बधाई हो, बिहारियों ने Jio फ़ोन में व्हाट्सएप चला दिया है, अमेरिका तक मचा है हंगामा

लाइव सिटीज, सेंट्रल डेस्क : बीते साल देश के मार्केट में आये रिलायंस के जियो फोन ने टेलिकॉम सेक्टर में खलबली मचा दी थी. मात्र 1499 रूपये में आये इस स्मार्टफोन से फ्री कालिंग और ‘अनलिमिटेड इंटरनेट ब्राउज़िंग’ की सुविधा ने लोगों को इस फोन को लेने के लिए जबरदस्त तौर पर आकर्षित किया. हालांकि इस जियो फोन में एक सबसे बड़ी प्रॉब्लम सामने आई कि इसमें व्हाट्सएप नहीं चला सकते थे. लेकिन भारत की जुगाडू जनता ने आखिर इसका हल भी खोज निकाला.

यह जानना और भी दिलचस्प है कि इस जुगाड़ टेक्नोलॉजी को सबसे ज्यादा फायदा अपने बिहारी भाइयों ने ही उठाया है. बिहार के लोगों ने इंटरनेट से ही ऐसी तकनीक खोजी कि जियो फोन में भी व्हाट्सएप चलने लगा. बात इतनी बढ़ी कि हंगामा अमेरिका तक जा पहुंचा.

ऐसे हुआ ये कमाल

बताया जा रहा है कि जियो फोन में व्हाट्सएप चलाने की टेक्नोलॉजी एक वेब सर्विस, जिसका नाम ‘ब्राउज़रलिंग’ है, से मिली. दरअसल यह एक टेस्टिंग प्लेटफॉर्म है, जिसे अलग-अलग ब्राउज़र्स पर टेस्ट के लिए डाला गया था. इसी वेब सर्विस से बिहार के लोगों ने जियो के बेसिक फोन पर भी व्हॉट्सएप चला लिया. हालांकि अभी यह मामला टेस्ट मोड में ही है.

क्या है ‘ब्राउज़रलिंग’

अमेरिका के एक सॉफ्टवेयर डेवलपर पीटर क्रुमिंस ने इस टेस्टिंग प्लेटफार्म को बनाया है. हाल में अचानक से उनकी वेबसाइट पर ट्रैफिक बढ़ गया. एकदम से बढ़े इस वेब ट्रैफिक से पहले तो क्रुमिंस डर गए. उन्हें लगा कि इंडिया से कोई साइबर अटैक हुआ है. बाद में जांच करने पर राज़ खुला कि इंडिया से भारी संख्या में लोग ‘ब्राउज़रलिंग’ को व्हॉट्सएप चलाने के लिए इस्तेमाल कर रहे हैं. पता यह भी चला कि इन लोगों में ज़्यादातर लोग बिहार से थे.

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बिहारियों को इस तरह मिला ब्राउज़रलिंग

मालूम हो कि पिछले साल नवंबर में जियो फोन लांच होने के बाद यूट्यूब पर ऐसे वीडियोज की बाढ़ आ गई थी जिनमें जियो फोन पर व्हॉट्सएप चलाने के तरीके बताए गए थे. हालांकि इनमें से ज़्यादातर फ़र्ज़ी थे. इन्हीं में से एक वीडियो में क्रुमिंस की वेबसाइट का ज़िक्र था. इस वीडियो में बताया गया था कि कैसे ‘ब्राउज़रलिंग’ जियो फोन में खोलकर मिलने वाले QR कोड को स्मार्ट फोन से स्कैन करके जियो फोन में व्हॉट्सएप चलाया जा सकता है. ये व्हॉट्सएप वेब का ही जियो संस्करण था.

ये वीडियो बहुत वायरल हुआ. 20 लाख से ज़्यादा लोगों ने देखा इसे. इसी के बाद क्रुमिंस की वेबसाइट पर ट्रैफिक की बाढ़ आ गई. साइबर अटैक की आशंका से डरे क्रुमिंस ने इंडिया के आईपी एड्रेस से आने वाले हर यूज़र को ब्लॉक करना शुरु किया.

पता चला है कि अब क्रुमिंस ने अपनी वेबसाइट की सेवाओं के लिए फीस रख दी है. लेकिन बहुत कम लोग पैसे देकर सेवाएं ले रहे हैं. यूज़र्स का बड़ा हिस्सा अभी ब्राउज़रलिंग को फ्री में ही इस्तेमाल कर रहा है. क्रुमिंस की वेबसाइट पर आने वाले ट्रैफिक में 60% ट्रैफिक भारत से है. ये लगभग सारा बिहार से है. एक बार फिर से साबित हो गया कि जुगाड़ वाली हर चीज़ भारतीयों को आकर्षित करती ही है.

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