हज़रत सैयदना पीर मंसूर बाबा का वार्षिक उर्स मेला सम्पन्न

गया : शहर के प्रसिद्ध दरगाह हज़रत सैयदना पीर मंसूर बाबा का वार्षिक उर्स रविवार को हर्ष उल्लास के साथ मनाया गया. वार्षिक उर्स और पीर मंसूर दरगाह के प्रांगण में चलने वाले शौक्षणिक मदरसा जामिया बरकात ए मंसूर का आठवां दीक्षांत समारोह जशन दस्तार बन्दी बनाम बरकात ए मदीना कॉन्फ्रेंस में कई राज्यों के श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी. हज़रत पीर मंसूर बाबा के मज़ार पर चादर पोशी करने के लिये दूरदराज़ से भरी संख्या में अक़ीदतमन्द पहुंचे. रात्रि नौ 8:45 बजे हज़रत पीर मंसूर बाबा के मज़ार पर चादरपोशी एवं गुलपोशी और दुआ की गई. चादर पोशी और फातेहा पढ़ने का सिलसिला देर रात तक चलता रहा. उर्स में सभी धर्मों के श्रद्धालु आकर बाबा के आस्ताने पर मन्नतें और दुआएं मांगीं. उर्स एवं कॉन्फ्रेंस जामिया बरकात ए मंसूर पीर मंसूर के संस्थापक एवं संयोजक हज़रत मौलाना सैयद इक़बाल अहमद हसनी बरकाती की अध्यक्षता में संपन्न हुआ. उर्स का आगाज़ रविवार की सुबह पवित्र कुरआन के पाठ से हुआ जो दिन भर चला. उर्स एवं कॉन्फ्रेंस के अवसर पर मज़ार और आस पास आकर्षक ढंग से सजाया—संवारा गया था.
उर्स के अवसर पर मदरसा जामिया बरकाते मंसूर की ओर से होने वाले दीक्षांत समारोह में यूपी, छतीसगढ़, बिहार, झारखण्ड आदि स्थानों से इस्लामी विद्वान और नामचीन वक़्ता शिरकत किया, कॉन्फ्रेंस में यूपी के हरदोई के सूफी हज़रत सैयद आले रसूल उर्फ ताहिर मियां भी शामिल हुए.
कॉन्फ्रेंस से सूफी हज़रत ताहिर मियां ने कहा कि शिक्षित समाज ही देश को उन्नति प्रदान करता है. उन्होंने कहा कि दुनिया मे सुफीवाद से अमन और शांति पहले भी फैली थी और आज भी सूफी अमन व शांति फैलाने में सक्षम है. सूफीवाद मुहब्बत, भाईचारा और प्यार को बढ़ाते हुए सही मार्ग दिखाता है.
उन्होंने इस अवसर पर कहा कि इस्लाम में दहशतगर्दी और दहशतगर्दों के लिए कोई जगह नहीं है. इस अवसर मौलाना हाशिम रज़ा कानपुर उत्तर प्रदेश ने कॉन्फ्रेंस से सम्बोधित करते हुए कहा कि हज़रत पीर मंसूर का आस्ताना आपसी भाईचारा और सौहार्द्र की अच्छी मिसाल है.
इस अवसर पर मौलाना तन्विरुल क़ादरी— फिरोजाबाद यूपी, मौलाना हाशिम— छत्तीसगढ़, मौलाना मुफ़्ती मोज़फ्फर हुसैन रिज़वी — फतेहपुर, मौलाना अकील अहमद— अकोला महाराष्ट्र, सूफी हज़रत सिराजुद्दीन अयूबी आदि ने भाषण दिया. नाद शरीफ देश के मशहूर इस्लामिक कवि शकील रहबर— चैनपूरी भभुआ, सैयद अज़ीम नूरी, कारी ज़फ़र आकिल—हज़ारीबाग झारखण्ड ने पेश किया. मंच का संचालन हशमत साहिल—बोकारो झारखण्ड ने किया. उर्स एवंं कॉन्फ्रेंस को कामयाब बनाने में मौलाना तबारक हुसैन रिज़वी, कारी राहतुल्लाह, मौलाना अब्दुल वकील साबरी, कारी इजाज, मास्टर बशीरुद्दीन, सरताज अहमद, मुन्ना और पीरमंसूर दुकानदार आदि ने बढ़—चढ़ कर हिस्सा लिया.
इस अवसर पर पीरमंसूर वक़्फ़ कमेटी के सचिव असरार आलम, मौलाना शब्बीर अशरफी, मौलाना इलमुल होदा, मास्टर मंसूर आजिज़ी,शकील अहमद, मौलाना अकील अहमद, शहज़ाद आलम कलकत्ता, शमीम अहमद, हलीम खान आदि उपस्थित थे. गौरतलब है कि हज़रत पीरमंसूर उर्स के अवसर पर पहली चादर रजिस्ट्री ऑफिस और वक़्फ़ कमेटी हज़रत पीरमंसूर, जामिया बरकाते मंसूर की ओर से चढाई गई थी.
चादरपोशी के वक़्त वक़्फ़ पीर मंसूर कमेटी के सचिव असरार आलम एवं कमेटी अन्य सदस्य उपस्थित थे. चादर पोशी के बाद मौलाना इक़बाल अहमद हसनी ने देश, राज्य की उन्नति, विकास और भाईचारा की दुआ की. दीक्षांत समारोह में मदरसा से पढ़ने वाले नौ हाफिज एवं नौ कारी के सिर   पर दस्तार बांधी गई और सर्टिफिकेट दिया गया.

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