जमुई की विलुप्त होती गिद्धौर संस्कृति का लौट आया पुराना रंग, पूर्व केंद्रीय मंत्री दिग्विजय सिंह ने दिया था सहारा

लाइव सिटीज, जमुई/राजेश : विलुप्त होती गिद्धौर की सांस्कृतिक विरासत को एक बार फिर से सहारा मिल गया है. पूर्व केन्द्रीय मंत्री स्व. दिग्विजय सिंह के निधन के उपरांत वर्षों तक यह कहा जाता रहा था कि जमुई के गिद्धौर में अब गीत-संगीत की वैसी सांस्कृतिक बहार शायद ही दोबारा दिख पाए. लेकिन 2018 से संगीत के उसी तरंग की शुरूआत गिद्धौर में फिर से हो चुकी है.

बिहार सरकार के पूर्व मंत्री दामोदर रावत व जिला प्रशासन ने गिद्धौर के सांस्कृतिक विरासत को काफी जद्दोजहद के बाद दोबारा पटरी पर लाने का काम किया है. गिद्धौर की फिजाओं में एक बार फिर से गीत और संगीत की बहार लौट आई है.

पूर्व केंद्रीय मंत्री दिग्विजय सिंह ने दिया था सहारा

कई राष्ट्रीय व अंतर्राष्ट्रीय कलाकार दुर्गा पूजा के अवसर पर होने वाले गिद्धौर महोत्सव में शिरकत करने पहुंचे हैं. राजा-रजवाड़ों के काल के बाद विलुप्त हो चुके गिद्धौर के इस सांस्कृतिक विरासत को इसके पहले पूर्व केंद्रीय मंत्री दिग्विजय सिंह ने सहारा दिया था. राजतंत्र समाप्त होने के काफी बाद तक गिद्धौर के दुर्गा मेले की तुलना कोलकाता के काली मेले से की जाती रही. लेकिन इसके बाद आयोजन पर ग्रहण लगने के कारण सांस्कृतिक विरासत की पतवार को पूर्व केन्द्रीय मंत्री दिग्विजय सिंह ने थाम ली थी.

दिग्विजय सिंह ने इस आयोजन को भव्यता प्रदान की थी

बता दें कि दिग्विजय सिंह ने इस आयोजन को भव्यता प्रदान की थी. कार्यक्रमों की भव्यता का अंंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि तब तीन दिवसीय सांस्कृतिक महोत्सव का भारतीय संस्कृति परिषद के सौजन्य से भारत के साथ-साथ दुनिया भर के 40 अन्य देशों में  सीधा प्रसारण हुआ करता था. पूर्व केंद्रीय मंत्री दिग्विजय सिंह के असामयिक निधन के बाद गिद्धौर की परवान चढ़ती यह सांस्कृतिक विरासत भी गुमनामी की ओर अग्रसर हो गई थी. बीते वर्ष बिहार सरकार ने गिद्धौर की सांस्कृतिक विरासत को बचाने के लिए इसे राजकीय महोत्सव का दर्जा दिया तो एक बार फिर से जमुई के लोगों की उम्मीदें जगी.

इस वर्ष  दो दिवसीय  गिद्धौर सांस्कृतिक महोत्सव में  देश के नामचीन कलाकारों  की  मौजूदगी  ने लोगों को यह कहने के लिए विवश कर दिया कि विलुप्त होती गिद्धौर की सांस्कृतिक विरासत फिर से सजीव हो उठी है. सांस्कृतिक विरासत को बचाने की कवायद तथा महोत्सव  को पुनर्जीवित  करने में पूर्व मंत्री दामोदर रावत की भूमिका सराहनीय रही. इसमें बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार तथा कला संस्कृति एवं युवा विभाग ने पूर्व मंत्री दामोदर रावत की पहल पर विशेष दिलचस्पी दिखाई. जमुई के डीएम धर्मेन्द्र कुमार ने भी इस बात को कबूूूूलते हुए कहा कि यह महोत्सव गिद्धौर की सांस्कृतिक विरासत को जीवंत बनाए रखने में मील का पत्थर साबित होगा. डीएम ने कहा कि उन्हें खुशी है कि इसकी शुरुआत उनके ही कार्यकाल में हुई. गिद्धौर सांस्कृतिक विरासत के पुनर्जीवन का श्रेय पूर्व मंत्री दामोदर रावत एवं बिहार सरकार को जाता है.

 

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