मगध प्रमंडल के प्रमंडलीय सभा कक्ष में राजस्व से संबंधित मामलों की समीक्षा बैठक की गई. इस दौरान सर्वप्रथम जमाबंदी का डिजिटाइजेशन की समीक्षा की गई और इसमें पूरे बिहार में अरवल और औरंगाबाद जिला अव्वल पाया गया. गया जिला की स्थिति अच्छी नहीं पाई गई. प्रधान सचिव ने इसके लिए 31 मार्च 2018 तक की अंतिम तिथि निर्धारित की है.

उन्होंने कहा कि 31 मार्च तक जमाबंदी के सभी अभिलेख की ऑनलाइन एंट्री हो जानी चाहिए. क्योंकि मुख्यमंत्री द्वारा भी इसकी घोषणा विधानसभा में कर दी गई है. उन्होंने कहा कि वे सभी नौ प्रमंडल मे बैठक करने निकले हैं और इसकी शुरुआत मगध प्रमंडल से कर रहे हैं.

भू-अर्जन के तहत मुआवजा राशि के भुगतान से संबंधित लंबित मामलों की समीक्षा की गई. जिला भू-अर्जन पदाधिकारियों को लंबित बकाएदारों का भुगतान ग्रामीण क्षेत्रों में शिविर लगाकर पारदर्शी तरीके से करने का निर्देश दिया गया.

उन्होंने कहा कि अब दाखिल खारिज ऑनलाइन किया जाएगा. उन्होंने इसकी समीक्षा की, कि अभी तक कितने ऑनलाइन आवेदन प्राप्त हुए हैं और कितनों का निष्पादन किया गया है. इसके लिए सभी प्रकार के अभिलेख दुरुस्त कर लेने का निर्देश दिया गया.

कंपाइलेशन सीट को अद्यतन करने की समीक्षा की गई. कंपाइलेशन शीट के द्वारा पूर्व में निर्धारित लगान और वर्तमान दर पर निर्धारित व्यवसायिक लगान, रैयती और सैरात लगान का आकलन किया जाता है. इसके आधार पर रैयतों पर लगान निर्धारित किया जाता है. प्रधान सचिव ने कहा कि कंपाइलेशन सीट तैयार हो जाने के उपरांत औरंगाबाद में राजस्व की राशि को आठ गुणा बढ़ा दिया है. इसी प्रकार अन्य जिले भी कंपाइलेशन सीट अच्छी तरह से तैयार कर लें और सरकार के राजस्व में वृद्धि करें.

उन्होंने नीलाम पत्र वाद के मामलों की समीक्षा की और इसमें भी औरंगाबाद को सबसे अच्छा पाया गया, जहां 20 करोड़ रुपए की वसूली की गई है. अन्य जिलों की स्थिति कमोबेश एक समान पाई गई.

भूमि विवाद से संबंधित मामलों की समीक्षा के दौरान प्रधान सचिव ने कहा कि मुख्यमंत्री जब भी समीक्षा यात्रा पर निकलते हैं, तो सबसे ज्यादा मामले भूमि विवाद के ही आते हैं इसलिए अंचलाधिकारी और थाना अध्यक्ष कम से कम सप्ताह में एक बार बैठक कर भूमि विवाद से संबंधित मामलों का निष्पादन करें. जिलाधिकारी तथा वरीय पुलिस अधीक्षक को भी बैठक कर इन मामलों का निष्पादन कराने को कहा गया.

गरीबों को आवासीय जमीन उपलब्ध कराने हेतु बनाई गई भूमि क्रय नीति की समीक्षा की गई. उन्होंने कहा कि इस योजना में राशि की कोई कमी नहीं है. अपर समाहर्ता अंचलाधिकारी के माध्यम से जो भी राशि की मांग करेंगे. उन्हें राशि उपलब्ध करा दी जाएगी. जमीन मार्केट वैल्यू पर क्रय कर गरीबों को उपलब्ध करा सकते हैं.

उन्होंने अतिक्रमण के मामलों के संबंध में कहा कि जल निकायों का अतिक्रमण की शिकायत मिलती रहती है और अनेक अंचलों ने यह प्रतिवेदित किया है कि उनके यहां जल निकायों को अतिक्रमित नहीं किया गया है. उन्होंने पुनः इसकी समीक्षा करने का निर्देश दिया.

अंत में उन्होंने कहा कि भूमि सरकार के राजस्व के लिये सबसे बड़ी संपत्ति है. इसका समुचित रुप से प्रबंधन करना आवश्यक है और इसके लिए अभिलेख दुरुस्त करना अनिवार्य है. उन्होंने कहा कि अब ऑनलाइन लगान शुरू करने की योजना है और इसके लिए कंपाइलेशन शीट आवश्यक है.
उन्होंने सर जमीन सेवा के लिए कर्मचारी स्तर से प्रतिवेदन प्राप्त करने का निर्देश दिया. साथ ही कहा कि व्यक्ति/ कार्यालय के द्वारा कितने कार्यों का निष्पादन किया जाता है यह आवश्यक है न कि वह कितनी जानकारी रखता है.

भू अर्जन से संबंधित मामलों का भुगतान पारदर्शी तरीके से करने को कहा गया, ताकि किसी को शिकायत करने का मौका ना मिले. उन्होंने आयुक्त महोदय से भी किसी एक भू अर्जन कार्यालय का व्यापक जांच करा लेने का अनुरोध किया .

उन्होंने कहा कि राजस्व सरकार की प्राथमिकता सूची में है यदि निर्धारित समय के अंतर्गत डाटा डिजिटाइजेशन का कार्य नहीं किया जाएगा तो संबंधित अपर समाहर्ता, भूमि सुधार उपसमाहर्ता एवं अंचलाधिकारी के विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी.

उन्होंने समीक्षा के दौरान आयुक्त महोदय के द्वारा राजस्व के मामलों की नियमित समीक्षा करने और राजस्व की विशेष जानकारी रखने के लिए विभाग की ओर से धन्यवाद दिया. बैठक के अंत में आयुक्त महोदय द्वारा प्रधान सचिव को धन्यवाद ज्ञापन किया गया. उन्होंने कहा कि सरकार की बहुत सारी अपेक्षा है और हम सचिव महोदय के मार्गदर्शन के लिए उन्हें धन्यवाद देते हैं. मगध प्रमंडल से समीक्षा की शुरुआत करने के लिए भी उन्हें धन्यवाद दिया गया.

बैठक में नवादा के जिलाधिकारी कौशल कुमार, औरंगाबाद के जिलाधिकारी राजीव रंजन महिवाल, उप विकास आयुक्त राघवेंद्र सिंह, आयुक्त के सचिव अफजालुर रहमान, मगध प्रमंडल के सभी जिलों के अपर समाहर्त्ता, जिला भू-अर्जन पदाधिकारी एवं संबंधित पदाधिकारी उपस्थित थे.

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