‘मौत की चट्टान’ से मिलने लगी लोगों को मुक्ति

गया : पिछले दो महीनों से अधिक समय से मौत के साये में जी रहे सैकड़ों घरों के निवासियों को रविवार से ‘मौत की चट्टान’ से मुक्ति मिलनी शुरु हो गई. आपको बता दें कि सितम्बर महीने में लगातार भारी बारिश ने चट्टान की नींव को इस कदर हिला रखा था कि न केवल जिला प्रशासन के हाथ पांव फूल गए थे, बल्कि आम लोगों को भी आशियाना छिनने का खतरा मंडराने लगा था.

5 सितंबर को हुई भारी बारिश की वजह से ब्रह्मयोनि पहाड़ का एक बड़ा चट्टान बस्ती की ओर खिसक गया. वह कब बस्ती की तरफ लुढ़कता और कब लोगों की जान ले लेता यह कोई नहीं जानता था. रविवार को होने वाले ब्लास्टिंग के एक दिन पूर्व शनिवार को ही पूरे इलाके को खाली करा दिया गया था, क्यूंकि चट्टान इतना बड़ा था कि एक बार में ब्लास्ट कर तोड़ना खतरे से खाली नहीं था. यह वजह है कि चट्टान में 21 छेद किया गया जिसमें बारुद लगाया गया और 4 चरणों में इसे तोड़ा गया.

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सुरक्षा के दृष्टिकोण से चट्टान को लोहे की तार, ग्रिल और जालियों से कवर दिया गया था ताकि चट्टान के टुकड़े बस्ती की तरफ न आए. ब्लास्टिंग के दौरान मगध प्रमंडल के आयुक्त लियान कुंगा, डीएम कुमार रवि, एसएसपी गरिमा मल्लिक, सदर एसडीओ विकास कुमार जायसवाल सहित कई थानों की पुलिस मौके पर उपस्थित थी.

सीएमएफआरआई धनबाद के मुख्य वैज्ञानिक डॉ. सी स्वमलियाना के निर्देशन में पूरे विस्फोट की प्रक्रिया को अंजाम दिया गया. हालांकि चट्टान में ब्लास्ट किए जाने के बाद चट्टान के टुकड़े उसको कवर किए जालियों में फंस गया. अब दोबारा जालियों को साफ कराने के बाद फिर से ब्लास्टिंग की कार्रवाई की जाएगी.

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