जमुई: केडिया के बाद अब जिले के 10 अन्य गांव भी होंगे रोग मुक्त, जैविक खेती का प्रशिक्षण शुरू

जमुई (राजेश कुमार): जैविक ग्राम केडिया में चलाए गए “मिट्टी संरक्षण से जीवन संरक्षण” के प्रयोगों से मिलने वाले लाभों को जिले के अन्य किसानों और गांवों तक पहुंचाने के उद्देश्य से “जैविक खेती का प्रशिक्षण” अभियान शुरू किया गया है. इसके तहत जिले के 10 ऐसे गांवों में एक दिवसीय प्रशिक्षण की योजना है जहां सब्जी का उत्पादन अधिक होता है. प्रशिक्षण के पहले चरण में बीते दिनों धरमपुर गांव में जीवित माटी किसान समिति एवं ग्रीनपीस से जुड़े प्रशिक्षणकर्ता संतोष कुमार सुमन ने किसानों को अमृत पानी, नीमामृत, बीजामृत, जीवामृत, सतपर्णी दवाई को बनाने और इस्तेमाल करने की विधियां विस्तार से बताई.

स्थानीय आयोजक समग्र सेवा, जमुई के शशि कुमार ने जैविक खेती से मिलने वाले लाभों पर चर्चा की. प्रशिक्षणकर्ता संतोष सुमन ने बताया कि वर्तमान समय में सब्जी की खेती में जहरीले कीटनाशकों का उपयोग अधिक होता है. इसके अलावा ज्यादातर सब्जियां ताजी ही खाई जाती हैं, इसलिए इनपर मौजूद कीटनाशक रूपी जहर अधिक मात्रा में रसोई और थाली तक पहुंच सकता है. उन्होंने कहा कि बाजार में बिकने वाली सब्जियों में मौजूद कीटनाशक की मात्रा की जांच की किसी प्रक्रिया के अभाव में लोग यह भी नहीं जान पाते कि उनकी थाली में जहर की कितनी मात्रा मौजूद है.

प्रशिक्षणकर्ता ने बताया कि यह भी देखा गया है कि जहरमुक्त जैविक खेती सब्जी उत्पादन के लिए विशेष फायदेमंद साबित होती है. इससे किसानों की लागत घटने के साथसाथ उत्पादन, स्वाद और गुणवत्ता में वृद्धि होती है. संतोष ने बताया कि इन्हीं वजहों से ‘जैविक खेती अभियान, जमुई’ के बैनर तले शुरू हुए इस अभियान के पहले चरण में 10 सब्जी उत्पादक गांवों का चयन किया गया है. इस अभियान का शुभारंभ बीते दिनों खैरा प्रखंड के धरमपुर गांव में हुई. गांव के 50 से अधिक किसानों ने इस एक-दिवसीय प्रशिक्षण में भाग लिया.

प्रशिक्षणार्थियों में अधिकतर महिलाएं थीं जिसके कारण इस प्रयास के सफल होने की संभावनाएं बढ़ जाती है. आपको बता दें कि लक्ष्मीपुर प्रखंड क्षेत्र स्थित केडिया गांव में वहां की जीवित माटी किसान समिति और ग्रीनपीस इंडिया के सामूहिक प्रयासों के सफल नतीजे सामने आए हैं. गांव रोग मुक्त है और नित्त नई ऊंचाईयों को छू रहा है. गांव के किसानों के अथक प्रयास और सूझ के कारण आज केडिया गांव जैविक खेती एवं भूजल संरक्षण के लिए देश-दुनिया में अपनी खास पहचान बना चुका है.

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