नहाय-खाय के साथ लोकआस्था का महापर्व आज से शुरू

अलीगंज/जमुई : मंगलवार से चार दिवसीय चलने वाला लोक आस्था व विश्वास का महापर्व बड़े ही हर्षोउल्लास के साथ शुरू हुआ. छठव्रती आज से गंगा स्नान कर कद्दू-भात का भोग लगाकर व्रत की शुरूआत कर देते हैं. ग्रामीण क्षेत्रों में लोग इसे नहाय खाय कहते हैं.

इसके दूसरे दिन व्रती दिन भर उपवास रखकर शाम में दूध-भात व अरवा चावल का प्रसाद तैयार कर बड़े ही नियम, निष्ठा,श्रद्धा व शुद्धता के साथ भोग लगाते हैं. जिसे खरना का प्रसाद कहा जाता है. खरना के प्रसाद को खाने व खिलाने का भी अपना महत्व होता है. इसका दौर देर रात तक चलता रहता है. तीसरे दिन संध्या डूबते सूरज को अर्घ्य व चौथे दिन उगते सूरज को अर्घ्य देकर व्रती द्वारा पारण किया जाता है.

हिन्दूओं का यह पर्व बड़े लोक आस्था व विश्वास का महापर्व है जिसे लोग नियमों का अक्षरश: पालन कर मनाते हैं. लोग इस पर्व की तैयारियों में महिनों पूर्व से ही जुट जाते हैं. छठ पर्व के मौके पर देश—विदेश में रहने वाले संबंधी भी अपने घर आ जाते हैं और पर्व में अपनी सहभागिता देते हैं.

यूं तो समूचे भारत में इस त्योहार को किसी न किसी रूप में मनाया जाता है. लेकिन बिहार, झारखंड और उत्तर प्रदेश में इस पर्व का खास महत्व है. बिहार में तो प्रशासनिक अमला व स्वयंसेवी संस्थाओं के साथ साथ लोग एक माह पहले से ही इस पर्व की प्लैनिंग व गलियों की साफ सफाई में लग जाते हैं. घाटों पर बड़े ही आकर्षक ढंग से रौशनी की व्यवस्था पूजा समिति के द्वारा की जाती है.

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