मेडिकल कॉलेज में गोलमाल का भांडा फूटा, आयुक्त समेत कई अधिकारी जांच के घेरे में

गया (पंकज कुमार): जिन अधिकारियों पर नियम कानून के अनुपालन करने और कराने की जिम्मेवारी थी उसी पर नियम को नजरंदाज करने का आरोप लगे तो यह भ्रष्टाचार के किसी बढ़े खेल की ओर संकेत करता है. गया के अनुग्रह नारायण मगध मेडिकल कॉलेज में 62 पद के लिए विज्ञापन प्रकाशित किया गया था. अनियमितता का अंदेशा देखकर मेडिकल कॉलेज के सुपरइनटेनडेंट सुधीर कुमार सिन्हा ने बहाली बोर्ड से अपने को अलग कर लिया था.

इस बहाली में रिजर्वेशन के रोस्टर को भी नजरंदाज किया गया था. बगैर किसी सूचना के 62 के स्थान पर 84 लोगों को बहाल कर दिया गया था. आरोप लगने लगा कि भारी पैमाने पर पैसा और पैरवी का खेल हुआ है. तत्कालीन आयुक्त लियांग तुंगा ने सफल अभ्यर्थियों की सूचि पर दस्तखत किया था. ऐसे में आयुक्त की भूमिका भी संदेह के घेरे में आ गयी है.

आयुक्त जीतेन्द्र श्रीवास्तव ने पूछे जाने पर कहा कि बहाली में अनियामियतता की शिकायत की जांच करायी गयी. श्रीवास्तव के अनुसार रिजर्वेशन रोस्टर का अनुपालन न होना, विज्ञापन से अधिक अभ्यर्थियों को नियुक्त करने का आरोप है. साथ ही एक दिन में एक हजार के आस पास अभ्यर्थियों का इंटरव्यू ले लेना भी अपने आप में आश्चर्य से कम नहीं है. प्रमंडलीय आयुक्त श्रीवास्तव ने बताया कि मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य और अन्य से स्पष्टीकरण की मांग की गई है. जांच रिपोर्ट में बहाली को रद्द करने एवं दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करने की अनुशंसा की गयी है.

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