जमुई बरनार जलाशय योजना : आधी हकीकत आधा फसाना, कूदे अब राजद एमएलसी संजय प्रसाद

जमुई, ( राजेश कुमार ): विवादों से लबालब भरा जलाशय बरनार अब सिर्फ जलाशय परियोजना तक सीमित नहीं है. लगभग चार दशकों से सियासत की मार झेल रहा यह जलाशय परियोजना अब चुनावी समर में नैया पार लगाने की तलैया भर बन कर रह गया है. बस … अबकी बार बेड़ा पार है के जुमले को झेलती सरकार की यह अतिमहत्वाकांक्षी जलाशय परियोजना की हकीकत यह है कि लगभग 45 साल बीत गए और अबतक इसके लिए आवश्यक भूमी का अधिग्रहण तक नहीं हो पाया है. चुनाव नजदीक आते ही इस परियोजना पर सियासत तेज हो जाती है जिसकी बानगी चुनाव दर चुनाव दिखती  है और चुनाव उपरांत यह परियोजना ठंढे बस्ते में चला जाता है.

बीते लोकसभा चुनाव के दौरान भी बरनार जलाशय इस क्षेत्र के लिए अहम मुद्दा रहा जिस पर राजनीति ने कई कसीदे गढ़े. हमने किया, हमने किया की लड़ाई यहां तक पहुंच गयी की आगामी विधानसभा चुनाव में देख लेने की बातें तक हो गई. नेताओं के तरक्क़ी का बैतरनी बन चुका बरनार जलाशय परियोजना इन दिनों फिर से सुर्खियों में है.

बात चल रही थी इस योजना के कार्य प्रगति की लेकिन स्थित आधी हकीकत आधा फसाना सी है. जमुई के बरनार जलाशय परियोजना की ताजा स्थिति को भी जान लीजिए. यह जानकारी राजद एमएलसी संजय प्रसाद द्वारा बीते दिनों विधान परिषद् में बरनार जलाशय पर पुछे गए सवाल के बाद सामने आई है.

667.76 एकड़ भूमि का अधिग्रहण अभी बाकी

सरकार ने जो जवाब दिया है वो चौंकाने वाले हैं जिसके अनुसार 2015 में 468 एकड़ जमीन वन विभाग को हस्तांतरण के बाद वन विभाग को इस जलाशय के लिए अबतक और कोई जमीन हस्तांतरित नहीं हो सका है. राजद एमएलसी ने विधान परिषद में बरनार परियोजना को लेकर सवाल किया था. इसी दौरान सरकार की ओर से यह जवाब आया कि बरनार जलाशय योजना के लिए कुल 1135. 87 एकड़ वन भूमि का अधिग्रहण किया जाना था जिसमें 667.76 एकड़ भूमि का अधिग्रहण अभी बाकी है.

44 साल बाद भी अधर में है योजना

आपको बता दें कि जमुई के सोनो प्रखंड मुख्यालय से 19 किलोमीटर दूर स्थित बरनार जलाशय परियोजना 44 साल बाद भी अधर में है. हाल में जनप्रतिनिधियों एवं अधिकारियों ने परियोजना को लेकर सक्रियता दिखाई, जिससे लोगों को लगा की अब इस परियोजना के दिन बहुरने वाले हैं. क्षेत्र में सिंचाई, बिजली आदि की समस्या दूर होगी. घोषणा की गई की बरनार को लेकर सारी बाधाओं को दूर कर लिया गया है. इस परियोजना में सबसे बड़ी बाधा भूमि अधिग्रहण को दूर कर लिया गया है. अब तेजी से बरनार परियोजना के निर्माण की दिशा में कार्य होगा पर हकीकत है की बरनार जलाशय के लिए भूमि अधिग्रहण का काम पूरा नहीं हुआ है.

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राजनीति, क्राइम और खेलकूद....

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