क्या आप जानते हैं किसने बनाया whatsapp का लोगो, जानें इसकी पूरी हिस्ट्री?

लाइव सिटिज डेस्क : आजकल लोग सोशल मीडिया पर बहुज ज्यादा एक्टिव रहने लगे हैं. चाहे वो बूढ़े हो या फिर जवान, हर उम्र के लोग सोशल नेटवर्किंग साइट्स का मजा ले रहा है. व्हाट्सएप, सोशल नेटवर्किंग का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुका है. अगर आपने कभी ध्‍यान दिया हो तो व्हाट्सएप ने कभी भी अपनी एप्लीकेशन का प्रमोशन या मार्केटिंग नहीं की है इसके बावजूद यह पाँचवी ऐसी एप्लीकेशन है जिसे सबसे अधिक डाउनलोड किया जाता है.

व्हाट्सएप ने इतने कम समय में जितनी तरक्की की हैं उतनी आजतक और किसी भी कंपनी ने नही की. इस एप के एक महीने में एक्टिव यूज़र्स 100 करोड़ से ज्यादा और इसका उपयोग करते हुए कोई भी विज्ञापन नहीं दिखाया जाता जिससे इसको प्रयोग करना और भी आसान हो जाता है.

व्हाट्सएप की हुई शुरुआत

ब्रायन एक्टन और जॉन कॉम दोनों ने साल 2009 में व्हाट्सएप एप्लीकेशन शुरू की थी ये दोनों पहले yahoo में साथ काम कर चुके थे. नौकरी छोड़ने के बाद, ब्रायन एक्टन और जान कॉम दोनों सैर पर निकल गये और साथ ही इन दोनों ने फेसबुक में नौकरी के लिए आवेदन किया जिसे फेसबुक ने रिजेक्ट कर दिया.

जनवरी 2009 में कॉम ने एक iPhone खरीदा,और कुछ समय बाद उसको यह अहसास हुआ कि आने वाले समय में एप्लीकेशन का उपयोग बहुत बढ़ जायेगा फिर काँम ने एक ऐसा एप्लीकेशन बनाने का विचार किया जो मोबाइल उपयोगकर्ताओं को बेहतर ढंग से बातचीत करने और अपने दोस्तों,परिवार और व्यावसायिक संपर्कों के साथ जुड़ने में सहायक हो.

कॉम ने ब्रायन एक्टन के साथ तालमेल करते हुए yahoo से पांच सहयोगियों को अपने साथ जोड़ने में कामयाब रहे फिर उन्होंने अपने रूसी दोस्त एलेक्स फिशमैन की मदद से एक रूसी डेवलपर को ढूढा जिसका नाम इगोर सोलो मनिकोव था इसके बाद उन्होंने एक एप्लीकेशन बनाई, जान कॉम ने इस एप्लीकेशन का नाम रोजाना प्रयोग किये जाने वाले शब्द “what’s up” के ऊपर whatsApp रखा.

व्हाट्सएप के लिए यह एक बड़ी शुरुआत थी, हालांकि कई असफलताओं से परेशान होकर कॉम ने सोचा कि ये एप्लीकेशन नहीं चल पायेगी और उन्हें इसे बनाने का विचार छोड़ देना चाहिए,लेकिन ब्रायन ने कॉम प्रोत्साहित किया और फिर से प्रयास करने को कहा, जिससे कि काँम ने फिर से इस एप्लीकेशन पर काम शुरू किया और उन्होंने इस एप्लीकेशन में कुछ बदलाव किये जैसे कि जब कोई एप्लीकेशन यूजर अपना स्टेटस बदलेगा तो उस यूजर के हर एक कांटेक्ट को इसके बारे में नोटिफिकेशन मिल जाएगी.

इसके बाद अक्टूबर 2009 में ब्रायन ने इसमें $ 250,000 का निवेश किया और आधिकारिक तौर पर इसमें शामिल हो गए. फरवरी 2013 तक व्हाट्सएप को 200 मिलियन लोग उपयोग कर रहे थे और उस वक्त व्हाट्सएप में सिर्फ 50 कर्मचारी काम करते थे, इसके तुरंत बाद, इस ऐप को फेसबुक द्वारा $19 बिलियन में खरीद लिया गया और यह उस वक्त की दुनिया में सबसे बड़ी डील थी. कंपनी के ब्लॉग के अनुसार व्हाट्सएप रोजाना 100 मिलियन से अधिक वॉयस कॉल लॉग करता है.

• व्हाट्सएप LOGO का इतिहास ऐसा लगता है कि यह लोगो व्हाट्सएप ऐप के विकास और लॉन्च के शुरुआत में कोम और एक्टन द्वारा डिजाइन किया गया था. बेशक लोगों के डिज़ाइन के लिए किसी थर्ड डिजाइनर को आउटसोर्स किया जा सकता था.

• व्हाट्सएप लोगो के डिजाइन एलिमेंट और उसकी लोकप्रियता व्हाट्सएप क्‍विक मैसेज और ऑडियो/वीडियो कॉल दोनों के रूप में काम करता है और व्हाट्सएप के लोगो को डिजाइन करने के लिए दो अलग-अलग एलिमेंट का उपयोग किया गया था. इनमें पहला टेक्स्ट बबल और दूसरा टेलीफ़ोन है. आज भी, प्राप्त किए गए प्रत्येक टेक्‍स्‍ट संदेश को टेक्स्ट बबल में दिखाता है. प्राप्त संदेशों में टेक्स्ट बबल के बाईं ओर इशारा करते हुए “पूंछ” होती है, जबकि भेजे गए संदेशों में टेक्स्ट बबल के दाईं एक पूछ होती है. अपने लोगो में बाएं तरफ पूंछ के साथ एक टेक्स्ट बबल को शामिल करके, व्हाट्सएप यह बताने में सक्षम है कि यह एक मैसेजिंग ऐप हैं व्हाट्सएप लोगो के डिजाइनर ने टेक्स्ट बबल के भीतर एक टेलीफोन रखा है.

एक दिलचस्प बात यह है कि व्हाट्सएप एक ऐसा ऐप है जो लेटेस्‍ट मोबाइल फोन के लिए डिजाइन किया गया था, ऐप के लोगो को अगर ध्‍यान से देखें तो इसके अंदर वाले हिस्‍से में एक पुराना, लैंडलाइन फोन है. चूंकि स्मार्टफोन के विपरीत जिसमें सैकड़ों फ़ंक्शन हैं ,लैंडलाइन फोन का एकमात्र उद्देश्य कॉल करना है. व्हाट्सएप लोगो में लैंडलाइन फोन ऐप के फ़ंक्शन को अधिक प्रभावी ढंग से कम्यूनिकेट करता है.

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