मंडल कारा जमुई : बगैर ‘नजराना’ बाहर नजर नहीं आना

जमुई: जमानत के बाद जेल से बाहर नजर आने के लिए नजराना दिए बगैर कैदी जेल से बाहर नहीं आ सकते. 500, 1000 और कभी—कभी तो 2000 रूपये तक की राशि उनके परिजनों से ऐंठ लेते हैं वहां के कर्मचारी. ऐसा ही कुछ आरोप लगाया है कोर्ट से जमानत मिलने के बाद जमुई जेल से बाहर आने का इंतजार कर रहे विजय, कैलाश व सुभाष के परिजनों ने. मामला प्रकाश में तब आया जब कोर्ट द्वारा कैदी को मिली जमानत के बाद जमुई मंडल कारा के बाहर नजराने की बड़ी रकम को लेकर परिजनों ने इसका विरोध करते हुए जेल प्रशासन के खिलाफ आवाज उठाया और नारेबाजी की.हंगामा कर रहे परिजनों का आरोप था की जेल भेजे जाने के दौरान जेल पर तैनात कर्मचारी कैदी को जेल के अंदर रहने के लिए और अब जमानत मिलने के बावजूद जेल से बाहर निकालने के लिए 500 से लेकर 2000 रुपये तक की मांग कर रहे हैं. कैदियों के परिजनों ने जिला प्रशासन से मांग करते हुए कहा कि जमुई मंडल कारा के कर्मचारियों की यह दिनचर्या बना गई है, वे कैदियों के परिजनों से उगाही कर रहे हैं.

जिला प्रशासन को चाहिए की ऐसे मामलों पर निगरानी रखें. कैदियों के परिजनों ने यह भी बताया कि जेल गए कैदियों को पहले ही ताड़ी पीने पर शराबबंदी का कानून झेलना पड़ा और अब उनके परिजनों से मोटे नजराने की मांग की जा रही है जिससे वे मानसिक रूप से परेशान हो रहे हैं. जमुई मंडल कारा के मेन गेट पर विरोध कर रहे कैदियों के परिजनों का कहना था कि कोर्ट से जमानत मिलने के पश्चात जब वे कैदियों को लेने जेल पहुंचे तो वहां पता चला कि यहां बाहर नजर आने के लिए नजराने का प्रचलन है.

Be the first to comment

Leave a Reply

Your email address will not be published.


*