ड्यूटी पर तैनात थे नाइट गार्ड, धारदार हथियार से अपराधियों ने गला रेत कर दी हत्या

जमुई: सिकंदरा थानाक्षेत्र के लछुआड़ स्थित दुधपनिया जंगल से बड़ी खबर है. सोमवार की देर रात कुंडग्राम स्थित एक निजी कंस्ट्रक्शन कंपनी विजेता के साईट पर कंपनी के ड्युटी करते दो नाईट गार्ड की हत्या कर दी गई है. घटना के वक्त मौके पर मौजूद तीसरा नाईट गार्ड खुबलाल इसे नक्सली कार्रवाई बता रहा है. वहीं स्थानीय लोगों द्वारा आशंका जताई जा रही है कि पुरानी रंजिश में अपराधियों ने उक्त दोनों नाईट सुरक्षा गार्डों की हत्या की है.

हालांकि हत्या की स्टाईल देखकर दबी जुबान से इसे माओवादियों की कार्रवाई भी माना जा रहा है. पर  घटना के लगभग 15 घंटे बीत जाने के बावजूद माओवादियों की ओर से किसी भी तरह जिम्मेवारी नहीं ली गई है, ना ही घटनास्थल पर कोई पर्चा ही छोड़ा गया है. कंशट्रशन कंपनी के साईट पर पूछने पर कंपनी के मैनेजर ने बताया कि लेवी व रंगदारी जैसी कोई भी डिमांड की बात अब तक नहीं आई थी.

हालांकि पुलिस अधीक्षक जयंतकांत ने दोनों आशंकाओं से इनकार नहीं करते हुए जांच की बात कही है. मामले में धावाटांड़ के ही एक अन्य सुरक्षा गार्ड खुबलाल कोड़ा को पूछताछ के लिए हिरासत में लिया गया है.

सिकंदरा थानाक्षेत्र के मथुरापुर पंचायत के धावाटांड निवासी सहदेव राय व गांगुली कोड़ा की देर रात तेज धारदार हथियार से हत्या कर दी गई. जबकि एक गार्ड जान बचाकर भागने में सफल रहा. मृतक दोनों युवक भी बेगूसराय के बिहट की विजेता कंपनी में गार्ड की नौकरी करते थे. उक्त कंपनी लछुआड स्थित दुगर्म समझे जाने वाले कुंड घाट पर जलाशय योजना का कार्य कर रही थी. खुबलाल कोड़ा के मुताबिक सोमवार की रात लगभग नौ बजे नक्सलियों ने कंपनी के कुंड घाट स्थित प्लांट पर धावा बोल दिया और प्लांट पर ड्युटी कर रहे तीन में से दो लोगों सहदेव राय व गांगुली कोड़ा को पकडकर दो किलोमीटर जंगल के भीतर ले गए और धारदार हथियार से गला रेत कर उनकी हत्या कर दी.

वहीँ स्थानीय लोग खुबलाल के इस बयान को खारिज कर इसे डेढ दो वर्ष पुरानी एक अपराधिक घटना से जोड़कर देख रहे हैं. जिसमें हत्या के बाद दो माह पूर्व गांगुली कोड़ा जेल से बाहर आया था. ग्रामीणों का यह भी कहना है कि पिछले डेढ़ दो वर्षों से इस क्षेत्र में कोई भी नक्सली गतिविधी नहीं देखी गई है. वे यह भी कहते हैं कि माओवादियों द्वारा कंपनी से कोई डिमांड भी नहीं की गई थी. जो वे अचानक इस तरह की विभत्स घटना को अंजाम दें.

साथ ही घटना के बाद किसी तरह का पर्चा वगैरह का न छोड़ा जाना भी संदेह पैदा करता है. फिलहाल अहिंसा की राह का संदेश देने वाले भगवान महावीर की जन्मभूमी रक्त रंजित हो चुकी है और आस-पास के क्षेत्रों के ग्रामीण डरे सहमे और भयभीत हैं. दो परिवारों की जिन्दगी तबाह हो चुकी है.

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